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*बिना नंबर की गाड़ियों पर लगातार कार्रवाई जारी।*

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कोरबा – जिले में ट्रैफिक पुलिस द्वारा बिना नंबर प्लेट वाहनों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के अंतर्गत पिछले दो दिन में और 193 गाड़ियों पर मोटरयान अधिनियम की धारा 55/177 के तहत चालानी कार्रवाई की गई।अब तक इस अभियान के तहत कुल 256 वाहनों पर चालानी कार्रवाई करते हुए ₹76,800/- का समन शुल्क वसूला गया है।इस अभियान के दौरान वाहनों के इंजन नंबर, चेचिस नंबर तथा वैध दस्तावेजों की जांच के उपरांत ही चालानी कार्रवाई की गई।बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का अपराधिक गतिविधियों (जैसे चोरी, लूट आदि) में उपयोग होने की आशंका को ध्यान में रखते हुए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

कोरबा पुलिस की नागरिकों से अपील:

बिना नंबर प्लेट के वाहन चलाना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि ऐसे वाहन अपराधियों को छुपने और अपराध को अंजाम देने में मदद करते हैं, जिससे शहर की कानून व्यवस्था प्रभावित होती है।

कोरबा पुलिस नागरिकों से आग्रह करती है कि:

अपने वाहनों पर वैध नंबर प्लेट अनिवार्य रूप से लगवाएं।

यातायात नियमों का पालन कर स्वयं सुरक्षित रहें व दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

➡️ *मुंगेली पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल (भा.पु.से.) के द्वारा दिनांक 18.06.2025 के औचक देर रात्रि गश्त भ्रमण कर जिले के सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा*

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➡️ *मुंगेली पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल (भा.पु.से.) के द्वारा दिनांक 18.06.2025 के औचक देर रात्रि गश्त भ्रमण कर जिले के सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा*

➡️ *जिले के संवेदनशीलता को देखते हुये मुंगेली पुलिस अधीक्षक द्वारा रात्रि में थाना मुंगेली शहर, जरहागांव, लालपुर, लोरमी एवं गश्त पाईंट का किया गया आकस्मिक निरीक्षण*

➡️ *मुंगेली पुलिस अधीक्षक ने शहर एवं ग्रामों में भ्रमण करते देर रात्रि में अनावश्यक घुमने वाले संदिग्धों से पुछताछ कर देर रात्रि नही घुमने की दिये सख्य हिदायत*

➡️ *मुंगेली पुलिस अधीक्षक द्वारा गश्त में लगे जवानों, सेक्टर अधिकारी एवं जोनल अधिकारी को नगद ईनाम से किया गया पुरस्कृत व उपस्थित नही मिलने अधिकारी/कर्मचारियों को जारी किया गया शो-काज नोटिस*

तिजराम साहू ब्यूरो मुंगेली:- पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल (भा.पु.से.) द्वारा दिनांक 18.06.2025 को जिले के थाना/चौकी क्षेत्रों का शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जिले के सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने देर रात्रि 01 बजे से 04 बजे तक भ्रमण करते मुंगेली शहर दाउपारा चौक, पड़ाव चौक, नंदी चौक, गोलबाजार चौक, बड़ा बाजार तत्पश्चात् थाना जरहागांव, थाना लालपुर, थाना लोरमी का गश्त पाइन्ट, सेक्टर व जोनल पुलिस अधिकारी को औचक निरीक्षण एवं चेक किये, जो थाना जरहागांव में थाना प्रभारी उप निरी. नंद लाल पैकरा, प्र. आर. लक्ष्मण यादव व थाना लालपुर मे उप.निरी. अमित गुप्ता, गस्त करते प्र.आर. सुरेन्द्र कुर्रे तथा थाना लोरमी में उपनिरी. सुन्दर लाल गोरले आर. सुनील भास्कर रात्रि गस्त करते ड्यूटी पर उपस्थित मिले उनसे पूछताछ किया गया संतोषप्रद जवाब देने पर अधिकारी/कर्मचारियों को नगद ईनाम से पुरस्कृत किया गया व ड्यूटी पर उपस्थित नहीं मिलने वाले अधिकारी/कर्मचारियों को शो-काज नोटिस जारी किया गया। पुलिस अधीक्षक ने भ्रमण के दौरान रात्रि में घुमने वाले संदिग्ध व्यक्तियों से पुछताछ कर रात्रि में अनावश्यक नही घुमने की सख्त हिदायत दी गई।

जिला मुंगेली के सम्पूर्ण थाना/चौकी क्षेत्रों में कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाये रखने हेतु सभी थाना/चौकी प्रभारियों को निर्देशित किया गया कि क्षेत्र में लगातार गश्त, पेट्रोलिंग होता रहे तथा आदतन निगरानी, गुण्डा बदमाशों के ऊपर कड़ी नजर रखने, रात्रि में अनावश्यक रूप से घुमने वाले लोगों को पूछताछ एवं चेक करने, असामाजिक तत्वों पर सख्त कार्यवाही करने निर्देश दिये।

*धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान: ग्राम पूछेली, गाड़ापाली, छीतापाली में हुआ शिविर का आयोजन*

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*धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान: ग्राम पूछेली, गाड़ापाली, छीतापाली में हुआ शिविर का आयोजन*

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा / कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन में जिले में धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम पूछेली के दुर्गा चौक आंगनबाड़ी के पास में, नवागढ़ विकासखंड के ग्राम गाड़ापाली के माता चौरा चौक में एवं बलौदा विकासखंड के ग्राम छीतापाली के रंगमंच गांधी चौक के पास में शिविर का आयोजन किया गया।
शिविर का मुख्य उद्देश्य जनजाति समुदाय व ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान करना और शासन की योजनाओं का लाभ उन्हें सीधे उपलब्ध कराना है। अभियान के तहत बम्हनीडीह विकासखंड के ग्राम पूछेली, खपरीडीह के लिए दुर्गा चौक आंगनबाड़ी के पास पुछेली में, नवागढ़ विकासखंड के ग्राम गाड़ापाली के माता चौरा चौक में एवं बलौदा विकासखंड के ग्राम छीतापाली के रंगमंच गांधी चौक के पास में आयोजित इन शिविरों में विभिन्न विभागों के अधिकारियों की उपस्थिति में ग्रामीणों की मांग एवं समस्याएं सुनी गईं। इस दौरान विभागीय योजनाओं से पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित भी किया गया। शिविर में प्राप्त आवेदनों को सभी संबंधित विभागों द्वारा निराकरण किया गया। इस अवसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत ग्रामीणों को पौधे वितरण किया गया।
इस दौरान शिविर में पहुंचे ग्रामीणों को संबंधित विभाग द्वारा योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। ग्रामीणों ने इस अभियान के प्रति उत्साह दिखाया और प्रशासनिक प्रयासों की सराहना की। इस दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को उनके आवास की चाबी सौंपी गई। शिविर में आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत कार्ड (पीएम-जेएवाई), जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), पीएम-किसान, जनधन खाता, बीमा कवरेज (पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई), सामाजिक सुरक्षा (वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन), रोजगार और आजीविका योजनाए (एमजीएनआरईजीए, पीएम विश्वकर्मा योजना, मुद्रा ऋण) महिला एवं बाल कल्याण (पीएमएमव्हीवाय, आईसीडीएस के योजनाओं का लाभ, टीकाकरण) जैसी विभिन्न योजनाओं के लाभ प्रदान करने हेतु स्टॉल लगाया गया। इस दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग, जनपद पंचायत सीईओ जनप्रतिनिधि, संबंधित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण जन उपस्थित थे।

*19 जून को ग्राम नवागांव, कटघरी में होगा शिविर का आयोजन*

गुरूवार 19 जून को बलौदा विकासखंड के सतीगुढ़ी, नवागांव के लिए नवधा चौक नवागांव में और अकलतरा विकासखंड के ग्राम कटघरी, बाना के लिए ग्राम पंचायत भवन कटघरी में शिविर का आयोजन किया जायेगा।

*बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ: रक्तदान, एचबी, एनीमिया, स्वास्थ्य जांच, परामर्श शिविर एवं जागरूकता कार्यक्रम का किया गया आयोजन*

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मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा/ कलेक्टर श्री जन्मेजय महोबे के निर्देशन बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना अंतर्गत विश्व रक्तदान दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य, पंचायत, आयुष विभाग एवं स्व सहायता समूहों के साथ समन्वय स्थापित कर जिले के सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में रक्तदान, एचबी, एनीमिया, स्वास्थ्य जांच, परामर्श शिविर एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनिता अग्रवाल ने बताया कि कार्यक्रम में 365 गर्भवती माताओं एवं 630 किशोरी बालिकाओं का एनीमिया, एच.बी, बीएमआई, शुगर, बीपी जांच किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना अंतर्गत 34 बच्चों का कुपोषण जांच किया गया तथा कुपोषण प्रबंधन के प्रति जागरूक किया गया। कार्यक्रम में रक्तदान के महत्व, आयरन, प्रोटीनयुक्त खाद्य फल एवं सब्जियों के बारे में जानकारी दी गई। इसके साथ ही कार्यक्रम में स्तनपान, पूरक पोषण आहार, एनीमिया, हीमोग्लोबिन की कमी के कारण, लक्षण, प्रभाव एवं इसके उपचार के उपाय आदि पर चर्चा करते हुए जानकारी दी गई। इस दौरान बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के क्रियान्वयन में विभागीय योजनाओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में पोषण आहार पर क्वीज प्रतियोगिता की भी आयोजन किया गया।

*धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष योजना बनी उम्मीद की किरण, मनरेगा जॉब कार्ड पाकर खिले ग्रामीणों के चेहरे*

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मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा/ धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों में आयोजित शिविरों के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जॉब कार्डों का वितरण किया गया। इस अवसर पर जनपद पंचायत बम्हनीडीह की ग्राम पंचायत पूछेली की श्रीमती जानकी बाई और जनपद पंचायत बलौदा की ग्राम पंचायत छीतापाली के श्री पवन कुमार खैरवार को अतिथियों के हाथों जॉब कार्ड प्रदान किए गए।
जॉब कार्ड प्राप्त करते ही श्री पवन कुमार और श्रीमती जानकी बाई के चेहरे खुशी से खिल उठे। श्री पवन कुमार ने बताया कि इस योजना से उन्हें बड़ी राहत मिली है और अब उन्हें स्थायी रोजगार के अवसर मिल सकेंगे, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। श्रीमती जानकी बाई ने भी योजना के लिए शासन और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा पहली बार ऐसा महसूस हो रहा है कि शासन की योजनाएं वास्तव में हम तक पहुँच रही हैं। उन्होंने कहा कि धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के माध्यम से नरेगा जैसी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँच रहा है, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो रहे हैं। इस योजना के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रकट किया। धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत सरकार द्वारा विशेष रूप से जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। इस अभियान के माध्यम से मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ सीधे पात्र परिवारों तक पहुँचाया जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक, सामाजिक और आत्मिक बल मिल रहा है। कार्यक्रम में संबंधित ग्राम पंचायत सचिव, रोजगार सहायक सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

*जीवन में आई नई उमंग, जब मिला प्रधानमंत्री आवास*

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*“चाबी तो दे दी आपने, लेकिन ताला नहीं दिया” – सहोद्रा बाई की बात सुनकर वातावरण मुस्कान और भावनाओं से भर गया*

*आवास की दीवारों पर जनजाति कलाकृतियां वाद्य यंत्र, नृत्य एवं अन्य आर्ट से सजाया सपनों का घर*

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा,/ प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत जब श्रीमती सहोद्रा बाई धनवार को अपने घर की चाबी मिली, तो यह महज चाबी नहीं थी यह उनके आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य की शुरुआत थी। जनपद पंचायत बम्हनीडीह अंतर्गत ग्राम पंचायत पुछेली खपरीडीह में धरती आबा जनजातीय उत्कर्ष अभियान के दौरान जब श्रीमती सहोद्रा बाई धनवार को मंच से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत निर्मित पक्के घर की चाबी सौंपी गई, तो उनके चेहरे की मुस्कान देखते ही बनती थी। उन्होंने मुस्कराते हुए सहजता से कहा, “चाबी तो दे दी आपने, लेकिन ताला नहीं दिया। ”उनकी यह मासूम बात सुनकर पूरा वातावरण मुस्कान और भावनाओं से भर गया। यह क्षण न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे गाँव के लिए गर्व और खुशी का था।
श्रीमती सहोद्रा बाई ग्राम पंचायत खपरीडीह के जीवन में भी प्रधानमंत्री आवास योजना ने खुशियाँ भर दी हैं। पाँच वर्ष पहले उनके पति का निधन हो गया था। उनकी तीन बेटियां और चार बच्चे है। जिनकी शादी हो चुकी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान के साथ-साथ उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन, पेंशन योजना और मनरेगा से 90 दिन की मजदूरी जैसे योजनाओं का लाभ पाकर उनका जीवन सशक्त और आत्मनिर्भर बन गया है।

*जनजातीय कलाकृति से सजा ‘सपनों का घर’*

प्रधानमंत्री आवास योजना से बने उनके नए घर में उन्होंने छत्तीसगढ़ की जनजातीय कला, वाद्य यंत्र, पारंपरिक नृत्य, और अन्य पारंपरिक लोककला से जुड़ी चित्रकारी को घर की दीवारों पर उकेरकर एक जीवंत संस्कृति का प्रतीक बना दिया है। उनका यह प्रयास न केवल कलात्मक है, बल्कि अब वह अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके घर की सजावट पूरे जनपद पंचायत में चर्चा का विषय है और जनजातीय पहचान की झलक को दिखा रहा है। श्रीमती सहोद्रा बाई ने अपने घर के सामने एक पेड़ मां के नाम आम के पौधा लगाया है। वहीं उन्होंने जल सरंक्षण को बढ़ावा देने के लिए अपने घर में सोखता गड्ढा का भी निर्माण किया है। आवास योजना को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 21 जून को करेंगे प्रदेशव्यापी चरण पादुका योजना का शुभारंभ*

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*जशपुर जिले के तपकरा से होगी शुरूआत*

*तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को वितरित होगी चरण पादुका*

*छत्तीसगढ़ सरकार का एक और वादा होगा पूरा*

*संग्राहक परिवारों को किया जा रहा है 745 करोड़ रूपये का पारश्रमिक भुगतान*

योगेश पाठक ब्यूरो रायपुर,/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय 21 जून को जशपुर जिले के तपकरा में आयोजित वृहद एवं भव्य कार्यक्रम में चरण पादुका वितरण योजना प्रदेशव्यापी शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री इस मौके पर तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिलाओं को चरण पादुका प्रदान करेंगे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ सरकार का राज्य के तंेदूपत्ता संग्राहकों से किया गया एक और वादा पूरा होगा।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने संकल्प पत्र में चरण पादुका योजना को फिर से शुरू किये जाने का वादा किया था, जिसे पूर्ववर्ती सरकार ने बंद कर दिया था। छत्तीसगढ़ की संवेदनशील सरकार द्वारा पुनः शुरू की जा रही यह योजना राज्य के तंेदूपत्ता संग्राहक परिवारों की गरिमा और सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के क्रियान्वयन के लिए सरकार ने 40 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। यह योजना सीधे-सीधे राज्य के 12 लाख 40 हजार तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों की महिलाओं को लाभ पहुंचाएगी, जिन्हें चरण पादुका का निःशुल्क वितरण किया जाएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार की प्राथमिकता हमेशा अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक न्याय और सुविधा पहुंचाना है। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों का राज्य की अर्थव्यवस्था और वनोपज आधारित आजीविका में अमूल्य योगदान है। चरण पादुका योजना हमारे संकल्प पत्र का वादा था, जिसे हम पूरा करने जा रहे है। यह सिर्फ चरण पादुका का वितरण नहीं, बल्कि संग्राहक परिवार के स्वाभिमान और सुरक्षा का प्रतीक है।

चरण पादुका वितरण योजना की शुरूआत इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ सरकार तंेदूपत्ता संग्राहक परिवारों की आवश्यकता, सम्मान और गरिमा का ध्यान रख रही है। इस योजना का उद्देश्य न सिर्फ तेंदूपत्ता संग्राहक परिवार की महिलाओं को सम्मान देना है, बल्कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम करने वाली संग्राहक महिलाओं की सुविधा सुनिश्चित करना भी है।

*745 करोड़ रुपये की तेंदूपत्ता खरीदी*

छत्तीसगढ़ राज्य में इस साल तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य बीते अप्रैल के तृतीय सप्ताह से शुरू हुआ था, जो अब सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। राज्य की 902 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों के माध्यम से 10,631 फड़ों में संग्रहण का कार्य किया गया। हालांकि इस वर्ष असमय वर्षा, तूफान और ओलावृष्टि के कारण फसल प्रभावित हुई, परंतु इसके बावजूद 11.40 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों ने अपनी लगन और मेहनत से 13.54 लाख मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण और फड़ों में विक्रय किया, जिसका कुल क्रय मूल्य 745 करोड़ रूपये है। इस राशि का भुगतान संग्राहकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से उनके बैंक खातों में किया जा रहा है। अब तक 300 करोड़ रूपये से अधिक की राशि सीधे संग्राहकों के खाते में अंतरित की जा चुकी है, शेष राशि के भुगतान की प्रक्रिया जारी है।

*छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ की छात्रवृत्ति योजना से 38 हजार से अधिक मेधावी छात्र-छात्राएं लाभान्वित*

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*वन मंत्री ने कहा तेन्दूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को शिक्षा में मदद देने की महत्वपूर्ण पहल*

योगेश पाठक ब्यूरो रायपुर, / छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित छात्रवृत्ति योजना ने वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा की अलख जगाने की दिशा में महत्वपूर्ण रोल अदा कर रही है। वर्ष 2013-14 में प्रारंभ की गई छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से तेन्दूपत्ता संग्राहक परिवारों के 10वीं और 12वीं कक्षा के मेधावी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

इस योजना की परिकल्पना के समय यह अनुमान था कि लगभग 100-100 मेधावी छात्र-छात्राएं इससे लाभान्वित होंगे, लेकिन बीते वर्षों में योजना की व्यापकता और प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2019-2020 से अब तक कुल 38,114 छात्र-छात्राओं को इस योजना के माध्यम से 41.79 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि ऑनलाइन माध्यम से वितरित की गई है।

छात्रवृत्ति योजना में कुल चार प्रमुख घटक शामिल हैं जिसके तहत मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति, प्रतिभाशाली बच्चों हेतु शिक्षा प्रोत्साहन छात्रवृत्ति, व्यावसायिक कोर्स हेतु छात्रवृत्ति तथा गैर-व्यावसायिक स्नातक कोर्स हेतु छात्रवृत्ति शामिल है। इन सभी श्रेणियों के अंतर्गत 2,500 से 25,000 रुपये तक की छात्रवृत्ति राशि प्रदान की जाती है, जिससे छात्रों को अपनी पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने में आर्थिक संबल मिलता है।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा संचालित यह योजना न केवल आर्थिक रूप से पिछड़े वनवासी क्षेत्रों के छात्रों को शिक्षा से जोड़ने में मदद कर रही है, बल्कि उनके भविष्य को भी सशक्त बना रही है। यह पहल राज्य सरकार के शिक्षित और सशक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास आने वाले वर्षों में और भी व्यापक स्तर पर जारी रहेगा, ताकि हर पात्र और प्रतिभावान छात्र तक इसका लाभ पहुंच सके।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने पंडित माधवराव सप्रे की जयंती पर उन्हें किया नमन*

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*छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और साहित्यिक चेतना को विकसित करने में सप्रे जी का अमूल्य योगदान: मुख्यमंत्री*

योगेश पाठक ब्यूरो रायपुर/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता के जनक और साहित्यकार पंडित माधवराव सप्रे की 19 जून को जयंती पर उन्हें नमन किया है। सप्रे जी का स्मरण करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सप्रे जी द्वारा रखी गई नींव पर ही आज छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता समृद्ध हो रही है। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय और साहित्यिक चेतना को विकसित करने में भी सप्रे जी का अमूल्य योगदान रहा है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनकी लेखनी ने राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा दी। सप्रे जी के रचनात्मक और मूल्यपरक लेखन ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता को एक नई दिशा दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सप्रे जी का व्यक्तित्व और कृतित्व साहित्यकारों और पत्रकारों सहित आम जनता के लिए भी प्रेरणादायक है।

*छत्तीसगढ़ का मत्स्य बीज हब बना कांकेर*

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*मत्स्य बीज उत्पादन और निर्यात के मामले में कांकेर राज्य का अग्रणी जिला*

*हैचरी क्रांति ने राज्य को बनाया आत्मनिर्भर, देशभर में मांग*

योगेश पाठक ब्यूरो रायपुर, /छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले ने मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। कांकेर न केवल मत्स्य बीज उत्पादन में, बल्कि देश के कई राज्यों में मत्स्य बीज की आपूर्ति के मामले में राज्य के अग्रणी जिले के रूप में अपनी पहचान कायम की है। मत्स्य बीज उत्पादन और निर्यात सेे जिले की अर्थव्यवस्था को नया आयाम मिला है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि कांकेर जिले की यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के आत्मनिर्भर और समृद्ध ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में एक मजबूत कदम है। पखांजूर क्षेत्र के मत्स्य कृषकों ने नीली क्रांति को वास्तव में धरातल पर उतारा है। यह सफलता हमारी योजनाओं की प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय सहभागिता और मेहनतकश मछुआरों की लगन का परिणाम है। राज्य सरकार मत्स्य पालन को और अधिक प्रोत्साहन देने हेतु हरसंभव सहयोग देती रहेगी।

गौरतलब है कि कुछ वर्ष पूर्व तक कांकेर जिले को मत्स्य बीज के लिए पश्चिम बंगाल और आंध्रप्रदेश पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन आज कोयलीबेडा विकासखंड के पखांजूर क्षेत्र में बडी संख्या में मत्स्यबीज के पिकअप वाहन, मत्स्य कृषक और क्रियाशील हैचरियां जगह-जगह दिखाई देती हैं। यह बदलाव नीली-क्रांति योजना और प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की मदद से संभव हुआ, जिसके तहत मत्स्य बीज हैचरियों और तालाबों का निर्माण कराया गया। इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से पखांजूर में मत्स्य बीज का सरप्लस उत्पादन होने लगा है।

अब स्थिति यह है कि कांकेर में उत्पादित उच्च गुणवत्ता और किफायती मूल्य पर उपलब्ध मत्स्य बीज का न केवल छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों को, बल्कि अन्य राज्यों जैसे आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, झारखंड, गुजरात और बिहार में भी निर्यात किया जा रहा है। पखांजूर का बीज इसलिए भी खास है क्योंकि यह उच्च गुणवत्ता युक्त, अन्य राज्यों से सस्ता, और अप्रैल-मई जैसे प्रारंभिक महीनों में ही उपलब्ध हो जाता है, जिससे किसानों को समय रहते मत्स्य पालन में मदद मिलती है।

मत्स्य पालन विभाग के सहायक संचालक के अनुसार, कांकेर जिले में कुल 34 मत्स्य बीज उत्पादन हैचरी संचालित हैं। वर्ष 2025-26 में 337 करोड़ स्पॉन और 128 करोड़ 35 लाख स्टैंडर्ड फ्राय उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। अभी तक जिले में 192 करोड़ स्पॉन और 7 करोड़ 42 लाख स्टैंडर्ड फ्राय का उत्पादन हो चुका है। यहां की हैचरियों में मेजर कार्प के साथ-साथ पंगेसियस मछली का भी बीज तैयार किया जा रहा है। मत्स्य कृषक श्री विश्वजीत अधिकारी और मृणाल बराई बताते हैं कि क्षेत्र से प्रतिदिन 10-15 पिकअप वाहन मत्स्य बीज लेकर अन्य जिलों एवं प्रदेशों में जाते हैं।

पखांजूर क्षेत्र की मत्स्य बीज उत्पादन की इस सफलता ने करीब 550 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्रदान किया है। मत्स्य बीज उत्पादन, परिवहन, विक्रय और संबंधित गतिविधियों से जुड़े ग्रामीण अब स्थायी आय प्राप्त कर रहे हैं। कांकेर जिला आज छत्तीसगढ़ की मत्स्य संपन्नता का प्रतीक बन गया है। यहां की हैचरी क्रांति ने राज्य को बाहरी निर्भरता से मुक्त किया और गुणवत्तायुक्त मत्स्य बीज के लिए देशभर की पहली पसंद बन गया है।