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*नियद नेल्लानार योजना: बीजापुर के पालनार में स्वास्थ्य क्रांति, ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ से सुदूर वनांचल के ग्रामीणों को मिल रही नई सौगात*

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*नियद नेल्लानार योजना: बीजापुर के पालनार में स्वास्थ्य क्रांति, ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ से सुदूर वनांचल के ग्रामीणों को मिल रही नई सौगात*

 

बीजापुर /मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए संचालित ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गाँव) योजना अब धरातल पर सार्थक परिणाम दे रही है। जिला बीजापुर के दुर्गम क्षेत्र ग्राम पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर के खुलने से 28 जनवरी 2026 से अब तक सैकड़ों ग्रामीणों को उनके घर के समीप ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

*रिकॉर्ड ओपीडी और इनडोर सुविधाएं*

पालनार और आस-पास के गांवों में स्वास्थ्य के प्रति आई इस जागरूकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस अल्प अवधि में ही कुल 747 मरीजों ने ओपीडी (OPD) सेवाओं का लाभ उठाया है। इसके अलावा, आवश्यकतानुसार 16 मरीजों को भर्ती कर उनका सफलतापूर्वक उपचार किया गया। पहले जिन ग्रामीणों को छोटी बीमारियों के लिए भी मीलों पैदल चलना पड़ता था, उन्हें अब विशेषज्ञ परामर्श और निःशुल्क दवाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल रही हैं।

*मातृत्व एवं शिशु स्वास्थ्य*

सुरक्षित प्रसव और त्वरित सेवाएं
संवेदनशील क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस केंद्र में अब तक 5 सुरक्षित प्रसव कराए गए हैं। शासन की मंशा के अनुरूप, नागरिकों को शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने हेतु नवजातों के जन्म प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए। साथ ही, क्षेत्र की 15 गर्भवती महिलाओं (ANC) और 18 धात्री माताओं (PNC) की नियमित स्वास्थ्य जांच और टीकाकरण सुनिश्चित किया गया है।

*गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान (NCD स्क्रीनिंग)*

योजना के तहत गैर-संचारी रोगों (NCD) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पालनार केंद्र में अब तक 250 ग्रामीणों की स्वास्थ्य स्क्रीनिंग की गई, जिसमे
25 मरीज उच्च रक्तचाप (Hypertension) से ग्रसित पाए गए।
12 मरीज मधुमेह (Diabetes) से पीड़ित मिले।
1 ग्रामीण में ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण मिलने पर तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र हेतु रेफर किया गया।

पालनार में आयुष्मान आरोग्य मंदिर की सफलता यह दर्शाती है कि शासन की योजनाएं अब अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं। इससे न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीणों का प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ हुआ है।

*जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय फलक तक: छत्तीसगढ़ की स्टार फुटबॉलर किरण पिस्दा के संघर्ष की कहानी*

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*जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय फलक तक: छत्तीसगढ़ की स्टार फुटबॉलर किरण पिस्दा के संघर्ष की कहानी*

*किरण भारत के लिए खेल चुकी हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेली हैं*

*किसी भी पोज़िशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत*

आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर,/ जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।

24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।

हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।

किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।

किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।” यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”

इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।

वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”

किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”

किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।

किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”

किरण टीम के प्रदर्शन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीम अच्छा कर रही होती है, तो हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरा होता है। लेकिन जब टीम हार रही होती है, तो व्यक्तिगत प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ियों की चुनौतियों को अच्छी तरह समझती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच इस अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

वह कहती हैं, “जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को हमेशा मौके नहीं मिलते। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास और राज्य तथा देश के लिए खेलने का सपना देखने की प्रेरणा मिलती है।” जहां तक किरण का सवाल है, उनका फोकस फिलहाल इंडियन वुमेंस लीग जैसी घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने पर है। लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है।

वह कहती हैं, “मैं लगातार खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं, नियमित प्रदर्शन करना चाहती हूं और बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। अगर आपका चयन नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं—इसका मतलब है कि आपको और मेहनत करनी होगी।”

*सेवा भारती मुंगेली का सराहनीय अभियान: बेजुबान जीवों के लिए 10 वर्षों से जारी ‘कोटना’ सेवा*

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*सेवा भारती मुंगेली का सराहनीय अभियान: बेजुबान जीवों के लिए 10 वर्षों से जारी ‘कोटना’ सेवा*

 तिजराम साहू ब्यूरो मुंगेली — भीषण गर्मी के दिनों में जहां इंसानों को पानी की जरूरत बढ़ जाती है, वहीं बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना एक बड़ी सेवा मानी जाती है। इसी मानवीय भावना को जीवंत रखते हुए सेवा भारती मुंगेली द्वारा पिछले लगातार 10 वर्षों से नगर में “कोटना” (पानी की टंकी) रखने का सराहनीय अभियान चलाया जा रहा है।

इस वर्ष भी सेवा भारती मुंगेली द्वारा नगर के विभिन्न स्थानों पर कोटना रखकर पशु-पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था की जाएगी। संगठन का उद्देश्य है कि गर्मी के दौरान कोई भी बेजुबान जीव प्यासा न रहे और उन्हें आसानी से स्वच्छ पानी उपलब्ध हो सके। इस संबंध में पार्षद रोशन सोनी ने जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान पूरी तरह से जनसहभागिता पर आधारित है। उन्होंने नगरवासियों से अपील की है कि जो भी व्यक्ति अपने घर, दुकान या प्रतिष्ठान के सामने कोटना रखना चाहते हैं, वे आगे आएं और जिम्मेदारीपूर्वक उसमें नियमित रूप से पानी भरते रहें। इससे न केवल जीवों की प्यास बुझेगी, बल्कि समाज में सेवा और करुणा का संदेश भी फैलेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल एक सेवा नहीं बल्कि एक पुण्य का कार्य है, जिसमें हर नागरिक की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। छोटे-छोटे प्रयास मिलकर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं और जीवों के प्रति हमारी संवेदनशीलता को दर्शाते हैं।

इस अभियान में सहयोग करने के इच्छुक लोग नीचे दिए गए नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं—

📞 9977586333

📞 7000316598

📞 9098997800

📞 8319651787

📞 9893638419

सेवा भारती मुंगेली ने सभी नागरिकों से इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है, ताकि इस गर्मी में हर जीव को पानी मिल सके और “जीव सेवा ही शिव सेवा” का संदेश साकार हो सके।

*नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा*

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नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति

जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल

रायपुर/केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है।

ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी।

अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है।

जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें।

ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

*एक दूसरे राज्य के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने का है यह महत्वपूर्ण अवसर – राज्यपाल श्री डेका*

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*एक दूसरे राज्य के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने का है यह महत्वपूर्ण अवसर – राज्यपाल श्री डेका*

*140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान – मुख्यमंत्री श्री साय*

*लोकभवन में मनाया गया विभिन्न राज्यों का स्थापना दिवस*

रायपुर, /राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि यह अवसर इन राज्यों की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक परंपराओं और विकास यात्रा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के माध्यम से आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ाना है जिससे भारत की एकता और अखंडता मजबूत होती है।

राज्यपाल श्री रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में आज लोकभवन में 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित थे।

एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में राज्यपाल श्री डेका ने मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन दीव, बिहार, राजस्थान और ओडिशा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

राज्यपाल ने मिजोरम और अरूणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संुदरता और जनजातीय संस्कृति, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव की पर्यटन एवं औद्योगिक विशेषताओं, बिहार के लोगों का अर्थव्यवस्था एवं विकास में योगदान, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत, राजस्थान के लोगों के व्यापारिक उन्नति और शौर्य परंपरा तथा ओडिशा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बहुत समानताएं हैं। राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत बनाते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत 140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है। भाषा, वेशभूषा, खान-पान में भले ही हम अलग अलग है लेकिन अनेकता में एकता हमारी देश की विशेषता हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम इसी भावना को दर्शाता है।

छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच रोटी बेटी के संबंध, राजस्थान के व्यापारियों का छत्तीसगढ़ के व्यापार एवं उद्योग की उन्नति में योगदान सहित अन्य राज्यों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत हम लोग विभिन्न राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति से परिचित हो रहे हैं।

समारोह में राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों की विशेषताओं, परंपरा, संस्कृति पर प्रकाश डाला। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सभी राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी राज्यपाल को अपने राज्य की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में राज्यपाल के विधिक सलाहकार श्री भीष्म प्रसाद पाण्डेय के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर राज्यपाल ने उनका सम्मान किया। इसी तरह राज्यपाल की उप सचिव सुश्री निधि साहू ने देहदान का निर्णय लिया है, जिसकी सराहना करते हुए श्री डेका ने उन्हें भी सम्मानित किया।

कार्यक्रम में विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना, अन्य अधिकारी एवं इन सभी राज्यों के युवा, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 *अकलतरा: विकास खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मानपूर्वक विदाई समारोह आयोजित किया गया*

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 *अकलतरा: विकास खंड शिक्षाधिकारी कार्यालय में सेवानिवृत्त शिक्षकों का सम्मानपूर्वक विदाई समारोह आयोजित किया गया*।

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर चांपा इस दौरान शासकीय सेवा से निवृत्त होने वाले शिक्षकों को उसी दिन पीपीओ (पेंशन भुगतान आदेश) प्रदान कर पेंशन प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया गया।
कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, शासन के निर्देशों के तहत सेवानिवृत्ति के बाद कर्मचारियों के देयकों के भुगतान में किसी प्रकार की देरी न हो, इसके लिए विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसी क्रम में विकास खंड शिक्षाधिकारी श्री देवकांत द्विवेदी के मार्गदर्शन में कार्यालय द्वारा तत्परता से कार्य किया गया।
प्रधान पाठक श्री गंगाराम साहू, जो

28 फरवरी को शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हुए, उन्हें सेवानिवृत्ति के दिन ही कोष लेखा पेंशन संभागीय कार्यालय से पीपीओ जारी किया गया। वहीं, प्रधान पाठक श्री संजय सिंह सकरवार, जो 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए, उनका भी पीपीओ उसी दिन जारी कर दिया गया।
इस अवसर पर बीईओ श्री द्विवेदी द्वारा दोनों सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल, श्रीफल एवं पीपीओ प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में सहायक विकास खंड शिक्षा अधिकारी श्रीमती रत्नमाला सिंह, श्रीमती स्वाति राठौर, पेंशन खंड प्रभारी मनोज यादव, सुधांशु बरेठ, शैक्षिक समन्वयक श्री अम्बरीष बैस, श्री रूपेश सिंह, ऑपरेटर देवेंद्र देवांगन सहित अन्य स्टाफ उपस्थित रहे।

*बिलासपुर CMHO कार्यालय में नियमों का अभाव! स्थापना शाखा में नहीं हैं शासन के निर्देश, भ्रष्टाचार के आरोप तेज*

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छत्तीसगढ़ राज्य का एक ऐसा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला बिलासपुर कार्यालय है जिसके स्थापना शाखा के विज्ञप्त एवं अवि ज्ञप्त शाखा में चिकित्सकों एवं विभिन्न संवर्ग तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के भिन्न भिन्न पद धारित कार्यरत *शासकीय सेवकों से कार्य लेने शासन द्वारा समय समय पर प्रसारित कोई भी नियम /निर्देश दस्तावेज स्थापना शाखा में संधारित ही नहीं है ।*
यदि शासकीय सेवक चाहे वह चिकित्सक हो या अन्य पद धारी कर्मचारी द्वारा *पद दायित्व के विरुद्ध कार्य संपादन कर रहे हों तो उन्हें दंडित करने हेतु शासन द्वारा प्रसारित कोई भी आदेश/ नियम/ निर्देश दस्तावेज संधारित ही नहीं है ।*
ऐसा स्वयं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी बिलासपुर जिला कार्यालय के *स्थापना प्रभारी अधिकारी डॉक्टर रक्षित जोगी* अपने पत्र के माध्यम से प्रमाणित कर रहे हैं ।
और शायद इसी लिए भ्रष्टाचार चरम पर है ।भ्रष्टाचारियों के लिए जिला कार्यालय और ब्लॉक कार्यालय स्वर्ग बना हुआ है ।
*जिला कार्यालय के स्थापना शाखा में चिकित्सकों एवं विभिन्न संवर्ग के कर्मचारियों से पद के अनुरूप कार्य लेने/ पद के अनुरूप कार्य संपादन नहीं करने पर दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करने शासन के नियम निर्देश(नियमावली) कार्यालय के स्थापना शाखा में संधारित नहीं कोई प्रावधान नहीं होने के कारण पूरा जिला भयमुक्त होकर अपने हिसाब से कार्य कर रहा है* जिसके कारण समस्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में जिला पूरे प्रदेश में अंतिम पायदान में सुशोभित हो रहा है ।
जिले में संचालित विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के वास्तविक लाभ से आम ग्रामीण ,माताएं बच्चे बुजुर्ग रोगग्रस्त मरीज वंचित हो रहे हैं ।
नियम विरुद्ध कार्य संपादन करने और कराने वाले शासन द्वारा जनहित में दी जा रही राशि बंदर बात करते हुए अवैध तरीके से लाभ ले रहे है तो वहीं दूसरी तरफ ईमानदारी से निष्ठा पूर्वक कार्य संपादन कर रहे अधिकारी कर्मचारी प्रताड़ित हो रहे है ।
सवाल यह उठता है कि –
— यदि विभिन्न पदों के लिए शासन द्वारा निर्धारित प्रसारित कार्य दायित्व और धारित पद के विपरीत नियम विरुद्ध कार्य करने पर कार्यवाही से संबंधित कोई नियम निर्देश दस्तावेज संधारित नहीं है तो किस आधार पर कर्मचारियों को नोटिस जारी किया जा रहा है?
— किस आधार पर वेतन रोकने /वेतन वृद्धि रोकने आदेश प्रसारित किया जा रहा है?
— विभिन्न पदों पर पदोन्नति कैसे की जा रही है ?
— विभिन्न पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया कैसे सम्पन्न की जा रही है?
स्थापना प्रभारी के लिखित कथन से स्पष्ट होता है कि अभी तक जितने भी पदों पर नियुक्तियां, पदोन्नति हुई है, वेतन वृद्धि में रोक लगाई गई है,बर्खास्तगी,की गई है,सभी निरस्त माना जाएगा ।

*महिला उद्यमियों को मिला बाजार विस्तार का मार्गदर्शन, एमडीए कार्यशाला संपन्न*

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तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली— जिले में महिला उद्यमियों को बाजार से जोड़ने, उनके उत्पादों की बिक्री एवं ब्रांडिंग को मजबूत करने और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से महिला उद्यमियों हेतु मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस (एमडीए) कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य महिला उद्यमियों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सदस्यों तथा महिला संचालित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को बाजार विकास सहायता योजनाओं, प्रदर्शनी/मेलों में भागीदारी, ब्रांडिंग, पैकेजिंग सुधार एवं डिजिटल मार्केटिंग के माध्यम से व्यवसाय विस्तार के लिए सक्षम बनाना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ जनपद पंचायत मुंगेली के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विक्रम सिंह ठाकुर ने किया। उन्होंने कहा कि महिला उद्यमिता आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक परिवर्तन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि एमडीए जैसी योजनाएं महिला उद्यमियों को बड़े बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायक सिद्ध होती हैं। कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत जानकारी दी गई, जिसमें एमडीए योजनाएं, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के मेलों में भागीदारी की प्रक्रिया, उत्पादों की ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, बी2बी व बी2सी मार्केट लिंकज, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिक्री विस्तार तथा सरकारी अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया शामिल रही। इस दौरान सफल महिला उद्यमियों के उदाहरण प्रस्तुत किए गए और प्रतिभागियों को व्यावहारिक सुझाव दिए गए कि वे अपने उत्पादों को प्रतिस्पर्धी बाजार में कैसे स्थापित करें। प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान करते हुए उन्हें आगे की कार्ययोजना तैयार करने के लिए मार्गदर्शन भी दिया गया। कार्यक्रम में जिलेभर से लगभग 40 महिला उद्यमियों, एसएचजी प्रतिनिधियों एवं महिला संचालित उद्यमों ने सक्रिय भागीदारी की। प्रतिभागियों ने इसे प्रेरणादायक एवं उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन की अपेक्षा जताई। कार्यक्रम में विकासखंड परियोजना प्रबंधक शैलेन्द्र बिंझवार सहित विभागीय अधिकारी, विपणन विशेषज्ञ एवं संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। एएफसी इंडिया लिमिटेड द्वारा सभी प्रतिभागियों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया गया।

*सशस्त्र नक्सलवाद की समाप्ति संकल्प पूर्ति पर सिद्ध खेड़ापति हनुमान महाराज मंदिर प्रांगण कवर्धा में हनुमंत भंडारा का आयोजन*

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हिमांशु सिंह ठाकुर ब्यूरो कवर्धा नियत तिथि तक बस्तर सहित छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सलवाद के पूर्णतः समाप्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में 2 अप्रैल को कवर्धा स्थित खेड़ापति हनुमान जी महराज मंदिर में पावन हनुमंत भंडारा का आयोजन किया जा रहा है। इस पावन आयोजन के माध्यम से प्रदेश में स्थापित शांति, सुरक्षा और समृद्धि के नए युग का अभिनन्दन करते ईश्वर का आभार नमन-वंदन किया जाएगा।

4 दशकों से अधिक समय से छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से जूझ रहा था। नक्सलवाद ने विशेषकर बस्तर अंचल को लंबे समय तक प्रभावित किया, जहां हजारों लोगों की जाने व बुनियादी विकास कार्य बाधित रहे और आम जन-जीवन असुरक्षा व दंश के बारूदी साये में रहा। बस्तर सहित छत्तीसगढ़ के कई अन्य जिले भी नक्सलवाद से पीड़ित और प्रभावित रहे, जिसमें कबीरधाम जिला भी शामिल है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह के संकल्प के अनुसार नियत समय पर आज छत्तीसगढ़ ही नहीं, समूचे देश से सशस्त्र नक्सलवाद का अंत हो रहा है, दशकों से चली आ रही हिंसा और भय का दौर समाप्त हो रहा है, तब आम लोगों में भी खुशी का माहौल है।

जन सामान्य में खुशी इस बात की भी है, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार के गृह मंत्री के रूप में कवर्धा के विधायक श्री विजय शर्मा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने में अहम भूमिका निभाई। सबसे अहम तथ्य यह कि यह ऐतिहासिक उपलब्धि पुलिस और सुरक्षा बलों के जवानों के साहस, वीरता और बलिदानों के कारण संभव हो सकी है। उन जवानों के अमर बलिदान का पावन स्मरण और भगवान खेड़ापति हनुमान जी महराज का पूजन अर्चन कर प्रदेश में शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना के साथ पावन भंडारा का शुभारंभ प्रातः 11 बजे किया जाएगा।

कवर्धा के माटीपुत्र विजय शर्मा ने भक्तजनों को इस अवसर पर सादर आमंत्रित करते हुए कहा कि खेड़ापति हनुमान महाराज जी की असीम कृपा से हम सब उस लक्ष्य को प्राप्त कर सके जो वर्षो तक असाध्य माना जाता था। अंजनीनंदन , श्रीराम भक्त वीर हनुमान जी की अशेष कृपा से आज हमारा छत्तीसगढ़ के शान्तिमार्ग पर आरूढ़ हुआ। आइए इस पावन अवसर पर हम सब मारूतिनंदन के श्रीचरणों मे नमन-वन्दन कर उनके असीम आशीर्वाद का वरण करे।

*मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने किया विभिन्न निजी हॉस्पिटल का निरिक्षण*

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तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली– छ.ग. राज्य उपचर्यागृह रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन नियम 2013 अंतर्गत दिनांक 01.04. 2026 को जिला स्तरीय निरीक्षण टीम डॉ. शीला साहा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला मुंगेली, डॉ. कमलेश खैरवार, जिला नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट, डॉ. प्रशांत सिंग ठाकुर, प्रभारी अधिकारी जिला आयुर्वेद अधिकारी के द्वारा निम्नानुसार संस्थाओं का निरीक्षण किया गया।

कंचन क्लीनिक लोरमी के निरीक्षण के दौरान संस्था द्वारा क्लीनिक के लाइसेंस पर 06 बिस्तर अस्पताल संचालित किया जाना पाया गया। संबंधित संस्था को पिछले छः माह से उपरोक्त संबंध में सुधार हेतु निर्देश दिये गये थे, परंतु संचालक द्वारा निर्देशों का पालन नहीं करते हुए नियम विरूद्ध 06 बिस्तर अस्पताल संचालित किया जा रहा था। संबंधित संस्था को नियमानुसार क्लीनिक सुचारू रूप से संचालित करने हेतु निर्देश दिया गया तथा अतिरिक्त संचालित बिस्तर को सीलबंद किया गया। जे.के. हॉस्पिटल लोरमी का निरीक्षण किया गया, अस्पताल के ओ.पी.डी. एरिया में जनरल वाशरूम महिला एवं पुरुष नहीं पाया गया तथा ड्यूटी डॉक्टर की उपस्थिति कम पाई गई। बिलासा केयर मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल बोड़तराकला, लोरमी का निरीक्षण किया गया जहां बिलासा पब्लिक स्कूल भवन को अस्पताल बनाया जा रहा है, जिसका आधारभूत संरचना पूर्ण नहीं होने के कारण आवेदन निरस्त करते हुए आधारभूत संरचना पूर्ण होने पर नवीन आवेदन किये जाने का निर्देश दिया गया। इस बीच एम.सी.एच. हॉस्पिटल लोरमी, जे. के. सोनोग्राफी सेंटर, शांति पाठक सोनोग्राफी सेंटर,

जायसवाल क्लीनिक लोटमी, प्रभा हॉस्पिटल लोरमी, सीएचसी लोरमी का निरीक्षण किया गया।

समस्त स्वास्थ्य संस्थाओं को नर्सिंग होम एक्ट नियमो का कड़ाई से पालन करने निर्देश दिये गये है।