Home Blog Page 3

जनजातीय कला, संस्कृति और हुनर को मिलेगा नया बाजार, कारीगरों की आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनेगा ‘आदि बाजार 2026’ : मंत्री श्री रामविचार नेताम

0

जनजातीय कला, संस्कृति और हुनर को मिलेगा नया बाजार, कारीगरों की आर्थिक समृद्धि का सशक्त माध्यम बनेगा ‘आदि बाजार 2026’ : मंत्री श्री रामविचार नेताम

*जनजातीय कार्य मंत्री श्री नेताम ने रायपुर के टाउन हॉल में किया ‘आदि बाजार 2026’ का शुभारंभ*

*जनजातीय कारीगरों के उत्पादों को मिलेगा उचित मूल्य, देशभर की पारंपरिक कला और शिल्प को मिलेगी नई पहचान*

रायपुर,। जनजातीय कार्य मंत्री श्री रामविचार नेताम ने आज राजधानी रायपुर के टाउन हॉल में भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (ट्रायफेड) द्वारा आयोजित ‘आदि बाजार 2026’ का शुभारंभ किया। जनजातीय कला, संस्कृति, पारंपरिक शिल्प और हस्तनिर्मित उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित यह बाजार 2 नवंबर 2026 तक चलेगा। इस आयोजन के माध्यम से विभिन्न राज्यों के जनजातीय शिल्पकारों, कारीगरों और कलाकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं विक्रय के लिए एक साझा मंच उपलब्ध कराया गया है।

*जनजातीय समाज की कला, संस्कृति और पारंपरिक हुनर हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनमोल धरोहर*

मंत्री श्री नेताम ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय समाज की कला, संस्कृति और पारंपरिक हुनर हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनमोल धरोहर हैं। जनजातीय कारीगरों के उत्पादों को उचित बाजार उपलब्ध कराना उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि आदि बाजार जैसे आयोजनों से जनजातीय शिल्पकारों और कारीगरों की मेहनत को उचित मूल्य मिलने के साथ ही उनके उत्पादों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी होता है।

*इस प्रकार के आयोजन से जनजातीय समुदायों के बीच आपसी जुड़ाव मजबूत होता है*

मंत्री श्री नेताम ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय कलाकारों और शिल्पकारों को एक मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर मिलना अत्यंत सराहनीय है। इससे न केवल पारंपरिक कला और शिल्प को नई पहचान मिलती है, बल्कि विभिन्न राज्यों के कारीगरों को एक-दूसरे की कला, तकनीक और हुनर को जानने तथा सीखने का अवसर भी प्राप्त होता है। इस प्रकार के आयोजन सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ ही जनजातीय समुदायों के बीच आपसी जुड़ाव को भी मजबूत करते हैं।

*आदि बाजार 2026 जनजातीय शिल्पकारों के उत्पाद को नई पहचान दिलाने और आजीविका बढ़ाने में महत्वपूर्ण*

श्री नेताम ने कहा कि जनजातीय कारीगरों की प्रतिभा और परिश्रम से निर्मित उत्पादों की अपनी विशिष्ट पहचान है। आवश्यकता है कि इन उत्पादों को व्यापक बाजार और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि कारीगरों को उनकी मेहनत का वाजिब दाम मिल सके। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आदि बाजार 2026 जनजातीय शिल्पकारों के उत्पादों को नई पहचान दिलाने और उनकी आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मंत्री श्री नेताम ने इस आयोजन के लिए ट्रायफेड एवं संबंधित अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से जनजातीय कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन मिलेगा तथा जनजातीय परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

इस अवसर पर अपर प्रधान वन संरक्षक श्रीमती संगीता गुप्ता, ट्रायफेड के क्षेत्रीय प्रबंधक श्री संदीप शर्मा सहित संबंधित विभागों के अधिकारी, विभिन्न विधाओं के शिल्पकार, कारीगर एवं जनजातीय कलाकार उपस्थित थे।

दीपावली पर जुआ-सट्टा और अवैध पटाखों पर कार्रवाई के निर्देश, साइबर थाना की भूमिका पर उठे सवाल

0

दीपावली पर जुआ-सट्टा और अवैध पटाखों पर कार्रवाई के निर्देश, साइबर थाना की भूमिका पर उठे सवाल

 मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा। दीपावली पर्व को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय (IPS) के निर्देशन में जिले में जुआ-सट्टा और अवैध रूप से पटाखे रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।

वहीं, साइबर थाना जांजगीर-चांपा की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चर्चा है कि दीपावली के मद्देनजर जुआ-सट्टा और अवैध पटाखों के मामलों में साइबर थाना की सक्रियता और कार्रवाई का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। साइबर थाना प्रभारी भास्कर शर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

कार्रवाई के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग

जब जिले में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं, तो सवाल उठता है कि साइबर थाना द्वारा अब तक कितने मामलों में कार्रवाई की गई है? कितने आरोपियों को पकड़ा गया और कितनी अवैध सामग्री जब्त की गई? क्या जिले के सभी क्षेत्रों में समान रूप से कार्रवाई की जा रही है?

दीपावली के दौरान जुआ-सट्टा और अवैध पटाखों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस की सक्रियता महत्वपूर्ण है। ऐसे में संबंधित थाना की कार्रवाई का विवरण सामने आने से पुलिस की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता आएगी और आम लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।

*जलकर बकायादारों पर नगर पंचायत जरहागांव की सख्ती, नल कनेक्शन काटने की कार्रवाई शुरू*

0

*सोमवार तक बकाया जलकर जमा करने की चेतावनी, भुगतान नहीं करने पर शेष बकायादारों के भी काटे जाएंगे नल कनेक्शन*

तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली जरहागांव/ नगर पंचायत जरहागांव ने लंबे समय से बकाया जलकर का भुगतान नहीं करने वाले करदाताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। शनिवार को नगर पंचायत की टीम द्वारा जलकर का भुगतान नहीं करने वाले बकायादारों के घरों में पहुंचकर नल कनेक्शन विच्छेदित करने की कार्रवाई की गई। इस दौरान नगर पंचायत जरहागांव के जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही। नगर पंचायत द्वारा लगातार बकाया जलकर जमा करने के लिए संबंधित करदाताओं को प्रेरित एवं सूचित किया जा रहा था। इसके बावजूद कई उपभोक्ताओं द्वारा निर्धारित समय पर बकाया राशि जमा नहीं किए जाने के बाद नगर पंचायत प्रशासन को नल कनेक्शन विच्छेदित करने की कार्रवाई करनी पड़ी। शनिवार को नगर पंचायत की टीम ने चिन्हित बकायादारों के यहां पहुंचकर नियमानुसार नल कनेक्शन काटने की कार्रवाई की। नगर पंचायत प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल कुछ बकायादारों तक सीमित नहीं रहेगी। जिन उपभोक्ताओं का जलकर अभी भी बकाया है, उन्हें मुनादी के माध्यम से अंतिम रूप से सचेत किया जा रहा है। नगर क्षेत्र में मुनादी कराकर बकायादारों से सोमवार तक अनिवार्य रूप से बकाया जलकर जमा करने की अपील की जा रही है।
नगर पंचायत ने शेष बकायादारों को सोमवार तक बकाया राशि जमा करने का अवसर दिया है। निर्धारित समय तक जलकर जमा नहीं करने वाले उपभोक्ताओं के घरों के नल कनेक्शन भी विच्छेदित किए जाएंगे। नगर पंचायत की ओर से लोगों से कहा गया है कि वे असुविधा एवं कार्रवाई से बचने के लिए समय रहते अपने बकाया जलकर का भुगतान कर दें। बताया गया कि नगर पंचायत क्षेत्र में नागरिकों को नियमित पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने तथा जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए जलकर की राशि का समय पर जमा होना आवश्यक है। लंबे समय तक करों का भुगतान नहीं होने से नगरीय निकाय के राजस्व पर भी प्रभाव पड़ता है। ऐसे में नगर पंचायत द्वारा बकाया करों की वसूली को लेकर अभियान चलाते हुए अब सख्ती बरती जा रही है।
विशेष बात यह रही कि जलकर वसूली एवं नल कनेक्शन विच्छेदित करने की इस कार्रवाई में नगर पंचायत जरहागांव के जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही। जनप्रतिनिधियों ने भी नागरिकों से नगर पंचायत के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए निर्धारित करों का समय पर भुगतान करने की अपील की। नगर पंचायत प्रशासन का कहना है कि बकायादारों को भुगतान के लिए पर्याप्त अवसर दिया जा रहा है और मुनादी के माध्यम से भी उन्हें जानकारी दी जा रही है। इसके बाद भी यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर बकाया जलकर जमा नहीं किया जाता है तो संबंधित उपभोक्ताओं के नल कनेक्शन विच्छेदित करने की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। नगर पंचायत ने नागरिकों से अपील की है कि जिनका भी जलकर बकाया है, वे सोमवार तक बकाया राशि जमा कर रसीद प्राप्त कर लें, ताकि उन्हें नल कनेक्शन विच्छेदन जैसी कार्रवाई और पेयजल संबंधी असुविधा का सामना न करना पड़े।

*कवि राकेश गुप्त ‘निर्मल’ साथी संदेश सम्मान–2026 से सम्मानित*

0

तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली। मुंगेली के वरिष्ठ साहित्यकार एवं ‘कविता चौराहे पर, साहित्य मंच मुंगेली के संस्थापक संयोजक कवि राकेश गुप्त ‘निर्मल’ को ‘साथी संदेश’ के आठवें स्थापना दिवस एवं सम्मान समारोह में ‘साथी संदेश सम्मान–2026’ से सम्मानित किया गया। शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को बिलासपुर स्थित उद्योग भवन में आयोजित समारोह में अतिथियों ने उन्हें सम्मान प्रदान किया।

समारोह में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस श्री चन्द्रभूषण बाजपेयी, पूर्व विधायक श्री शैलेश पाण्डेय, छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व सदस्य श्री रविन्द्र सिंह, डॉ. राघवेंद्र कुमार दुबे, डॉ. उदयभान सिंह चौहान ‘भागीरथ’ एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अजय पाठक सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में आयोजित संगोष्ठी में डॉ. शाहिद अली, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, आचार्य ललित मुनि एवं श्री स्वराज्य करुण ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर ‘साथी संदेश’ के प्रधान संपादक श्री मलय बैनर्जी, संचालक डॉ. विवेक तिवारी, प्रबंध संपादक श्रीमती सोमा बैनर्जी, श्री अमित मिश्रा, श्री मो. अशरफ मेमन सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, समाजसेवी, संस्कृतिकर्मी एवं ‘साथी संदेश’ परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

—

*नारी सशक्तिकरण की थीम पर स्टार्स ऑफ टुमॉरो ने किया माँ दुर्गा झांकियों का भव्य स्वागत, महिला निर्णायक मंडल ने चुनीं तीन सर्वश्रेष्ठ दुर्गा झांकियां*

0

तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली। माँ जगतजननी जगदंबा की विसर्जन झांकी के अवसर पर स्टार्स ऑफ टुमॉरो वेलफेयर सोसायटी द्वारा नगर के महाराणा प्रताप चौक में भव्य मंच बनाकर झांकियों का आत्मीय स्वागत किया गया। माँ दुर्गा के प्रति आस्था, श्रद्धा और भक्ति से सराबोर इस आयोजन में देर रात तक हजारों की संख्या में नगरवासी उपस्थित रहे। आकर्षक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया।
इस वर्ष संस्था ने नारी सशक्तिकरण को विशेष महत्व देते हुए माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रेरणा से नौ अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को निर्णायक मंडल में शामिल किया। इस पहल के माध्यम से संस्था ने समाज में महिलाओं की प्रतिभा, निर्णय क्षमता, नेतृत्व और योगदान को सम्मान देने का संदेश दिया।
निर्णायक मंडल में सृष्टि शर्मा, विनिया सिंह, सोनम ठाकुर, पूर्वी सचदेव, समप्रीत कौर, दिव्या परिहार, हेमा खत्री, ऋतु तिवारी एवं अंजली सोनी शामिल रहीं।
निर्णायक मंडल के निर्णय के अनुसार सर्वेश्वरी दुर्गा उत्सव आगर क्लब ने प्रथम, ॐ बाल दुर्गा उत्सव समिति मनुराज टॉकीज ने द्वितीय तथा सर्वसिद्धि दुर्गोत्सव समिति मल्हापारा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। तीनों विजेता समितियों को आगामी मुंगेली व्यापार मेला के भव्य मंच से निर्धारित पुरस्कार राशि एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

*महिला निर्णायकों ने की पहल की सराहना*

निर्णायक मंडल की सदस्य एडवोकेट विनिया सिंह ने कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ महिलाओं को निर्णायक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना एक सराहनीय पहल है। इससे महिलाओं की क्षमता पर विश्वास मजबूत होता है और समाज में उनकी भागीदारी को नई पहचान मिलती है।

महिला उद्यमी हेमा खत्री ने कहा कि नारी सशक्तिकरण केवल नारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने, नेतृत्व करने और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के अवसर भी मिलने चाहिए। स्टार्स ऑफ टुमॉरो की यह पहल उसी दिशा में एक सार्थक कदम है।

शिक्षिका ऋतु तिवारी ने कहा कि माँ दुर्गा के नौ स्वरूप नारी की शक्ति, साहस और आत्मविश्वास के प्रतीक हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को महिलाओं के सम्मान और समान भागीदारी का सकारात्मक संदेश देते हैं।

गृहणी पूर्वी सचदेव ने कहा कि महिलाओं को सामाजिक और सार्वजनिक आयोजनों में सम्मानजनक भूमिका मिलना गौरव की बात है। इस तरह की पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करती है।

संस्था के संयोजक रामपाल सिंह ठाकुर ने कहा कि स्टार्स ऑफ टुमॉरो वेलफेयर सोसायटी का उद्देश्य धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को सामाजिक चेतना से जोड़ना है। माँ दुर्गा की झांकियों का स्वागत करना हमारी आस्था का प्रतीक है, वहीं नारी सशक्तिकरण की थीम अपनाना समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि झांकियों के माध्यम से नगर की धार्मिक परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और समितियों की रचनात्मकता को सम्मान देने का प्रयास किया गया है। आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने के लिए उन्होंने जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

संस्था के सह संयोजक रामशरण यादव ने कहा कि नारी सशक्तिकरण एक बेहतर और समतामूलक समाज के निर्माण की आधारशिला है। महिलाओं को सम्मान, समान अवसर और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देना समय की आवश्यकता है। माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रेरणा से नौ अलग-अलग क्षेत्रों की महिलाओं को निर्णायक बनाना इस विश्वास का प्रतीक है कि महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी योग्यता और नेतृत्व क्षमता का परिचय दे रही हैं।

कार्यक्रम में विशेष रूप से अतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष रोहित शुक्ला, जिला भाजपा अध्यक्ष दीनानाथ केशरवानी, एल्डरमैन अमितेष आर्य, पूजा यादव, वर्षा सिंह, प्रीति सिंह, रेणुका यादव, सरिता कोटडिया, सुनयना पारख एवं मीनल बैद उपस्थित रहीं।

आयोजन को सफल बनाने में संस्था के संयोजक रामपाल सिंह ठाकुर, सह संयोजक रामशरण यादव, अध्यक्ष महावीर सिंह, सचिव विनोद यादव, कोषाध्यक्ष धनराज परिहार, दिनेश गोयल, गोखलेश सिंह, दीपक जैन, रणवीर सिंह, श्रेणिक पारेख, आशीष सोनी, अनुराग सिंह, सूरज मंगलानी, गिरीश सुथार, मुकेश पांडेय, धीरज जैन, सुनील वाधवानी, गौरव जैन, कोमल चौबे, राहुल मल्लाह, पवन यादव, आर्या सिंह, वासु पांडेय, रवि साहू, आशीष सिंह, श्रेयांश बैद, देवेंद्र सिंह, अजय चंद्राकर, चित्रकान्त सिंह, संतोष जांगड़े, श्रीओम सिंह, दिलबाग सिंह, रघुराज सिंह, सुरेश यादव, परमेश्वर देवांगन सहित संस्था के समस्त सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

*शरद पूर्णिमा पर कटनई के पहरिया पाठ में निःशुल्क दवा वितरण कल* 

0

**शरद पूर्णिमा पर कटनई के पहरिया पाठ में निःशुल्क दवा वितरण कल* 

 मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा *अकलतरा।* समीपस्थ ग्राम कटनई स्थित प्रसिद्ध पहरिया पाठ माँ भगवती दुर्गा मंदिर स्थल पर शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी विशेष निःशुल्क औषधी वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

इस वर्ष शरद पूर्णिमा *दिनांक 25 अक्टूबर, दिन रविवार को रात्रि 9 बजे से* दमा, श्वास, एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु आयुर्वेदिक औषधी का निःशुल्क वितरण किया जायेगा।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में तैयार की गई औषधी श्वास व दमा रोगियों के लिए अत्यंत लाभकारी होती है। इस औषधी का सेवन करने से रोगियों को विशेष लाभ मिलता है तथा स्वस्थ व्यक्तियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है।

आयोजक श्री चंद्रिका कुमार कश्यप एवं नरेश राम कश्यप ने क्षेत्र के समस्त दमा-श्वास रोगियों एवं आमजनों से अधिक से अधिक संख्या में पहुँचकर निःशुल्क दवा का लाभ लेने की अपील की है।

अकलतरा का सेंट जेवियर स्कूल सवालों के घेरे में, किराए के मकान के चंद कमरों में चल रहा शिक्षण संस्थान!* 

0

*अकलतरा का सेंट जेवियर स्कूल सवालों के घेरे में, किराए के मकान के चंद कमरों में चल रहा शिक्षण संस्थान!* 

 *बिल्डिंग के पीछे राइस मिल, खुद का खेल मैदान भी नहीं; JSW प्लांट के श्रमिकों के 200 से अधिक बच्चें छोड़ चुके स्कूल* 

 मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा अकलतरा। बच्चों के बेहतर भविष्य और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद लेकर अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला निजी स्कूलों में कराते हैं। लेकिन जब स्कूल की बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और खेलकूद के संसाधनों पर ही सवाल उठने लगें, तो अभिभावकों की चिंता स्वाभाविक है। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा स्थित सेंट जेवियर स्कूल की संचालन व्यवस्था को लेकर ऐसे ही सवाल सामने आ रहे हैं। आरोप है कि स्कूल किराए के मकान के महज कुछ कमरों में संचालित हो रहा है। भवन के पीछे राइस मिल होने और स्वयं का खेल मैदान नहीं होने की बात भी सामने आई है। वहीं, JSW प्लांट से जुड़े परिवारों के 200 से अधिक बच्चों के स्कूल छोड़ने की जानकारी ने इस संस्थान की व्यवस्थाओं और अभिभावकों के भरोसे को लेकर बहस छेड़ दी है।

*चंद कमरों में स्कूल संचालन, सुविधाओं पर सवाल*

स्कूल जैसी संस्था के लिए केवल कक्षाओं का संचालन ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप कक्षाएं, स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त खुली जगह, खेलकूद की सुविधा, सुरक्षा और अन्य आवश्यक संसाधन भी शिक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में यदि किसी स्कूल का संचालन सीमित कमरों वाले किराए के भवन में हो रहा है और वहां खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ सर्वांगीण विकास के लिए कितना अनुकूल वातावरण मिल रहा है।

अकलतरा के सेंट जेवियर स्कूल को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संस्थान के पास कितनी जगह उपलब्ध है, विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में कक्षाओं और अन्य सुविधाओं की क्या स्थिति है तथा स्कूल संबंधित मान्यता एवं सुरक्षा मानकों का किस हद तक पालन कर रहा है।

*भवन के पीछे राइस मिल, सुरक्षा और प्रदूषण को लेकर चिंता*

स्कूल भवन के पीछे राइस मिल होने की जानकारी भी चर्चा का विषय है। स्कूल के आसपास का वातावरण विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और पढ़ाई के अनुकूल होना चाहिए। ऐसे में राइस मिल की निकटता को देखते हुए धूल, शोर, वाहनों की आवाजाही और अन्य संभावित प्रभावों की वास्तविक स्थिति का परीक्षण आवश्यक है।

यह देखना भी जरूरी है कि स्कूल परिसर में धूल और शोर का स्तर क्या है, बच्चों की आवाजाही कितनी सुरक्षित है तथा संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक निरीक्षण किया गया है या नहीं। यदि इन पहलुओं पर कोई शिकायत है, तो शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

*खुद का खेल मैदान नहीं, बच्चों के सर्वांगीण विकास पर सवाल*

बच्चों की शिक्षा केवल किताबों और परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं होती। खेलकूद शारीरिक विकास, अनुशासन, टीम भावना और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में स्कूल के पास अपना खेल मैदान नहीं होने का मुद्दा अभिभावकों की चिंता बढ़ाता है।

यह भी जांच का विषय है कि स्कूल विद्यार्थियों को खेलकूद के लिए वैकल्पिक मैदान या अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराता है या नहीं। यदि खेल गतिविधियों के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, तो इसका असर बच्चों के नियमित शारीरिक और सह-पाठ्यक्रम विकास पर पड़ सकता है।

*JSW प्लांट के 200 से अधिक श्रमिकों के बच्चों ने छोड़ा स्कूल!*

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू JSW प्लांट से जुड़े परिवारों के 200 से अधिक बच्चों के स्कूल छोड़ने की जानकारी है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने की बात सामने आनाऔर T C देने पर पैसा भी वसूली अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, इन बच्चों के स्कूल छोड़ने के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अभिभावकों के पक्ष को सामने लाना आवश्यक है।

क्या अभिभावक स्कूल की बुनियादी सुविधाओं से संतुष्ट नहीं थे? क्या खेल मैदान और परिसर की व्यवस्था को लेकर असंतोष था? या फिर इसके पीछे फीस, पढ़ाई की गुणवत्ता, स्थानांतरण अथवा अन्य कारण रहे?

यदि बच्चों के स्कूल छोड़ने के पीछे सुविधाओं की कमी प्रमुख कारण रही है, तो यह स्कूल प्रबंधन के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। वहीं, यदि इसके पीछे अन्य कारण हैं, तो उन्हें भी तथ्यों के साथ सामने लाया जाना जरूरी है।

*शिक्षा विभाग की भूमिका पर निगाहें*

स्कूल की मान्यता, भवन की उपयुक्तता, विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप उपलब्ध सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था और खेलकूद के संसाधनों जैसे पहलुओं पर संबंधित शिक्षा अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में अकलतरा के सेंट जेवियर स्कूल की मौजूदा व्यवस्था का नियमानुसार निरीक्षण कर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।

अधिकारियों को यह देखना चाहिए कि स्कूल निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहा है या नहीं और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। यदि किसी स्तर पर कमी पाई जाती है, तो नियमानुसार सुधारात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

*अभिभावकों के सवालों का जवाब कौन देगा?*

अकलतरा में संचालित सेंट जेवियर स्कूल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब तथ्यों और पारदर्शिता के आधार पर सामने आना चाहिए। स्कूल प्रबंधन को भवन, खेलकूद की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। वहीं, शिक्षा विभाग को भी निरीक्षण और मान्यता संबंधी स्थिति सार्वजनिक कर अभिभावकों की शंकाओं का समाधान करना चाहिए।

बच्चों का भविष्य किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। ऐसे में जरूरी है कि सेंट जेवियर स्कूल से जुड़े इन सवालों की निष्पक्ष जांच हो, वास्तविक स्थिति सामने आए और विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

*छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का दूसरा दिन : मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मुकाबला 3-3 से ड्रॉ*

0

*छत्तीसगढ़ हॉकी लीग का दूसरा दिन : मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मुकाबला 3-3 से ड्रॉ*

*प्रहलाद बने ‘स्ट्राइकर ऑफ़ द मैच’, करण धनुक को ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ का पुरस्कार*

 आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर.:- 23 अक्टूबर 2026. छत्तीसगढ़ हॉकी लीग के दूसरे दिन आज पहले मैच में कड़े मुकाबले के बीच मैनपाट टाइटन्स और बैलाडिला बुल्स के बीच मैच 3-3 से ड्रॉ पर समाप्त हुआ। पहले दो क्वार्टर्स में ओलंपियन प्रदीप मोर की टीम मैनपाट टाइटन्स का दबदबा रहा, जबकि आखिरी दो क्वार्टर्स में ओलंपियन चिंगलेनसाना सिंह की टीम बैलाडिला बुल्स ने बेहतर खेल दिखाया। शानदार खेल के लिए प्रहलाद को ‘स्ट्राइकर ऑफ़ द मैच’ चुना गया, जबकि करण धनुक को ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ का पुरस्कार मिला।

मैच का पहला हमला चौथे मिनट में देखने को मिला। मैनपाट के खिलाड़ियों ने सर्कल में प्रवेश तो किया, लेकिन विपक्षी डिफेंडरों ने आसानी से गेंद को बाहर निकाल दिया। इसके बाद जवाबी हमले में बैलाडिला बुल्स ने भी सर्कल में जगह बनाई, लेकिन उनके पास डिफेंस को चुनौती देने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं थी। मैच के 7वें मिनट में मैनपाट के पास गोल करने का एक बेहतरीन मौका आया, जब प्रहलाद टांडी को सर्कल के अंदर गेंद मिली, लेकिन बैलाडिला बुल्स के गोलकीपर ने तेजी से आगे आकर इस मौके को नाकाम कर दिया।

लगातार हमलों के बीच बैलाडिला को अपना पहला पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे संदीप ठाकुर ने गोल में बदल दिया। यादव अपनी बाईं ओर नहीं जा सके, जबकि गेंद उनके काफी करीब थी। बहरहाल, पहला क्वार्टर बिना किसी और हलचल के समाप्त हुआ। दूसरे क्वार्टर में मैनपाट ने अपनी बढ़त को और मजबूत किया। हालांकि ज्यादा मौके नहीं बने थे, लेकिन हाफ-टाइम से कुछ मिनट पहले प्रवीण यादव ने गोल कर दिया। प्रहलाद ने सर्कल के अंदर शानदार दौड़ लगाई और प्रवीण ने गेंद को बेहतरीन तरीके से डिफ्लेक्ट करके गोल में बदल दिया। हाफ-टाइम तक स्कोर 2-0 हो गया था।

शुरुआती बढ़त मिलने के बाद ऐसा लग रहा था कि मैनपाट अपना दबदबा बनाए रखेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बैलाडिला ने लगातार हमले कर विपक्षी डिफेंस पर दबाव बना दिया। उन्होंने कई बार सर्कल के अंदर प्रवेश किया और आखिरकार उनकी लगातार कोशिशों का फल उन्हें मिला। जसकरण सिंह सर्कल के काफी अंदर तक गए और उन्होंने राहुल यादव की तरफ गेंद फ्लिक की, जिसे राहुल ने गोल में बदल दिया। पिछले क्वार्टर की लय को बरकरार रखते हुए जसकरण ने चौथे क्वार्टर की शुरुआत में ही पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर स्कोर बराबर कर दिया। सर्कल के बाहर से लगाए गए एक ‘टोमाहॉक’ शॉट की वजह से बैलाडिला को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, जिसे मैनपाट के गोलकीपर अल्फ़ाज़ खान ने रोक दिया।

मैनपाट के प्रहलाद को सर्कल के अंदर कुछ खाली जगह मिली, जहाँ से उन्होंने एक ‘रिवर्स फ़्लिक’ के ज़रिए अपनी टीम के लिए गोल कर दिया। मैच के अंत के करीब बैलाडिला के निहाल हुसैन अंसारी ने पेनल्टी कॉर्नर के रिबाउंड पर शॉट लगाकर अपनी टीम के लिए बराबरी का गोल किया।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

0

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने माँ दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना कर देशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

*राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय थे उपस्थित*

*बस्तर की आराध्य देवी के दर्शन कर राष्ट्रपति ने देश में सुख, शांति और समृद्धि के लिए की प्रार्थना*

*माँ दंतेश्वरी मंदिर बस्तर की अटूट आस्था, समृद्ध परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र*

आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर / राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज अपने बस्तर प्रवास के दौरान जगदलपुर स्थित बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति ने माँ दंतेश्वरी से देशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने मंदिर में माँ दंतेश्वरी के दर्शन किए और श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में राष्ट्रपति का परंपरागत ढंग से स्वागत किया गया।

इस अवसर पर राज्यपाल श्री रमेन डेका और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माँ दंतेश्वरी के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-शांति, समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी के प्रति अंचल के लोगों की अटूट श्रद्धा है। माँ दंतेश्वरी बस्तर की आस्था और लोकजीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी का माँ दंतेश्वरी के दर्शन-पूजन के लिए आगमन बस्तर और पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर अपनी अनुपम जनजातीय संस्कृति, प्राचीन परंपराओं और विशिष्ट जीवन मूल्यों के लिए देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। यहाँ की परंपराओं में प्रकृति, आस्था और समाज के बीच गहरा संबंध दिखाई देता है। राष्ट्रपति जी के प्रवास से बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और सम्मान मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि माँ दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। माँ दंतेश्वरी के प्रति बस्तरवासियों की गहरी आस्था है और उनकी उपासना क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा में विशेष स्थान रखती है। माँ दंतेश्वरी से जुड़ी आस्था बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं और यहां के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में गहराई से रची-बसी है।

अथ उद्यम’ से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगी नई पहचान, अब छोटे व्यवसाय बनेंगे सफल उद्यम

0

अथ उद्यम’ से ग्रामीण महिलाओं को मिलेगी नई पहचान, अब छोटे व्यवसाय बनेंगे सफल उद्यम

*छत्तीसगढ़ सरकार और आईआईएम रायपुर की संयुक्त पहल से महिला उद्यमियों को मिलेगा प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और बाजार से जुड़ने का अवसर*

*पूरे राज्य से एक हजार से अधिक आवेदन प्राप्त, 31 अक्टूबर तक आवेदन का अवसर*

आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर,/ छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को आजीविका से आगे बढ़ाकर सफल उद्यमी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक अभिनव पहल की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व एवं उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ और भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) रायपुर के फाउंडेशन फॉर एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट (एफईडी) की संयुक्त पहल ‘अथ उद्यम’ ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के छोटे व्यवसायों को व्यवस्थित, लाभकारी और विस्तार योग्य उद्यमों के रूप में विकसित करना है।

‘आजीविका से उद्यमिता की ओर’ की अवधारणा पर आधारित इस विशेष इन्क्यूबेशन कार्यक्रम की शुरुआत केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने 11 सितंबर 2026 को की थी। पहल को लेकर महिला उद्यमियों में उत्साह देखा जा रहा है। अब तक पूरे राज्य से एक हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। इच्छुक महिलाएं 31 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं।

*प्रशिक्षण के साथ सालभर मिलेगा विशेषज्ञों का मार्गदर्शन*

‘अथ उद्यम’ की विशेषता यह है कि इसमें महिलाओं को केवल व्यवसाय शुरू करने या संचालित करने का प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि उनके मौजूदा उद्यमों को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक सहायता भी दी जाएगी। चयनित महिला उद्यमियों को 64 घंटे का चरणबद्ध व्यवसाय विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही एक वर्ष तक विशेषज्ञों का परामर्श, व्यक्तिगत मार्गदर्शन, क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग और सफल उद्यमियों के अनुभवों से सीखने के अवसर उपलब्ध होंगे।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को अपने उत्पाद की गुणवत्ता सुधारने, लागत एवं लाभ की गणना करने, बिक्री और व्यय का रिकॉर्ड रखने, उत्पादन एवं वितरण की बेहतर योजना बनाने तथा ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार व्यवसाय विकसित करने के तरीके सिखाए जाएंगे। बाजार की मांग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और वित्तीय प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा। कार्यक्रम के माध्यम से बाजार एवं ब्रांड से जुड़ाव के साथ ऋण तथा वित्तीय संस्थानों तक पहुंच बनाने में भी सहयोग किया जाएगा।

*गांवों के छोटे व्यवसायों को मिलेगा बड़ा बाजार*

इस पहल से खाद्य प्रसंस्करण, सिलाई एवं वस्त्र निर्माण, हस्तशिल्प, हथकरघा, वनोपज मूल्य संवर्धन, स्थानीय उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विभिन्न सेवा आधारित गैर-कृषि व्यवसायों से जुड़ी महिलाओं को लाभ मिलेगा। कार्यक्रम के माध्यम से महिलाएं अपने उत्पादों की बेहतर पहचान स्थापित कर सकेंगी तथा स्थानीय बाजारों से आगे नए ग्राहकों तक पहुंच बनाने के लिए आवश्यक व्यावसायिक कौशल विकसित कर सकेंगी।

विशेष रूप से उन महिलाओं को अवसर मिलेगा, जो पहले से कोई गैर-कृषि उद्यम संचालित कर रही हैं और अपने व्यवसाय का विस्तार करना चाहती हैं। स्वयं सहायता समूहों की सदस्य अथवा उनसे जुड़े परिवारों की महिला उद्यमी कार्यक्रम के लिए आवेदन कर सकती हैं। केवल सामान की सामान्य खरीद-बिक्री अर्थात ट्रेडिंग करने वाले व्यवसाय इस कार्यक्रम के लिए पात्र नहीं हैं।

*252 सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों को दिया गया प्रशिक्षण*

कार्यक्रम की जानकारी अधिक से अधिक ग्रामीण महिला उद्यमियों तक पहुंचाने के लिए आईआईएम रायपुर द्वारा 252 क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) सदस्यों को प्रशिक्षित किया गया है। ये सदस्य अपने क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कार्यक्रम की जानकारी देने और आवेदन के लिए प्रेरित करने में सहयोग कर रहे हैं।

इसके अतिरिक्त आईआईएम रायपुर के प्रबंधन विकास केंद्र में जिला एवं विकासखंड स्तर के परियोजना प्रबंधकों का प्रशिक्षण भी सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। इससे ग्रामीण स्तर पर कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार, पात्र महिला उद्यमियों की पहचान और आवेदन प्रक्रिया में सहयोग को गति मिल रही है।

*आवेदन की सुविधा उपलब्ध*

कार्यक्रम के प्रारम्भ में 250 महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण के लिए पात्रता एवं आवेदन मूल्यांकन के आधार पर चयन किया जाएगा। इच्छुक महिलाएं आधिकारिक पोर्टल atha.iimraipur.edu.in पर आवेदन कर सकती हैं। इसके अलावा स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर लेवल फेडरेशन, क्षेत्रीय सीआरपी दीदी अथवा विकासखंड स्तरीय बिहान कार्यालय के माध्यम से भी आवेदन संबंधी जानकारी और सहयोग प्राप्त किया जा सकता है।

‘अथ उद्यम’ ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार से आगे बढ़ाकर सक्षम व्यवसाय संचालक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे महिलाओं की प्रबंधकीय क्षमता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की योग्यता बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्यमों के विकास और आजीविका के नए अवसर सृजित होने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।