*भोजली त्यौहार हमारी संस्कृति हमें आपस में जोड़कर रखती है*
0.मितान परम्परा के तहत सदैव के लिये दो परिवार एक हो जाता है।
0.दामापुर में भोजली की धूम जैतपुरी की बेटियों ने निकाली भोजली यात्रा।
0.अच्छी वर्षा और उन्नत क़ृषि के कामना के साथ मनाया जाता है भोजली त्यौहार -अश्वनी यदु

हिमांशु सिंह ठाकुर:- ब्यूरो रिपोर्ट छत्तीसगढ़।
ब्यूरो रायपुर/पंडरिया:- -छत्तीसगढ़ अपनें परम्परा अपनी संस्कृति के लिये जानी जाती है जहां प्रकृति की पूजा क़ो महत्व दी जाती है छत्तीसगढ़ की हर त्यौहार के पीछे कंही न कहीं जन कल्याणकारी ऐतिहासिक मान्यता छिपी होती है जनपद पंचायत पंडरिया के सभापति प्र अश्वनी यदु ने कहा की सावन माह के अंतिम सप्ताह में बेटियां छोटी छोटी टोकरियों में उन्नत क़ृषि एवं अच्छा वर्षा की कामना के साथ भोजली की बीज बोती हैँ एकदम सुरक्षित एवं अँधेरे कमरे में रखकर प्रति दिन सेवा की जाती है और राखी त्यौहार के दूसरे दिन पुरे रीती रीवाज से श्रद्धा पूर्वक यात्रा निकालकर गंगा स्नान करवाई जाती है यह हमारी परम्परा है जिसका मुख्य उद्देश्य आपसी भाई चारा क़ो बढ़ाना है आगे अश्वनी यदु ने कहा की भोजली विसर्जन के बाद गांव के बुजुर्ग बच्चे एक दूसरे क़ो भोजली भेंट कर बधाई देते हैँ वंही भोजली से ही कई लोग मितान परम्परा का निर्वहन करते हुवे एक दूसरे के कान में भोजली लगाकर मितान बनते हैँ और सदा के लिये एक खून के रिश्ते की तरह दो परिवार एक हो जाता है भोजली त्यौहार हमारी संस्कृति है जो हमें आपस में जोड़कर रखती है।
