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*कोटा में 20 राशन दुकान आवंटन के लिए 13 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित*

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*कोटा में 20 राशन दुकान आवंटन के लिए 13 अक्टूबर तक आवेदन आमंत्रित*

आशीष कश्यप बिलासपुर,/कोटा विकासखण्ड के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 20 राशन दुकान आवंटन के लिए 13 अक्टूबर 2025 तक आवेदन पत्र आमंत्रित किये गये हैं। इच्छुक समिति अथवा समूह उक्त तिथि तक अनुविभागीय राजस्व अधिकारी कार्यालय कोटा में निर्धारित प्रारूप में आवेदन दे सकते हैं। अनुविभागीय राजस्व अधिकारी कार्यालय कोटा के खाद्य शाखा से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन क्षेत्रों के लिए राशन दुकान आबंटित किये जाने हैं, उनमें कोटा शहर में वार्ड नम्बर 10-11 मिलाकर एक, रतनपुर शहर के वार्ड नम्बर 5,वार्ड नम्बर 9 एवं वार्ड नम्बर 11 में एक-एक, खुरदूर, नवागांव (सो) सोनपुरी, चंगोरी, छेरकाबांधा, देवनपुर, बहेरामुड़ा, खैरझिटी, सक्तिबाहरा, कोनचरा, सीस, खैरा, लमकेना, नेवारीबहरा, आमामुड़ा और भरदैयाडीह शामिल हैं। एसडीओ राजस्व ने बताया कि स्थानीय स्तर पर कार्यरत सहकारी समितियां, महिला स्व सहायता समूह, ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय, वन सुरक्षा समितियां एवं अन्य उपभोक्ता सहकारी समितियां आवेदन के लिए पात्रता रखते हैं। इस संबंध में विस्तृत जानकारी कोटा राजस्व अनुविभाग कार्यालय सहित तहसील एवं जनपद कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है।

*छात्रावास मरम्मत कार्यों की निविदा निरस्त*

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आशीष कश्यप बिलासपुर,/आदिवासी विकास विभाग द्वारा छात्रावास एवं आश्रमों की मरम्मत एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिए जारी निविदा निरस्त कर दी गई है। गत 4 अगस्त को इन कार्यों के लिए निविदा सहायक आयुक्त कार्यालय द्वारा जारी किया गया था। सहायक आयुक्त ने अपरिहार्य कारणों से 9 सितम्बर को आदेश जारी कर इसे आगामी आदेश तक के लिए निरस्त कर दिया है।

*एमएसटीसी पोर्टल से होगा रेत खदानों का आवंटन* *बोलीकर्ताओं का 13 अक्टूबर को बिलासपुर में प्रशिक्षण*

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आशीष कश्यप बिलासपुर,/रेत खदान के इच्छुक बोली कर्ताओं को पोर्टल के बारे में जानकारी देने के लिए 13 अक्टूबर को बिलासपुर में संभाग स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। कलेक्टोरेट कार्यालय बिलासपुर के नजदीक स्थित जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभाभवन में दोपहर 2 बजे से ये प्रशिक्षण शुरू होगा। उप संचालक खनिज प्रशासन बिलासपुर किशोर गोलघाटे ने बताया कि इस बार गौण खनिज साधारण रेत का आवंटन एमएसटीसी पोर्टल के माध्यम से किया जायेगा। आवंटन की कार्यवाही ई-नीलामी (रिवर्स ऑक्शन) प्रक्रिया के अनुसार होगी। प्रशिक्षण में इच्छुक बोलीकर्ताओं को ई-नीलामी से जुड़ी तमाम प्रक्रिया जैसे कि निविदा जारी करना, निविदा में भाग लेने के लिए बोलीकर्ताओं का पंजीयन, बोली लगाने की प्रक्रिया, तकनीकी अर्हताधारी बोलीकर्ताओं का चयन, लॉटरी प्रक्रिया, अधिमानी बोलीदार का चयन आदि पोर्टल के माध्यम से होने वाली समस्त जानकारी बताई जायेगी। रेत खदान के इच्छुक बोलीकर्ता इस प्रशिक्षण में हिस्सा ले सकते हैं। संभाग स्तरीय इस प्रशिक्षण बिलासपुर सहित संभाग के अन्य जिलों जैसे कि मुंगेली, जीपीएम, कोरबा, जांजगीर-चाम्पा, सक्ती, रायगढ़ एवं सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिलों के इच्छुक बोलीदारों के लिए आयोजित की गई है। उप संचालक ने इच्छुक बोलीदारों को इस प्रशिक्षण में हिस्सा लेकर जानकारी प्राप्त करने का आग्रह किया है।

 

*जिला पंचायत की बैठक 15 अक्टूबर को*

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आशीष कश्यप बिलासपुर/जिला पंचायत की बैठक 15 अक्टूबर को आहूत की गई है। इसके अंतर्गत सामान्य सभा की बैठक दोपहर 12 बजे एवं सामान्य प्रशासन समिति की बैठक शाम 4 बजे होगी। बैठक की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी करेंगे। सामान्य सभा की बैठक में लोक निर्माण विभाग, खनिज विभाग, जल संसाधन विभाग, सहकारिता विभाग, समाज कल्याण, कृषि एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत चल रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जायेगी। सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में पूर्व बैठक का पालन प्रतिवेदन, जिला पंचायत के आय-व्यय की जानकारी एवं अध्यक्ष श्री सूर्यवंशी की अनुमति से अन्य विषयों पर चर्चा की जाएगी।

*अटल डिजिटल सुविधा केंद्र : ग्रामीणों को मिल रही नगद निकासी की सुविधा*

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*पेंशन एवं योजनाओं की राशि निकालना अब आसान*


आशीष कश्यप बिलासपुर,/अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से जिले के ग्रामीणों को नगद निकासी की सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं, जिससे बैंकों पर निर्भरता और भीड़ में कमी आ रही है। साथ ही हितग्राहीमूलक योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली राशि का पारदर्शी, सुविधाजनक और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। अब हितग्राही अपने ग्राम पंचायत स्तर पर ही अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से पेंशन राशि एवं अन्य योजनाओं की राशि निकाल सकते हैं।
समाज कल्याण विभाग की सामाजिक सहायता कार्यक्रम अंतर्गत संचालित पेंशन योजनाओं में पेंशन राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से हितग्राहियों के बैंक खातों में किया जाता है, परंतु बैंक से राशि निकालना हितग्राहियों के लिए एक बड़ी चुनौती रहा है। विशेषकर वृद्धजन, दिव्यांगजन, विधवा एवं परित्यक्त महिलाएं बैंक तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करती रही हैं। “अटल डिजिटल सुविधा केंद्र” इन समस्याओं का समाधान बनकर उभरा है।
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना “अटल डिजिटल सुविधा केंद्र” का शुभारंभ माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस, 24 अप्रैल 2025 को किया गया। जिले के 152 ग्राम पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र खोले गए है। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने अपील की है कि समाज कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं के हितग्राही अपने निकटतम अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों से राशि की निकासी करें, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ सुगमता और पारदर्शिता से मिल सके।

*बाल विवाह रोकथाम के लिए जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन*

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*बाल विवाह की सूचना मिलने पर 1098 पर करें कॉल*


आशीष कश्यप बिलासपुर,/बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के अंतर्गत उन्मुखीकरण कार्यशाला सह प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन जल संसाधन विभाग के प्रार्थना सभा भवन में किया गया। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री सुरेश सिंह एवं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी श्री सूर्यकांत गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़की एवं 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह बाल विवाह की श्रेणी में आता है। बाल विवाह करने कराने या उसमें सहयोग देने वाले को दो वर्ष की सजा अथवा एक लाख रुपये जुर्माना अथवा दोनों से दंडित किया जा सकता है। राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार महिला एवं बाल विकास विभाग के सभी बाल विकास परियोजना अधिकारियों, पर्यवेक्षको एवं ग्राम पंचायत सचिवों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी के रूप में नामित किया गया है। कार्यशाला में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी, समाज प्रमुख गैर-शासकीय संगठनों के प्रतिनिधि, मंदिरों के पुजारी, विवाह आयोजक, विवाह भवन सचालक, प्रिटिंग प्रेस, टेंट, बैंड, एवं केटरिंग सेवा प्रदाताओं की सहभागिता रही।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, महिला हेल्पलाइन 181, या आपातकालीन नंबर 112 पर सूचना दी जा सकती है। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ अभियान अंतर्गत ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है ऐसे ग्राम पंचायत जिसमें विगत 2 वर्षों से कोई भी बाल विवाह नहीं हुआ है उन्हें ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित करते हुये बाल विवाह मुक्त पंचायत घोषित किया जाकर चाईल्ड फ्रेंडली पंचायत की परिकल्पना को साकार करना है। बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने हेतु छत्तीसगढ़ शासन द्वारा बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान 10 मार्च 2024 से पूरे राज्य में संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जिला, विकासखण्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर जनजागरूकता एवं क्षमता निर्माण के प्रयास लगातार किए जा रहे है।
कार्यशाला के समापन अवसर पर जिला बाल संरक्षण अधिकारी सत्यनारायण राठौर ने उपस्थित अतिथियों, प्रतिभागियों, समाजसेवियों एवं आयोजनकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा की बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है जिसे सामूहिक प्रयास और जनजागरूकता के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है। समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से ही बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकेगा।
इस अवसर पर बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष श्रीमती रीता बरसैया, बाल कल्याण समिति के सदस्य श्री कांतिलाल साहू, किशोर न्याय बोर्ड की सदस्य श्रीमती डा. उषा किरण बाजपेयी एवं रिसोर्स पर्सन श्री मनीष कश्यप एड्वोकेट ने प्रशिक्षण दिया। उन्मुखीकरण सह कार्यशाला को सुगम बनाने में बाल विकास परियोजना अधिकारी श्री उमाशंकर अनंत, श्री अमित भारत, श्री मिलिंद द्विवेदी, श्रीमती ज्योति तिवारी, श्रीमती सुरूचि श्याम, श्रीमती विद्या पाडे, श्रीमती मीना उपाध्याय, श्रीमती स्मिता शुक्ला श्रीमती किरन खेडकर, श्री राहुल पवार संरक्षण अधिकारी, श्री अजय पटेल विधिक सह परिवीक्षा अधिकारी, श्री गोवर्धन प्रसाद धीवर संरक्षण अधिकारी, श्री चंद्रशेखर तिवारी परामर्शदाता श्री हुलेश्वर प्रसाद सामाजिक कार्यकर्ता, सुश्री अल्का लकड़ा सामाजिक कार्यकर्ता, सुश्री रोशनी पांडेय जिला समन्वयक, सुश्री जया चंद्राकर जेंडर विशेषज्ञ, श्री सुरेश साहू परियोजना समन्वयक एवं चाईल्ड लाईन, विभागीय अधिकारी, कर्मचारियों का सहयोग रहा।

*औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था कोनी में कौशल दीक्षांत समारोह सम्पन्न*

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आशीष कश्यप बिलासपुर, /औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था कोनी में कौशल दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया । दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक श्री ए. के. सोनी शामिल हुए। समारोह में संस्था के कुल 28 व्यवसायों के प्रावीण्य उत्तीर्ण प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त 77 प्रशिक्षणार्थी तथा परीक्षा सत्र अगस्त 2025 में उत्तीर्ण अंतिम वर्ष के 882 प्रशिक्षणार्थी सम्मिलित हुए। जिनमें से व्यवसाय शीट मेटल के प्रशिक्षणार्थी अभय कुमार का सर्वोत्तम अंक 99.1 प्रतिशत रहा। इस समारोह में सभी व्यवसाय के प्रावीण्य प्रशिक्षाणार्थियों को प्रमाण पत्र, एनटीसी एवं पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह के समापन में संस्था के प्रशिक्षणार्थियों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई एवं अंत में संस्था प्राचार्य श्री श्री नवीन कुमार साहू के द्वारा समारोह के समापन की घोषणा की गई।

*आत्मसमर्पित माओवादियों ने थामी तरक्की की डोर*

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*आत्मसमर्पित माओवादियों ने थामी तरक्की की डोर*

*बीजापुर के 32 पूर्व माओवादियों ने सीखा कुक्कुटपालन और बकरीपालन का गुर*

*समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शासन की अभिनव पुनर्वास नीति से मिल रहा लाभ*

रायपुर, / माओवाद का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे बीजापुर जिले के 32 आत्मसमर्पित माओवादियों ने अब विकास और स्वरोजगार की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। इन सभी ने जगदलपुर स्थित क्षेत्रीय स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में एक महीने का कुक्कुटपालन और बकरीपालन का विशेष प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से पूर्व नक्सलियों ने न केवल पशुपालन के वैज्ञानिक तरीके सीखे, बल्कि एक सफल उद्यमी बनने की बारीकियों को भी जाना। एक माह की गहन ट्रेनिंग में आत्मसमर्पित माओवादियों को कुक्कुटपालन और बकरीपालन से संबंधित हर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। यहां उन्होंने उन्नत नस्लों का चयन, चारा प्रबंधन और संतुलित आहार की जानकारी, टीकाकरण, रोगों की पहचान और उपचार के तरीके के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, ऋण प्राप्त करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की रणनीति के संबंध में प्रशिक्षण लिया।
प्रशिक्षण लेने वाले एक आत्मसमर्पित माओवादी ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जंगल में जीवन बहुत मुश्किल और खाली था। प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए जो पुनर्वास नीति बनाई गई है, वह एक अभिनव प्रयास है। जिससे अब हम अपने हाथों से काम करके परिवार के लिए एक स्थिर और सम्मानजनक जीवन-यापन कर सकते हैं। सरकार के इस कदम से हमें बहुत हिम्मत मिली है।

*प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत देशभर में 25 लाख नए एलपीजी कनेक्शन स्वीकृत*

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*प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत देशभर में 25 लाख नए एलपीजी कनेक्शन स्वीकृत*

*प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से उज्ज्वल होगा प्रदेश की बहनों का भविष्य – मुख्यमंत्री श्री साय*

*छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्ला नार योजना” के अंतर्गत 1.59 लाख माताओं-बहनों को मिलेगा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ*

रायपुर /भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत देशभर में 25 लाख नए एलपीजी कनेक्शन स्वीकृत किए गए हैं। इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ में “सुशासन तिहार” और “नियद नेल्ला नार योजना” के अंतर्गत 1.59 लाख पात्र माताओं-बहनों को उज्ज्वला योजना का लाभ प्राप्त होगा।यह निर्णय छत्तीसगढ़ की लाखों माताओं-बहनों के जीवन में स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य का उजाला लेकर आएगा।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी जी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में जो उजाला फैलाया है, वह आने वाले वर्षों में पूरे समाज के विकास का आधार बनेगा।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति हमेशा से परिवार और समाज की धुरी रही है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से उन्हें वह सम्मान मिला है जिसकी वे हकदार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री के नेतृत्व में प्रत्येक पात्र बहन तक इस योजना का लाभ पहुँचाने के लिए कटिबद्ध है। भारत सरकार के इस निर्णय से छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में जीवन की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों की महिलाएं अब प्रदूषण रहित वातावरण में जीवन जी सकेंगी।

उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लगभग 38 लाख महिलाएं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ प्राप्त कर रही हैं।

*नारायणपुर-अबूझमाड़ को महाराष्ट्र से जोड़ेगा नेशनल हाईवे 130-डी*

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*नारायणपुर-अबूझमाड़ को महाराष्ट्र से जोड़ेगा नेशनल हाईवे 130-डी*

*कुतुल से नीलांगुर महाराष्ट्र बॉर्डर तक एनएच-130-डी का होगा निर्माण*

*नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत – मुख्यमंत्री श्री साय*

रायपुर, / बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को नई गति मिली है। छत्तीसगढ़ शासन ने कुतुल से नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक 21.5 किलोमीटर हिस्से के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस सड़क के निर्माण के लिए न्यूनतम टेंडर देने वाले ठेकेदार से अनुबंध की प्रक्रिया शर्तों सहित पूरी करने के निर्देश लोक निर्माण विभाग मंत्रालय द्वारा प्रमुख अभियंता, राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र रायपुर को दिए गए हैं। कुल तीन खंडों में निर्मित होने वाले 21.5 किलोमीटर सड़क के निर्माण हेतु लगभग 152 करोड़ रुपए न्यूनतम टेंडर दर प्राप्त हुई है, जिसे छत्तीसगढ़ शासन ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

यह उल्लेखनीय है कि कुतुल, नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित है और कुतुल से महाराष्ट्र सीमा पर स्थित नीलांगुर की दूरी 21.5 किलोमीटर है। यह नेशनल हाईवे 130-डी का हिस्सा है। इस सड़क का निर्माण टू-लेन पेव्ड शोल्डर सहित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि एनएच-130डी राष्ट्रीय राजमार्ग है, जिसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। यह एनएच-30 का शाखा मार्ग (स्पर रूट) है। यह कोण्डागांव से शुरू होकर नारायणपुर, कुतुल होते हुए नीलांगुर (महाराष्ट्र सीमा) तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा, लकासा होते हुए आलापल्ली तक पहुँचता है, जहाँ यह एनएच-353डी से जुड़ जाता है। इस मार्ग के विकसित होने से बस्तर क्षेत्र सीधे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जुड़ जाएगा और व्यापार, पर्यटन एवं सुरक्षा को बड़ी मजबूती प्राप्त होगी।

नेशनल हाईवे 130-डी का कोण्डागांव से नारायणपुर तक का लगभग 50 किमी हिस्सा निर्माणाधीन है। नारायणपुर से कुतुल की दूरी 50 किमी है और वहाँ से महाराष्ट्र सीमा स्थित नीलांगुर तक 21.5 किमी की दूरी है। इस राष्ट्रीय राजमार्ग की कुल लंबाई 195 किमी है, जिसमें से लगभग 122 किमी का हिस्सा कोण्डागांव-नारायणपुर से कुतुल होते हुए नीलांगुर तक छत्तीसगढ़ राज्य में आता है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा तथा नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुविधा सुलभ हो सकेगी।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के सहयोग से इस नेशनल हाईवे के अबूझमाड़ इलाके में स्थित हिस्से के लिए फॉरेस्ट क्लियरेंस और निर्माण की अनुमति प्राप्त हुई, जिससे इस महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता खुल गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल सड़क नहीं बल्कि बस्तर अंचल की प्रगति का मार्ग है। हमारी सरकार ने इस परियोजना को तेजी देने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। इस सड़क से बस्तर के लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। यह सड़क न केवल छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र को जोड़ेगी, बल्कि बस्तर अंचल के सामाजिक एवं आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगी। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने के लिए यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।

– मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय