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*महिला द्वारा नाबालिग बालक के साथ अनाचार, पोक्सो अधिनियम के तहत कार्यवाही महिला के खिलाफ अपराध दर्ज*

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*महिला द्वारा नाबालिग बालक के साथ अनाचार, पोक्सो अधिनियम के तहत कार्यवाही महिला के खिलाफ अपराध दर्ज*

कबीरधाम जिले में सनसनीखेज एवं चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें महिला के विरुद्ध नाबालिग बालक के साथ अनाचार किए जाने का अपराध दर्ज किया गया है।

कबीरधाम:-पुलिस अधीक्षक कबीरधाम धर्मेन्द्र सिंह (भा.पु.से.) के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र बघेल एवं अमित पटेल के मार्गदर्शन तथा पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओपी) आशीष शुक्ला के पर्यवेक्षण में कबीरधाम पुलिस द्वारा मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्यवाही की गई है। थाना कोतवाली कबीरधाम में अपराध क्रमांक 123/2026 धारा 04 पोक्सो अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई है।

प्रार्थी द्वारा प्रस्तुत आवेदन के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से एक महिला से उसका परिचय हुआ, जिसके पश्चात बातचीत एवं मुलाकात का क्रम प्रारंभ हुआ एवं दोस्ती हुई। बाद में दिनांक 01/03/2026 को आरोपी महिला द्वारा नाबालिग को भोरमदेव रोड स्थित भुनेश्वर होटल बुलाया गया, जहां उसे भावनात्मक दबाव एवं मानसिक प्रलोभन में देकर उसके साथ अनाचार की घटना को अंजाम दिया गया। घटना के पश्चात आरोपी द्वारा प्रार्थी को डराया-धमकाया गया, जिससे वह मानसिक दबाव में आ गया और तत्काल शिकायत दर्ज नहीं करा सका।

बाद में हिम्मत जुटाकर प्रार्थी द्वारा थाना में रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिस पर कबीरधाम पुलिस ने बिना विलंब किए अपराध पंजीबद्ध कर लिया। प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है तथा उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा जा रहा है। प्रकरण में पोक्सो अधिनियम के तहत सख्त वैधानिक कार्यवाही की जा रही है।

उक्त कार्यवाही में थाना प्रभारी निरीक्षक योगेश कश्यप, उप निरीक्षक दिव्या शर्मा एवं थाना कोतवाली की टीम का विशेष योगदान रहा।

कबीरधाम पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले संपर्कों में सतर्कता बरतें तथा किसी भी प्रकार की आपराधिक घटना या उत्पीड़न की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय पर सख्त कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की मेहनत से खत्म हुआ जल संकट*

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और जिला प्रशासन की मेहनत से खत्म हुआ जल संकट*

पानी के लिए नहीं भटकेंगे ग्रामीण, 117 घरों में पहुंचा अमृत*

रायपुर /कभी नक्सल भय और पेयजल संकट से जूझता सुकमा जिले का दूरस्थ ग्राम लखापाल आज विकास की नई कहानी लिख रहा है। वर्षों तक जहां ग्रामीणों को पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था, वहीं अब हर घर में नल से शुद्ध पेयजल पहुंच रहा है। यह बदलाव केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन और छत्तीसगढ़ शासन की नियद नेल्लानार योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से संभव हो पाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर श्री अमित कुमार के मार्गदर्शन में कोंटा विकासखंड के घोर नक्सल प्रभावित ग्राम लखापाल में विकास की वह रोशनी पहुंची है, जिसकी यहां वर्षों से प्रतीक्षा थी।

जहां पानी के लिए थी जद्दोजहद, अब घर-घर बह रहा अमृत*
जिला मुख्यालय सुकमा से लगभग 88 किलोमीटर दूर स्थित लखापाल गांव लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट की दोहरी मार झेलता रहा। गांव के 117 परिवार पानी के लिए बोरिंग, कुएं और एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में जलस्तर इतना नीचे चला जाता था कि ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ता था। महिलाओं और बच्चों को कई बार दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था। समय और मेहनत के साथ-साथ बीमारियों का खतरा भी लगातार बना रहता था।

72 लाख की योजना ने बदल दिया गांव का भविष्य*
सुकमा जिले के कार्यपालन अभियंता श्री विनोद कुमार राम ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत ग्राम पंचायत लखापाल में 72.01 लाख रुपये की लागत से 4 सोलर पंप टंकी स्थापित की गई। इसके माध्यम से गांव में 117 घरेलू नल कनेक्शन दिए गए। गांव की कुल जनसंख्या 465 है, और अब हर परिवार को नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

महिलाओं की आंखों में राहत, चेहरे पर मुस्कान*
गांव की महिला श्रीमती लखे तेलाम भावुक होकर बताती हैं कि पहले पानी के लिए बहुत परेशानी होती थी। नाले और बोरिंग से पानी लाना पड़ता था। कई बार मौसमी बीमारी हो जाती थी। महुआ बीनकर लौटने के बाद पानी लेने जाना बहुत मुश्किल होता था। अब नल से घर में ही दिनभर पानी मिलता है। हम बहुत खुश हैं। शासन की योजना बहुत अच्छी है। उनकी बातों में केवल राहत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की उम्मीद झलकती है।

डर के साये से विकास की राह तक*
गांव के निवासी तेलाम बुधु बताते हैं कि पहले लखापाल में भय का माहौल था। हमारा गांव पहले नक्सल समस्या से प्रभावित था। लोग ख़ौफ़ में जीते थे। बिजली, पानी और सड़क की समस्या थी। गांव में पहले नक्सलियों की मीटिंग होती थी। गांववालों से पैसा और चावल-दाल जमा कराया जाता था। लेकिन अब बदलाव आ गया है। अब पंचायत की मीटिंग ग्राम विकास के लिए होती है। बिजली, पानी, राशन और सड़क की सुविधा मिल रही है।” उनके शब्द साफ कहते हैं अब गांव में डर नहीं, विकास की चर्चा होती है।

स्वच्छ जल से स्वास्थ्य में सुधार, बीमारी में कमी*
जल जीवन मिशन के लागू होने के बाद लखापाल में सिर्फ पानी की सुविधा नहीं आई, बल्कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़ा परिवर्तन देखने को मिला। अब जलजनित बीमारियों में कमी आई है और स्वच्छ पेयजल के कारण ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव आया है।

अब सब्जी-बाड़ी से आत्मनिर्भरता की ओर गांव*
नल जल योजना से पानी मिलने के बाद ग्रामीणों ने खेती और बाड़ी की ओर कदम बढ़ाया है। अब गांव के लोग अपने घर के आसपास टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी, सेमी और खट्टा भाजी उगा रहे हैं। इससे न केवल घर में सब्जी की व्यवस्था हो रही है, बल्कि बाजार से सब्जी खरीदने का खर्च भी बच रहा है।

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने बताया कि जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्राम लखापाल जैसे दूरस्थ और नक्सल प्रभावित क्षेत्र में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना प्रशासन की बड़ी उपलब्धि है। इससे ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा और स्वास्थ्य में भी सुधार होगा। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जिले के प्रत्येक गांव तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाकर विकास की रोशनी हर क्षेत्र तक पहुंचाई जाएगी।*

ग्रामीणों ने जताया मुख्यमंत्री और प्रशासन के प्रति आभार*
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे जीवन आसान, सुरक्षित और सम्मानजनक हुआ है।

लखापाल बना उदाहरण- विकास हर कोने तक पहुंच रहा है*
जल जीवन मिशन ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार की योजनाएं ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है। आज लखापाल गांव केवल पानी की सुविधा नहीं पा रहा बल्कि वह भय से मुक्त होकर आत्मनिर्भरता और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है।

*समर कैंप 2026 : गर्मी की छुट्टियों में सीखने का सुनहरा अवसर*

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*समर कैंप 2026 : गर्मी की छुट्टियों में सीखने का सुनहरा अवसर*

*कला केंद्र रायपुर में तीन चरणों में आयोजन, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष फोकस*

रायपुर, / शहर के प्रतिष्ठित संस्थान कला केंद्र रायपुर द्वारा “समर कैंप 2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों की गर्मी की छुट्टियों को रचनात्मक, उपयोगी और ज्ञानवर्धक बनाना है।

कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के निर्देश पर कला केंद्र में समर कैंप के माध्यम से बच्चों को संगीत, नृत्य, चित्रकला, योग, शतरंज एवं स्पोकन इंग्लिश जैसी विविध गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे बच्चों की प्रतिभा निखरेगी और उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ रचनात्मक सोच का विकास होगा।

यह कैंप तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। पहला चरण 15 अप्रैल से 30 अप्रैल, दूसरा चरण 01 मई से 15 मई तथा तीसरा चरण 16 मई से 30 मई तक चलेगा। प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे से 9:30 बजे तक कक्षाएं संचालित होंगी।

कैंप में भाग लेने के लिए पंजीयन शुल्क 110 रुपए तथा प्रशिक्षण शुल्क 500 रुपए निर्धारित किया गया है। सीमित सीटों के कारण अभिभावकों से अपने बच्चों का पंजीयन शीघ्र कराने की अपील की गई है।

यह समर कैंप जी.ई. रोड स्थित इंटरनेशनल स्विमिंग पूल के पीछे स्थित कला केंद्र परिसर में आयोजित किया जाएगा। अधिक जानकारी एवं पंजीयन के लिए इच्छुक अभिभावक 9109029034 एवं 9669039034 पर संपर्क कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप जिलेवासियों को कला के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से कला केंद्र रायपुर की शुरुआत की गई है। यह केंद्र बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभरा है, जहां संगीत, तबला, हारमोनियम सहित 24 विभिन्न विधाओं का प्रशिक्षण अनुभवी प्रशिक्षकों द्वारा प्रदान किया जा रहा है। यह पहल न केवल प्रतिभाओं को निखारने का कार्य कर रही है, बल्कि जिले में सांस्कृतिक समृद्धि को भी नई दिशा दे रही है।

*आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता: सुकमा में युवाओं को मिली नए जीवन की मजबूत नींव*

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*आत्मसमर्पण से आत्मनिर्भरता: सुकमा में युवाओं को मिली नए जीवन की मजबूत नींव*

कलेक्टर ने लाइवलीहुड कॉलेज में 32 पुनर्वासित युवाओं को मेसन किट वितरण किया

रायपुर /छत्तीसगढ़ शासन की मानवीय, संवेदनशील एवं दूरदर्शी पुनर्वास नीति अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की नई कहानी लिख रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जिला प्रशासन लगातार ऐसे प्रयास कर रहा है, जिससे आत्मसमर्पित माओवादी युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सके। इसी क्रम में जिला मुख्यालय सुकमा स्थित लाइवलीहुड कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में 32 आत्मसमर्पित युवाओं को रोजगारोन्मुख मेसन (राजमिस्त्री) किट प्रदान की गई। कार्यक्रम कलेक्टर श्री अमित कुमार के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कलेक्टर ने युवाओं से संवाद कर उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

कलेक्टर श्री अमित कुमार ने कहा कि पुनर्वास केवल आत्मसमर्पण तक सीमित नहीं है। हमारा लक्ष्य है कि आप सभी को स्थायी आजीविका, आत्मनिर्भरता और समाज में सम्मान मिले। आज दी जा रही मेसन किट केवल औजार नहीं, बल्कि आपके नए जीवन की मजबूत नींव है। निर्माण कार्यों में रोजगार की संभावनाएं लगातार बढ़ रही हैं। राजमिस्त्री का कार्य ऐसा कौशल है जिससे आप मेहनत और ईमानदारी के बल पर कुशल कारीगर बनकर आगे चलकर स्वरोजगार, ठेकेदारी और उद्यमिता की ओर भी बढ़ सकते हैं। मुझे विश्वास है कि आप इस अवसर का पूरा लाभ उठाएंगे और प्रशिक्षण व अनुशासन के साथ अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे।

इस पहल के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि पुनर्वास का अर्थ केवल मुख्यधारा में लौटना नहीं, बल्कि आत्मसम्मान के साथ जीवन को नई दिशा देना है। मेसन किट मिलने से युवाओं को निर्माण कार्यों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे, जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकेंगे।

*टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर जिला स्तरीय बैठक सम्पन्न*

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*टीबी मुक्त भारत अभियान को लेकर जिला स्तरीय बैठक सम्पन्न*

रायपुर, टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आज मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन की अध्यक्षता एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश चौधरी की उपस्थिति में सम्पन्न हुई।

बैठक में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के राज्य अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा, निजी अस्पताल बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. शुक्ला, IMA के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता, फोगसी की अध्यक्ष डॉ. मोनिका पाठक, फोगसी के सचिव एवं अन्य सदस्य सहित जिले के निजी अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

टीबी नोडल अधिकारी डॉ. अविनाश चतुर्वेदी ने 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के द्वितीय चरण की जानकारी देते हुए बताया कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता एवं स्क्रीनिंग अभियान संचालित किया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले के ग्राम स्तर तक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में निःशुल्क टीबी स्क्रीनिंग की जाएगी। साथ ही निजी अस्पतालों से संभावित टीबी मरीजों की जानकारी साझा करने, एक्स-रे जांच कराने एवं “निक्षय मित्र” के रूप में सहभागिता करने की अपील की गई।

जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन ने सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को समन्वय के साथ कार्य करते हुए अभियान को सफल बनाने के निर्देश दिए।

यह अभियान छत्तीसगढ़ एवं देश को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

*रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा*

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*रात में मछुआरे का काम करने वाले अब्दुल फताह की छलांग ने लक्षद्वीप एथलेटिक्स के लिए एक नया अध्याय लिखा*

*वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट बन गए हैं, जिन्होंने लंबी कूद में 7 मीटर की दूरी तय की*

*लक्षद्वीप में कोई सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक नहीं है, इसलिए अब्दुल मिट्टी के गड्ढों में अपनी लंबी कूद का अभ्यास करते हैं*

रायपुर, / अब्दुल फताह ज़्यादातर रातों को समुद्र में होते हैं, जहां वे मछुआरे बनकर अपने परिवार की रोज़ी-रोटी कमाने में मदद करते हैं। जैसे ही सुबह होती है, वे सीधे ट्रेनिंग ग्राउंड की ओर निकल पड़ते हैं और एक एक अलग सपने का पीछा करते हुए लक्षद्वीप को ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ 2026 में पहला मेडल दिलाया।

कवरत्ती और कदमत द्वीपों के बीच स्थित, दूरदराज के अमीनी द्वीप जो लगभग 2.7 किमी लंबा और 1.2 किमी चौड़ा है, और जिसका कुल भू-क्षेत्रफल 2.60 वर्ग किमी है के 18 वर्षीय लॉन्ग जम्पर ने जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर मैदान में 7.03 मीटर की अपनी करियर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर स्वर्ण पदक जीता। यह इस छोटे से केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। केंद्र शासित प्रदेश के खेल अधिकारी अहमद जावेद हसन ने मुस्कुराते हुए कहा, वह लक्षद्वीप के पहले ऐसे एथलीट हैं जिन्होंने 7 मीटर की दूरी पार की है और यह वाकई एक खास बात है।”

मछुआरे परिवार में जन्मे फताह भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं और घर की बड़ी ज़िम्मेदारी संभालते हैं। 12वीं कक्षा पूरी करने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी। इसके बजाय, उन्होंने अपने पिता के पारिवारिक व्यवसाय में हाथ बँटाने और खेल को अपने जुनून के तौर पर अपनाने का फ़ैसला किया।फताह ने कहा, ” कोई और चारा नहीं है, आपको चीज़ों में संतुलन बनाना ही पड़ता है। जब मैं स्कूल में था, तभी से मैं अपने पिता की मछली पकड़ने के काम में मदद करता आ रहा हूँ। यही हमारी आमदनी का एकमात्र ज़रिया है। हमारे परिवार में छह लोग हैं। सुबह मैं अपनी ट्रेनिंग के लिए जाता हूँ; मेरे परिवार को इस बारे में पता है, भले ही वे इस खेल के बारे में बहुत कम समझते हों।”

दिलचस्प बात यह है कि एथलेटिक्स उनका पहला प्यार नहीं था। फताह शुरू में फुटबॉल खेलते थे, जैसा कि द्वीप के कई दूसरे युवा करते थे। हालांकि, कुछ साल पहले एक स्थानीय इंटर-आइलैंड प्रतियोगिता के दौरान उनकी यात्रा में एक अहम मोड़ आया। कोच मोहम्मद कासिम ने इस युवा की दौड़ने की ज़बरदस्त काबिलियत को पहचाना और उन्हें एथलेटिक्स में आने का सुझाव दिया। तब से, फताह ने लॉन्ग जंप और 100-मीटर स्प्रिंट में ट्रेनिंग शुरू कर दी। लगभग उसी समय, अमिनी एथलेटिक्स एसोसिएशन का गठन होने लगा, जिससे इस क्षेत्र में खेलों के विकास को एक सही ढाँचा मिला।

फताह और कई अन्य युवा एथलीटों को धीरे-धीरे कोचिंग की मदद दी गई, जिससे उन्हें ज़्यादा व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग करने में मदद मिली। सिर्फ़ दो सालों में, एसोसिएशन ने लगभग 384 एथलीटों को तैयार किया। इस समूह में से, 17 एथलीटों को गेम्स में लक्षद्वीप का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया। जगदलपुर में फत्ताह की 7.03 मीटर की गोल्ड-विनिंग जंप, वहां के हालात को देखते हुए, खास तौर पर संतोषजनक थी। ट्रेनिंग के दौरान, उन्होंने बताया था कि उनकी जंप आमतौर पर 6.5 से 6.7 मीटर के आस-पास रहती है। उन्होंने कहा. ” खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में आने से पहले, मैंने अपने लिए 7.15 मीटर तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया था। मुझे खुशी है कि मैं सात मीटर का आँकड़ा पार कर पाया, और यह गोल्ड मेडल मुझे और बेहतर करने के लिए प्रेरित करेगा,”

लक्षद्वीप धीरे-धीरे भारत के एथलेटिक्स के नक्शे पर अपनी जगह बना रहा है। इस केंद्र शासित प्रदेश की सबसे जानी-मानी एथलीटों में से एक हैं मुबस्सिना मोहम्मद, जो 19 साल की लॉन्ग जंपर और हेप्टाथलीट हैं। कुवैत में हुए 2022 एशियन U18 एथलेटिक्स चैंपियनशिप में लॉन्ग जंप में सिल्वर मेडल जीतकर वह लक्षद्वीप की पहली इंटरनेशनल मेडलिस्ट बनीं। उन्होंने महिलाओं की लॉन्ग जंप में 6.30 मीटर के अपने पर्सनल बेस्ट के साथ जूनियर नेशनल टाइटल भी जीता।

मुबस्सिना की तरह, फताह भी बिना किसी आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा के ट्रेनिंग करते हैं। लक्षद्वीप, जो सिर्फ़ 32 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जिसकी आबादी 70,000 से भी कम है, वहां अभी तक कोई ठीक-ठाक सिंथेटिक ट्रैक या एथलेटिक्स स्टेडियम नहीं है। नतीजतन, कई एथलीट मिट्टी के ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, जबकि फत्ताह अक्सर अपने स्प्रिंट इवेंट्स की ट्रेनिंग के लिए पास के एक फुटबॉल मैदान का इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने आगे कहा, ” खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स और दूसरे नेशनल लेवल के मुकाबलों में हमारी सफलता को देखते हुए, हमें उम्मीद है कि हमारे लिए हालात बदलेंगे। हो सकता है कि हमें कुछ नौकरियाँ और ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल जाएं.”

*खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: कर्नाटक बना ओवरऑल चैंपियन, मेजबान छत्तीसगढ़ नौवें स्थान पर*

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*खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: कर्नाटक बना ओवरऑल चैंपियन, मेजबान छत्तीसगढ़ नौवें स्थान पर*

* कर्नाटक ने 23 स्वर्ण पदकों के साथ तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि ओडिशा और झारखंड क्रमशः 21 और 16 स्वर्ण के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे*

* पश्चिम बंगाल ने फाइनल में छत्तीसगढ़ को 1-0 से हराकर पुरुष फुटबॉल का स्वर्ण पदक जीता*

* झारखंड ने अंतिम दिन महिला रिकर्व व्यक्तिगत और पुरुष रिकर्व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किए*

रायपुर, / पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन झारखंड की कोमालिका बारी ने अपने मिक्स्ड टीम खिताब के बाद महिला रिकर्व तीरंदाजी में स्वर्ण पदक जीता, जबकि ओडिशा के अर्जुन खारा ने पुरुष रिकर्व वर्ग में स्वर्ण अपने नाम किया। हालांकि, इन उपलब्धियों के बावजूद अंतिम दिन कर्नाटक को पदक तालिका के शीर्ष स्थान से हटाया नहीं जा सका और वह उद्घाटन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में शीर्ष पर बना रहा। मेजबान छत्तीसगढ़ ने भी जनजातीय समुदाय की खेल प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य पदक जीतकर नौवां स्थान हासिल किया। छत्तीसगढ़ का आखिरी पदक पुरुष फुटबॉल में रजत के रूप में आया, जब वे फाइनल में पश्चिम बंगाल से 0-1 से हार गए।

इस उद्घाटन संस्करण में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया, जिसमें लगभग 3,800 खिलाड़ियों ने नौ खेल विधाओं में प्रतिस्पर्धा की। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, भारोत्तोलन और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर थे, जबकि मल्लखंभ और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेल प्रदर्शन (डेमोंस्ट्रेशन) खेलों के रूप में शामिल थे।

इन 106 स्वर्ण पदकों में से कर्नाटक ने 23 स्वर्ण, 8 रजत और 7 कांस्य पदक जीतकर ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। ओडिशा 21 स्वर्ण, 15 रजत और 21 कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और 57 पदकों के साथ 50 से अधिक पदक जीतने वाला एकमात्र दल बना। झारखंड 16 स्वर्ण, 8 रजत और 11 कांस्य पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

ओवरऑल चैंपियन कर्नाटक ने पहले ही दिन से पदक तालिका में बढ़त बना ली थी, खासकर तैराकी में दबदबा बनाते हुए उन्होंने 15 स्वर्ण, 5 रजत और 3 कांस्य पदक जीते। इसके अलावा एथलेटिक्स में 5 और कुश्ती में 3 स्वर्ण पदक जोड़कर उन्होंने सुनिश्चित किया कि ओडिशा और झारखंड उनसे आगे न निकल सकें।

कर्नाटक के मणिकांत एल 8 स्वर्ण और 1 रजत पदक के साथ खेलों के सबसे सफल खिलाड़ी रहे, जबकि उनके साथी धोनिश एन ने तैराकी में 5 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीते। महिला वर्ग में ओडिशा की तैराक अंजलि मुंडा ने 5 स्वर्ण पदक जीते, जबकि कर्नाटक की मेघांजलि ने 4 स्वर्ण और 2 कांस्य पदक अपने नाम किए।

ओडिशा एकमात्र ऐसा दल रहा जिसने सभी छह खेल विधाओं में कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता, जिसमें एथलेटिक्स में 8 और तैराकी में 7 स्वर्ण शामिल हैं। दूसरी ओर, झारखंड ने एथलेटिक्स में 9, कुश्ती में 4 और तीरंदाजी में 3 स्वर्ण पदक जीते, साथ ही बाकी तीन विधाओं में भी कम से कम एक पदक हासिल किया।

फुटबॉल के अलावा, अंतिम दिन तीरंदाजी में चार स्वर्ण पदक दांव पर थे और यह स्पष्ट था कि ओडिशा, जो अंतिम से पहले दिन की प्रतियोगिताओं के बाद कर्नाटक से तीन स्वर्ण पदकों से पीछे था, अब शीर्ष स्थान हासिल नहीं कर सकता क्योंकि वह तीरंदाजी में अधिकतम दो ही स्वर्ण जीत सकता था।

अर्जुन खारा ने पुरुष रिकर्व व्यक्तिगत वर्ग में अपने ही राज्य के सोमनाथ हेम्ब्रम को फाइनल में हराकर एक स्वर्ण पदक जीता, लेकिन पुरुष टीम फाइनल में ओडिशा को झारखंड के खिलाफ 4-6 से हार का सामना करना पड़ा।

इसके बाद कोमालिका बारी ने गुजरात की भार्गवी भगोरा को व्यक्तिगत फाइनल में हराकर झारखंड के लिए एक और स्वर्ण पदक जोड़ा। नागालैंड ने महिला टीम फाइनल में झारखंड को हराकर स्वर्ण पदक जीता और 2 स्वर्ण, 2 रजत और 3 कांस्य पदकों के साथ 14वें स्थान पर रहा।

कुल 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पदक तालिका में जगह बनाई, जिनमें से 20 ने कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता, जो देशभर में प्रतिभा के व्यापक प्रसार को दर्शाता है। महाराष्ट्र 6 स्वर्ण, 10 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा, जबकि अरुणाचल प्रदेश 6 स्वर्ण, 1 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ शीर्ष पांच में शामिल रहा।

*परिणाम*

*तीरंदाजी*

*महिला*
रिकर्व व्यक्तिगत: स्वर्ण – कोमालिका बारी (झारखंड); रजत – भार्गवी भगोरा (गुजरात); कांस्य – रुओविनुओ थेउनुओ (नागालैंड)
रिकर्व टीम: स्वर्ण – नागालैंड; रजत – झारखंड; कांस्य – मध्य प्रदेश

*पुरुष*
रिकर्व व्यक्तिगत: स्वर्ण – अर्जुन खारा (ओडिशा); रजत – सोमनाथ हेम्ब्रम (ओडिशा); कांस्य – पवन परमार (मध्य प्रदेश)
रिकर्व टीम: स्वर्ण – झारखंड; रजत – ओडिशा; कांस्य – मेघालय

*फुटबॉल*
पुरुष: स्वर्ण – पश्चिम बंगाल; रजत – छत्तीसगढ़; कांस्य – अरुणाचल प्रदेश, गोवा

*खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

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*खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का आयोजन जनजातीय प्रतिभाओं के लिए ऐतिहासिक और यादगार मंच – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

*जनजातीय प्रतिभाओं को मिला राष्ट्रीय मंच, खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स बना नए अवसरों का द्वार – उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव*

*व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपए: दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा*

*खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में होंगे आयोजित*

*समापन समारोह में बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया हुए शामिल*

 

रायपुर,/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पंडित दीनदयाल आडिटोरियम रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 10 दिनों में छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर जो जोश और ऊर्जा देखने को मिली, उसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की आदिवासी प्रतिभाओं को एक मंच प्रदान करने और उनकी खेल क्षमता को सामने लाने का अनूठा अवसर साबित हुआ है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने उद्बोधन में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके विजन और मार्गदर्शन के कारण छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की मेजबानी का गौरव प्राप्त हुआ। साथ ही केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के निरंतर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज देश के खेल मानचित्र में प्रमुख स्थान पर स्थापित हुआ है। उन्होंने कहा कि अब यह गेम्स प्रतिवर्ष छत्तीसगढ़ में आयोजित किए जाएंगे, जो राज्य के लिए गर्व का विषय है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज और खेल का रिश्ता सदियों पुराना है। तीरंदाजी, दौड़ और कुश्ती जैसे खेल जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। उन्होंने स्वयं के जनजातीय पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि जनजातीय समाज में अपार ऊर्जा और प्रतिभा निहित है, जिसे सही मंच मिलने पर देश-विदेश में पहचान मिल सकती है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि देश की एकता, संस्कृति और कौशल का महाकुंभ बनकर उभरा है। देशभर के 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय खिलाड़ियों ने इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। यह आयोजन आदिवासी युवाओं को सशक्त बनाने और खेलों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि खिलाड़ियों ने केवल जीत के लिए नहीं, बल्कि साहस और उत्कृष्टता की नई कहानियां रचने के लिए प्रतिस्पर्धा की है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रतिभा केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं, बल्कि बस्तर, सरगुजा, झारखंड और पूर्वोत्तर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी भरपूर है।

समारोह में मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले कर्नाटक, द्वितीय स्थान ओडिशा और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों को बधाई दी। साथ ही छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक (03 स्वर्ण, 10 रजत और 06 कांस्य) हासिल किए हैं। उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्विमिंग में अनुष्का भगत ने 4 रजत पदक जीते, निखिल खलखो और न्यासा पैकरा ने भी पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया। एथलेटिक्स में सिद्धार्थ नागेश ने स्वर्ण और रजत पदक जीते, वहीं अन्य खिलाड़ियों ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वेटलिफ्टिंग में निकिता ने स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश की बेटियों का मान बढ़ाया। बालिका वर्ग फुटबॉल टीम ने स्वर्ण और बालक वर्ग हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को भविष्य के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि निरंतर मेहनत और समर्पण से वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने पदक विजेताओं के लिए नगद पुरस्कार की घोषणा भी की। व्यक्तिगत स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक के लिए 2 लाख रुपये, रजत के लिए 1.5 लाख रुपये और कांस्य के लिए 1 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे। वहीं दलीय स्पर्धाओं में स्वर्ण के लिए 1 लाख रुपये, रजत के लिए 75 हजार रुपये और कांस्य के लिए 50 हजार रुपये देने की घोषणा की गई।

मुख्यमंत्री ने अंत में सभी खिलाड़ियों, कोच, आयोजन समिति, अधिकारियों और सहयोगी संस्थाओं को इस ऐतिहासिक आयोजन को सफल बनाने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ जनजातीय खेलों का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत उन्हें ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक अवश्य पहुंचाएगी।

समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री एवं खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि पूरे देश के जनजातीय खिलाड़ियों ने इस खेल महाकुंभ में उत्साह और ऊर्जा के साथ भाग लिया। उन्होंने बताया कि यह पहला अवसर है जब इस स्तर पर ट्राइबल गेम्स का आयोजन किया गया, जिससे खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन संभव हो पाया।श्री साव ने कहा कि राज्य सरकार ने खिलाड़ियों के आगमन से लेकर प्रतियोगिता के दौरान आवास, भोजन और अन्य सुविधाओं की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की। साथ ही छत्तीसगढ़ की संस्कृति और आतिथ्य का अनुभव कराने का भी प्रयास किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में यह आयोजन और अधिक भव्य रूप में आयोजित होगा। उन्होंने पदक तालिका में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली टीमों को बधाई दी तथा छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी सराहना की।

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री विकास शील ने सभी खिलाड़ियों, अधिकारियों एवं आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि इस आयोजन में देशभर के 2000 से अधिक जनजातीय खिलाड़ी एवं अधिकारियों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतियोगिता एक राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण मंच बन गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जनजातीय प्रतिभाओं को अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह मंच खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा निखारने और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने का अवसर देता है।

इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर मेरीकॉम और फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। साथ ही केबिनेट मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव श्री विक्रम सिसोदिया, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार, रायपुर कमिश्नर श्री संजीव शुक्ला, जनप्रतिनिधिगण, वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी सहित बड़ी संख्या में देश भर से आए खिलाड़ी उपस्थित थे।

*महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने महतारी वंदन योजना मददगार*

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*महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने महतारी वंदन योजना मददगार*

*आर्थिक सहायता मिलने से हेमा सिंग बनीं आत्मनिर्भर*

रायपुर,/ महिलाओं के साथ असमानता को दूर करने, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सतत् सुधार लाने, आर्थिक स्वावलंबन तथा सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार कृत संकल्पित है। महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन, परिवार में उनकी निर्णय लेने की भूमिका को सुदृढ़ करने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा महतारी वंदन योजना लागू की गई है। महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी, जिसे मलिाओं ने इसे एक अवसर के रूप में देखा और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने उपयोग करने लगी।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड के छोटे से ग्राम मझगंवा की श्रीमती हेमा सिंग की कहानी आज कई महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली हेमा सिंग ने आज अपने आत्मविश्वास और सरकारी योजना के सहयोग से अपनी जिंदगी को नई दिशा दी है। महतारी वंदन योजना के तहत उन्हें हर महीने 1000 रुपये की आर्थिक सहायता मिलने लगी। जिसे हेमा सिंग ने इसे एक अवसर के रूप में देखा।

हेमा सिंग ने इस राशि को बचाकर अपने घर के पास एक छोटा सा किराना स्टोर शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी दुकान चल निकली। गांव के लोगों की जरूरतों को पूरा करते हुए उनका व्यवसाय बढ़ने लगा और आय में भी स्थिरता आने लगी। आज उनकी दुकान न सिर्फ उनकी आर्थिक मजबूती का आधार बनी है, बल्कि उनके परिवार के जीवन स्तर में भी बड़ा बदलाव लाई है। हेमा सिंग अब अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं और भविष्य के लिए भी बचत कर रही हैं। पहले जहां रोजमर्रा के खर्चों को लेकर चिंता बनी रहती थी, वहीं अब उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और संतोष साफ नजर आता है।

महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को लगातार आर्थिक मजबूती मिल रही है। महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में नई आशा और अवसर लेकर आया है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अपनी सफलता का श्रेय देते हुए हेमा सिंग कहती हैं कि महतारी वंदन योजना उनके लिए एक नई शुरुआत साबित हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी को आभार व्यक्त किया और कहा कि इस योजना ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।

*ग्राम सांकर के वरिष्ठ नागरिक एवं सम्मानित शिक्षक रामजी लाल साहू (गुरुजी) का दिनांक 2 अप्रैल (गुरुवार) की शाम लगभग 99 वर्ष की आयु में दुखद निधन*

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शोक समाचार

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर चांपा:- ग्राम सांकर के वरिष्ठ नागरिक एवं सम्मानित शिक्षक रामजी लाल साहू (गुरुजी) का दिनांक 2 अप्रैल (गुरुवार) की शाम लगभग 99 वर्ष की आयु में दुखद निधन हो गया। उनके निधन से पूरे गांव में शोक की लहर व्याप्त है।
वे अपने सरल स्वभाव, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज में विशेष योगदान के लिए जाने जाते थे। उनके मार्गदर्शन में कई पीढ़ियों ने शिक्षा प्राप्त कर अपने जीवन को संवारने का अवसर पाया।
उनकी अंतिम यात्रा दिनांक 3 अप्रैल को प्रातः 8 बजे ग्राम सांकर से निकाली गई।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें एवं शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल दें।
ॐ शांति