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*रक्षाबंधन के पूर्व जिला कोषालय ने किया प्रस्तुत वेतन देयकों का शत-प्रतिशत भुगतान, अधिकारी-कर्मचारियों में खुशी*

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*रक्षाबंधन के पूर्व जिला कोषालय ने किया प्रस्तुत वेतन देयकों का शत-प्रतिशत भुगतान, अधिकारी-कर्मचारियों में खुशी*

 मुकेश साहू ब्यूरो  मुंगेली—- रक्षाबंधन के पावन पर्व को देखते हुए जिला कोषालय विभाग मुंगेली द्वारा अधिकारी-कर्मचारियों के हित में महत्वपूर्ण पहल करते हुए रक्षाबंधन के पूर्व ही कोषालय में प्रस्तुत देयकों शत-प्रतिशत अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन एवं देय भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण कर दी गई। समय पर भुगतान होने से जिले के अधिकारी-कर्मचारियों में खुशी का माहौल है और उन्होंने जिला कोषालय विभाग की इस व्यवस्था की सराहना की है।

जिला कोषालय अधिकारी दुर्गेश राजपूत ने जानकारी देते हुए बताया कि रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए विभाग द्वारा भुगतान प्रक्रिया को प्राथमिकता के साथ पूरा किया गया। इसके तहत जिले के शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों का शत-प्रतिशत वेतन भुगतान रक्षाबंधन के पूर्व सुनिश्चित किया गया है। विभाग द्वारा समयबद्ध तरीके से बिलों एवं भुगतान संबंधी आवश्यक प्रक्रियाओं का निराकरण करते हुए अधिकारी-कर्मचारियों के खातों में राशि पहुंचाने की कार्रवाई पूरी की गई।

रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का महत्वपूर्ण पर्व है। इस अवसर पर अधिकांश कर्मचारी अपने परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए तैयारियों में जुटे रहते हैं। ऐसे में पर्व के पूर्व वेतन का भुगतान होने से अधिकारी-कर्मचारियों को आर्थिक रूप से सुविधा मिली है। वे अपने परिवार के साथ रक्षाबंधन पर्व को उत्साह एवं उमंग के साथ मना सकेंगे तथा पर्व से जुड़ी आवश्यक खरीदारी भी समय पर कर सकेंगे।

जिला कोषालय अधिकारी दुर्गेश राजपूत ने जिले के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों को रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, विश्वास, स्नेह और आपसी सहयोग का प्रतीक है। यह पर्व सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशियां लेकर आए तथा सभी अधिकारी-कर्मचारियों एवं उनके परिवारों में आपसी प्रेम और सौहार्द बना रहे। उन्होंने कहा कि जिला कोषालय विभाग का प्रयास रहता है कि शासकीय भुगतान से संबंधित कार्यों को नियमानुसार समय पर पूरा किया जाए, ताकि अधिकारी-कर्मचारियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पर्व के अवसर पर समय से भुगतान सुनिश्चित करना भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। रक्षाबंधन से पहले शत-प्रतिशत वेतन भुगतान की जानकारी सामने आने के बाद अधिकारी-कर्मचारियों ने राहत की भावना व्यक्त की। कर्मचारियों का कहना है कि पर्व के पहले वेतन मिलने से परिवार के साथ त्योहार की तैयारियां बेहतर तरीके से की जा सकेंगी। समय पर भुगतान से बाजार में भी खरीदारी को लेकर उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।

जिला कोषालय विभाग द्वारा की गई इस व्यवस्था को अधिकारी-कर्मचारियों के हित में सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों के समन्वय एवं समयबद्ध कार्यवाही के चलते रक्षाबंधन के पूर्व भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने से पर्व की खुशियां और बढ़ गई हैं।

जिला कोषालय अधिकारी दुर्गेश राजपूत ने एक बार फिर मुंगेली जिले के समस्त अधिकारी-कर्मचारियों तथा उनके परिवारजनों को रक्षाबंधन पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुखी, स्वस्थ एवं मंगलमय जीवन की कामना की।

*ग्राम कटघरी में धूमधाम से निकली भव्य भोजली शोभायात्रा*

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*ग्राम कटघरी में धूमधाम से निकली भव्य भोजली शोभायात्रा*

 मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर चांपा :*जिले के ग्राम कटघरी में आज छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपरा का जीवंत नजारा देखने को मिला। भोजली पर्व के अवसर पर गांव में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें गांव के सभी मोहल्लों से बड़ी संख्या में ग्रामीण उत्साह और उमंग के साथ शामिल हुए।

शोभायात्रा में कंवर पारा, रामगढ़-लिम पारा, यादव मोहल्ला, गोंड पारा और गुरु घासीदास मोहल्ला सहित गांव के सभी मोहल्लों के लोगों ने सहभागिता निभाई। पारंपरिक गीत-संगीत और उत्साह के बीच निकली भोजली यात्रा ने पूरे गांव को भक्तिमय और उत्सवमय माहौल से सराबोर कर दिया।

महिलाएं सिर पर भोजली लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शोभायात्रा में शामिल हुईं। ग्रामीणों की भारी सहभागिता ने इस पर्व के प्रति लोगों की आस्था और अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम को दर्शाया।

भोजली शोभायात्रा गांव के मुख्य तालाब स्थित देवालय मनका दाई पहुंची, जहां शोभायात्रा का विधिवत समापन हुआ। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ भोजली का विसर्जन किया गया।

कृषि और हरियाली का प्रतीक है भोजली पर्व

भोजली तिहार छत्तीसगढ़ की अनमोल लोकसंस्कृति का प्रमुख पर्व है। यह पर्व कृषि, हरियाली और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।

भोजली पर्व के दौरान नई टोकरी या पात्र में खाद और मिट्टी डालकर गेहूं अथवा जवारे के दाने बोए जाते हैं। सात से नौ दिनों तक भोजली की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। भोजली के पौधों का अच्छी तरह से विकसित होना क्षेत्र में अच्छी फसल, खुशहाली और समृद्धि का संकेत माना जाता है।

मितानी और भाईचारे की अनूठी परंपरा

भोजली पर्व की सबसे खास परंपराओं में से एक है मितानी का रिश्ता। विसर्जन के बाद भोजली की पत्तियों को एक-दूसरे के कान पर रखकर या आपस में आदान-प्रदान कर लोग जीवनभर के लिए मित्रता और आत्मीयता का रिश्ता कायम करते हैं।

इस अवसर पर एक-दूसरे को “सीताराम भोजली” कहकर अभिवादन किया जाता है। यह परंपरा समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का संदेश देती है।

भोजली केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, लोकसंगीत, कृषि परंपरा और सामाजिक एकता को जीवंत रखने वाला लोकपर्व है।

ग्राम कटघरी में निकली यह भव्य शोभायात्रा भी इसी सांस्कृतिक विरासत की एक सुंदर मिसाल बनी, जहां गांव के सभी मोहल्ले एक साथ नजर आए और लोगों ने मिल-जुलकर भोजली पर्व की खुशियां साझा कीं।

प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, अच्छी फसल की कामना और रिश्तों में मिठास—भोजली तिहार इन सभी भावनाओं का अद्भुत संगम है।

ग्राम कटघरी की यह भोजली शोभायात्रा न सिर्फ एक पर्व का उत्सव रही, बल्कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे की खूबसूरत तस्वीर भी पेश कर गई।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खेलों पर आधारित फोटो प्रदर्शनी और कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ का किया विमोचन*

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने खेलों पर आधारित फोटो प्रदर्शनी और कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ का किया विमोचन*

*राष्ट्रीय खेल दिवस पर छत्तीसगढ़ के गौरवशाली खेल इतिहास और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को मिला नया मंच*

*फोटो प्रदर्शनी में प्रदेश की खेल विभूतियों के जीवन और योगदान की झलक, कॉफी टेबल बुक में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की उपलब्धियां संकलित*

आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के गौरवशाली खेल इतिहास और खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर केंद्रित फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने फोटो प्रदर्शनी में प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की खेल विभूतियों के जीवन, संघर्ष, उपलब्धियों और खेल जगत में उनके योगदान से संबंधित छायाचित्रों एवं जानकारियों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदेश के खेल इतिहास और खिलाड़ियों की उपलब्धियों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की इस पहल की सराहना की।

खेलों पर आधारित इस विशेष फोटो प्रदर्शनी में शहीद राजीव पाण्डेय, शहीद पंकज विक्रम, शहीद कौशल यादव और शहीद विनोद चौबे सहित छत्तीसगढ़ की अनेक विभूतियों के जीवन और योगदान को छायाचित्रों एवं रोचक जानकारियों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में वीर हनुमान सिंह के जीवन, उनकी खेल साधना और खेल जगत में उनके उल्लेखनीय योगदान को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।

प्रदर्शनी के माध्यम से प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के संघर्ष से सफलता तक के सफर को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया गया है। इसमें खिलाड़ियों की उपलब्धियों के साथ उन प्रेरक प्रसंगों को भी स्थान दिया गया है, जो नई पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरणा देने वाले हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ का भी विमोचन किया। इस कॉफी टेबल बुक में छत्तीसगढ़ का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव बढ़ाने वाले खिलाड़ियों के जीवन परिचय, खेल यात्रा, महत्वपूर्ण उपलब्धियों और उनके योगदान को आकर्षक छायाचित्रों के साथ संकलित किया गया है। यह पुस्तक प्रदेश की खेल प्रतिभाओं की उपलब्धियों को दस्तावेजीकृत करने के साथ ही छत्तीसगढ़ की समृद्ध खेल विरासत को नई पीढ़ी से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।

फोटो प्रदर्शनी एवं कॉफी टेबल बुक ‘हमारे खिलाड़ी’ को खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा जनसंपर्क विभाग द्वारा तैयार किया गया है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास, प्रदेश की गौरवशाली खेल विभूतियों तथा वर्तमान खिलाड़ियों की उपलब्धियों को एक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री खुशवंत साहेब, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं श्री विजय बघेल, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू एवं श्री सुनील सोनी, छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्वविजय सिंह तोमर, ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिसोदिया सहित विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, खिलाड़ी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में खेलप्रेमी उपस्थित थे।

*छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को तलाशने, तराशने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

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*छत्तीसगढ़ की खेल प्रतिभाओं को तलाशने, तराशने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय*

*राष्ट्रीय खेल दिवस पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने 126 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को प्रदान किए राज्य खेल अलंकरण*

*666 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को मिली 1.74 करोड़ रुपए से अधिक की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि*

*मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपए का प्रावधान, प्रदेश में मजबूत हो रहा खेल अधोसंरचना का नेटवर्क*

*उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए खुल रहे शासकीय सेवा के द्वार, 156 खिलाड़ियों की सूची जारी*

*बस्तर ओलंपिक से लेकर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स तक, युवाओं को मिल रहा अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा मंच*

 आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर,/मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की जयंती एवं राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य खेल अलंकरण समारोह में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को सम्मानित किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने वर्ष 2023-24, 2024-25 एवं 2025-26 के लिए 126 उत्कृष्ट खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को राज्य खेल अलंकरण प्रदान किए। समारोह में राज्य खेल अलंकरण प्राप्त खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के साथ ही 540 अन्य खिलाड़ियों को भी नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। इस प्रकार कुल 666 खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को 1 करोड़ 74 लाख 19 हजार रुपए की पुरस्कार एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री श्री साय ने समारोह में खिलाड़ियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में खिलाड़ी का परिश्रम, अनुशासन और संघर्ष केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसकी सफलता से पूरे प्रदेश और देश का गौरव बढ़ता है। छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण पीछे न रहना पड़े।

समारोह में उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव, केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू, संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल एवं श्री विजय बघेल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

*उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए शासकीय सेवा के अवसर*

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राज्य खेल अलंकरण से सम्मानित किया जा रहा है। राज्य सरकार खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित और बेहतर बनाने के लिए भी लगातार कदम उठा रही है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में प्रदेश के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची जारी की गई है, जिससे उनके लिए शासकीय सेवा में नियुक्ति का रास्ता खुला है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को सम्मान और प्रोत्साहन देने के साथ उनके भविष्य को संवारना भी सरकार की प्राथमिकता है। इससे प्रदेश के युवाओं में खेलों को करियर के रूप में अपनाने का विश्वास और मजबूत होगा।

*बस्तर की खेल प्रतिभाओं को मिला बड़ा मंच*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय अंचलों में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, अवसर देने और उचित प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर रही है।

उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक के पहले आयोजन में 1 लाख 65 हजार युवाओं ने हिस्सा लिया था। दूसरे वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 लाख 91 हजार तक पहुंच गई। इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का खेल मैदान तक आना बस्तर में आ रहे सकारात्मक बदलाव और युवाओं के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी स्थानीय प्रतिभाओं को आगे आने का अवसर दिया गया है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स का सफल आयोजन किया गया। इन आयोजनों के जरिए राज्य सरकार प्रतिभाओं को तलाशने के साथ उन्हें प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा का बेहतर वातावरण उपलब्ध करा रही है।

*पांच मिशन के जरिए खेलों को नई ऊंचाई देने की तैयारी*

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में खेलों और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए पांच मिशन पर काम कर रही है। इनमें मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन भी शामिल है। इसके लिए 100 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल प्रतियोगिताएं आयोजित करना नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की पहचान से लेकर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन, बेहतर खेल अधोसंरचना और बड़े मंचों तक पहुंचने के अवसर उपलब्ध कराने की समग्र व्यवस्था विकसित करना है। इससे छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकेंगे।

*प्रदेश में मजबूत हो रही खेल अधोसंरचना*

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना का तेजी से विकास किया जा रहा है। कुनकुरी, रायगढ़ और रायपुर में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि तीरंदाजी के खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवा रायपुर में लगभग 67 करोड़ रुपए की लागत से एकेडमी का निर्माण किया जा रहा है। इसी तरह पहाड़ी कोरवा समुदाय की नैसर्गिक तीरंदाजी प्रतिभा को निखारने के लिए पंडरापाट में लगभग 18 करोड़ रुपए की लागत से तीरंदाजी अकादमी विकसित की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय अंचलों में अनेक ऐसे युवा हैं, जिनमें खेलों की स्वाभाविक प्रतिभा है। उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण और उचित मंच उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं।

*छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं : उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव*

उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक विविधता विभिन्न खेलों के लिए अनुकूल है। प्रदेश में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता इन प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें निखारने और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर देने की है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है। केंद्र सरकार की खेलो इंडिया जैसी पहलों से देशभर में खेलों के प्रति नया उत्साह और सकारात्मक वातावरण बना है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को भी मिल रहा है।

श्री साव ने बिलासपुर खेल अकादमी की गीता यादव और मधु सिदार का एशिया कप के लिए भारतीय टीम में चयन होने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है। प्रदेश की प्रतिभाएं निरंतर बड़े मंचों तक पहुंच रही हैं।

*देश में खेलों के लिए बना सकारात्मक वातावरण : केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू*

केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने अपने खेल से भारत को दुनिया में गौरवान्वित किया। आज उनके पदचिह्नों पर चलते हुए छत्तीसगढ़ के बेटे-बेटियां विभिन्न खेलों में प्रदेश और देश का नाम रोशन कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खिलाड़ियों को प्रोत्साहन, आधुनिक सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने के कारण देश में खेलों के प्रति सकारात्मक वातावरण बना है। इसका परिणाम है कि भारत के खिलाड़ी विश्व की बड़ी प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों के सामने अनेक बड़े अवसर हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों के साथ ही ओलंपिक और एशियन गेम्स जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर पदक जीतकर छत्तीसगढ़ के एम्बैसडर बनेंगे और राज्य का गौरव बढ़ाएंगे।

*तीन वर्षों के उत्कृष्ट खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों का सम्मान*

राज्य खेल अलंकरण समारोह में वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के उत्कृष्ट खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार, शहीद कौशल यादव पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार, शहीद पंकज विक्रम सम्मान, शहीद विनोद चौबे सम्मान और मुख्यमंत्री ट्रॉफी शामिल हैं।

*वर्ष 2023-24*

शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार – कु. मोनिका साहू (फेंसिंग), श्री सुभाष लहरे (वेटलिफ्टिंग), श्री अनुप यदु (नेटबॉल), श्री राजेश राठौर (नेटबॉल), श्री भूपेन्द्र कुमार गढ़े (सॉफ्टबॉल) एवं श्री परमानंद (पैरा स्विमिंग)।

*शहीद कौशल यादव पुरस्कार* – सुश्री दिपांशी नेताम (फेंसिंग), श्री महेन्द्र धुर्वे (वॉलीबॉल), श्री अमित कुमार (एथलेटिक्स) एवं श्री राकेश कडती (सॉफ्टबॉल)।

*वीर हनुमान सिंह पुरस्कार* – श्री विकास ढीढ़ी (पैरा जूडो)।

*शहीद पंकज विक्रम सम्मान* – कु. सीता साहू (पैरा व्हीलचेयर फेंसिंग), श्री करन भारती (वुशू), सुश्री प्रियंका ठाकुर (वुशू), श्री शशांक मसीह (रायफल शूटिंग), श्री राजीव साहू (टेबल टेनिस), कु. काजल (टेबल टेनिस), कु. भूमिका उपाध्याय (हॉकी) एवं अजिंक्या सिंह (तैराकी)।

*शहीद विनोद चौबे सम्मान* – श्री प्रवेश चढ्ढा (शूटिंग), श्री विजय बहादुर (हैंडबॉल), श्री लक्ष्मण लाल साहू (कुश्ती), श्री के. रवि शंकर (टेबल टेनिस) एवं श्री गिरिराज बागड़ी (टेबल टेनिस)।

*मुख्यमंत्री ट्रॉफी* – सीनियर वर्ग में बिलासपुर की पैरा व्हीलचेयर फेंसिंग टीम।

*वर्ष 2024-25*

*शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार* – कु. ज्ञानेश्वरी यादव (वेटलिफ्टिंग), श्री ईशान भटनागर (बैडमिंटन), श्री दिव्यांशु नेताम (फेंसिंग), कु. भूमि गुप्ता (तैराकी), कु. सोनम शर्मा (नेटबॉल), श्री कलाराम पटेल (पैरा एथलेटिक्स) एवं लोमेन्द्र साहू।

*शहीद कौशल यादव पुरस्कार* – श्री मानस भट्टाचार्य (बैडमिंटन) एवं श्री सुखदेव (पैरा एथलेटिक्स)।

*वीर हनुमान सिंह पुरस्कार* – श्री अशोक कुमार साहू (कयाकिंग एवं कैनोइंग)।

*शहीद पंकज विक्रम सम्मान* – कु. सुमन यादव (फुटबॉल), श्री रोहित रजक (हॉकी), कु. गीतांजलि निर्मलकर (हॉकी), श्री के.एस. साई प्रशांत (टेबल टेनिस), कु. सुष्मिता सोम (टेबल टेनिस), श्री रामकृष्ण साहू (पैरा स्विमिंग), स्वाति साहू (पैरा व्हीलचेयर फेंसिंग), श्री साकेत सामुएल (रायफल शूटिंग), श्री अमन तिवारी (वुशू) एवं कु. मानसी डुंभरे (वुशू)।

*शहीद विनोद चौबे सम्मान* – श्रीमती प्रभा हुसैन (एथलेटिक्स), श्रीमती संगीता राजगोपालन (बैडमिंटन), श्री गामा यादव (कुश्ती) एवं श्री प्रनय नन्द मजूमदार (टेबल टेनिस)।

*मुख्यमंत्री ट्रॉफी*– सीनियर महिला वर्ग में बिलासपुर की तीरंदाजी टीम।

*वर्ष 2025-26*

*शहीद राजीव पाण्डेय पुरस्कार* – विकास कुमार (आर्चरी), किरण पिस्दा (फुटबॉल), दीपांशी नेताम (फेंसिंग), सुजेय तंबोली (बैडमिंटन), आयुष माखिजा (बैडमिंटन), संजू देवी (कबड्डी), रीमा राय (सॉफ्ट टेनिस), मिशा कुमारी (नेटबॉल) एवं लक्की यादव (पैरा एथलेटिक्स)।

*शहीद कौशल यादव पुरस्कार* – दिव्यांशु देवांगन (शूटिंग), विक्रम राज (आर्चरी), दिव्यांश अग्रवाल (बैडमिंटन), सोनिका राजवाड़े (एथलेटिक्स), स्वप्निल प्रधान (वुशू), भूमिका चौधरी (नेटबॉल), पूजा (नेटबॉल) एवं निखिल कुमार यादव (पैरा एथलेटिक्स)।

*वीर हनुमान सिंह पुरस्कार* – अजय दीप सारंग (वेटलिफ्टिंग)।

*शहीद पंकज विक्रम सम्मान* – संस्कार दिवान (वुशू), विद्या सिंह (वुशू), अंकुश सिंह (खो-खो), झमिता साहू (खो-खो), हेमशिखर (वॉलीबॉल), अरन्दिम देवनाथ (टेबल टेनिस), स्नेहा न्योगी (जूडो), अनमोल सिंह (जूडो), यश केरकेट्टा (बॉक्सिंग), टुकेश साहू (जिम्नास्टिक), सेमेश्वर सिंह (पैरा स्विमिंग), श्रीकांत पाण्डे (पैरा जूडो) एवं खुशाल यादव (हॉकी)।

*शहीद विनोद चौबे सम्मान* – गंगेश्वर (एथलेटिक्स), ख्वाजा अहमद (वॉलीबॉल), एवन कुमार जैन (वेटलिफ्टिंग), मो. अकरम खान (वॉलीबॉल) एवं प्रदीप जोशी (टेबल टेनिस)।

*मुख्यमंत्री ट्रॉफी* – तीरंदाजी सीनियर महिला टीम एवं सॉफ्ट टेनिस जूनियर बालिका टीम।

समारोह में विधायक श्री पुरन्दर मिश्रा, श्री मोतीलाल साहू एवं श्री सुनील सोनी, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री नंद कुमार साहू, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर, छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के अध्यक्ष डॉ. विक्रम सिसोदिया, विभिन्न खेल संघों के पदाधिकारी, खिलाड़ी एवं प्रशिक्षक उपस्थित थे।

*लक्ष्य हासिल करने के लिए जुनून जगाएं और मेहनत करें: राज्यपाल श्री रमेन डेका*

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*लक्ष्य हासिल करने के लिए जुनून जगाएं और मेहनत करें: राज्यपाल श्री रमेन डेका*

*​चाम्पा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नवनिर्मित सभाकक्ष का लोकार्पण*

*​वरिष्ठ शिक्षकों, मेधावी विद्यार्थियों और रोजगार प्राप्त युवाओं का सम्मान*

​ आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर, /राज्यपाल श्री रमेन डेका आज बलौदाबाजार विकासखंड के ग्राम चाम्पा स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में आयोजित लोकार्पण एवं सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय के नवनिर्मित सभाकक्ष का लोकार्पण किया। साथ ही, वरिष्ठ शिक्षकों, 10वीं व 12वीं के मेधावी छात्रों, पीएटी (PAT) में चयनित विद्यार्थियों और ‘हम होंगे कामयाब’ योजना के तहत रोजगार प्राप्त 9 युवाओं को सम्मानित किया।

*​जुनून और कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी- राज्यपाल*

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि नवनिर्मित सभाकक्ष से विद्यार्थियों की प्रतिभा को निखारने के लिए सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने शिक्षक-छात्र संबंधों की प्रगाढ़ता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षकों को अपने आचरण से छात्रों का रोल मॉडल बनना चाहिए। छात्रों को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए जुनून पैदा करें और उसे हकीकत में बदलने के लिए निरंतर कड़ी मेहनत करें। नई शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यह नीति कौशल विकास और विषय विशेषज्ञता हासिल करने में सहायक है।

*​डिजिटल तकनीक का संतुलित उपयोग जरूरी*

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि मोबाइल और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने छात्रों से अपील की कि वे तकनीक का इस्तेमाल केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही करें। सोशल मीडिया और एआई (AI) सुविधाजनक जरूर हैं, लेकिन इनका अत्यधिक उपयोग आत्ममंथन और सृजनात्मक को कम कर देता है।

*​ऐतिहासिक और गौरव का क्षण: राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा*

राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने राज्यपाल के आगमन को चाम्पा गांव के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए कहा कि शिक्षक न केवल शिक्षा देते हैं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराते हैं। उन्होंने छात्रों को असफलताओं से न घबराकर कड़ी मेहनत जारी रखने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम को पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने भी संबोधित किया।

इस अवसर पर ​ राज्यपाल ने अपनी स्वर्गीय माता चम्पावती डेका की स्मृति में स्कूल परिसर में अमलताश का पौधा रोपा। राजस्व मंत्री व अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी एक पेड़ माँ के नाम पौधरोपण किया।

*बिहान की दीदियों ने धान और चावल के बीजों से निर्मित हस्तनिर्मित राखी बांधी*

कार्यक्रम में ‘बिहान’ योजना की आजीविका दीदियों द्वारा लगाए गए उत्पादों की प्रदर्शनी का राज्यपाल ने अवलोकन किया। इस दौरान दीदियों ने उन्हें धान और चावल के बीजों से निर्मित हस्तनिर्मित राखी बांधी, जिसकी राज्यपाल ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।

समारोह में ​शिक्षक व शिक्षाविद श्री एस.एम. पाध्ये, डॉ. निशा झा, डॉ. डी.एन. राय, और भूषण धुरंधर तथा​प्रतिभावान छात्र जिज्ञासु वर्मा (12वीं स्टेट टॉपर), साक्षी वर्मा, अमित कुमार टंडन (10वीं), तथा पीएटी चयनित प्रवीण डहरिया, ममता साहू एवं मयंक वर्मा को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, गणमान्य नागरिक और विद्यार्थी उपस्थित थे।

*जहां कभी बंदूक थी, वहां बंधा रिश्तों का धागा…* 

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*जहां कभी बंदूक थी, वहां बंधा रिश्तों का धागा…* 

*बस्तर में राखी ने बदली ‘दुश्मनी’ की परिभाषा*

*25 साल नक्सली संगठन में रहीं मीना ने जवानों की कलाई पर बांधी राखी*

*महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया भाईचारे का हाथ*

 आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर / कलाई आगे बढ़ी तो कुछ पल के लिए जैसे समय ठहर गया। सामने सुरक्षा बल का जवान था और हाथ में राखी लिए खड़ी थी वह महिला, जिसकी जिंदगी के करीब 25 साल जंगल, नक्सली संगठन और संघर्ष के बीच बीते थे। कभी जिस वर्दी को देखकर मन में टकराव और अविश्वास पैदा होता था, उसी वर्दी की कलाई पर इस बार उसने राखी बांधी। जवान ने भी बहन का रिश्ता स्वीकार किया, शगुन दिया और मिठाई खिलाई।

भानुप्रतापपुर के सुरक्षा बल कैंप में रक्षाबंधन का यह दृश्य बस्तर की बदलती तस्वीर की कहानी कह रहा था। यह सिर्फ राखी बांधने का कार्यक्रम नहीं था। यह उस दूरी को पाटने की कोशिश थी, जो वर्षों के हिंसक संघर्ष ने समाज और सुरक्षा बलों के बीच पैदा कर दी थी।

*हाथ में हथियार नहीं, राखी थी*

करीब 25 वर्षों तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहीं मीना और अन्य पूर्व नक्सली महिलाओं के लिए यह पल सामान्य नहीं था। जंगल की जिंदगी में हथियार और संघर्ष उनका अतीत रहे हैं। लेकिन अब वही हाथ एक नए रिश्ते की शुरुआत कर रहे थे।

सुरक्षा बल के कैंप में पहुंचीं पूर्व नक्सली महिलाओं ने जवानों की कलाई पर राखी बांधी। जवानों ने भी उन्हें बहन के रूप में स्वीकार किया। शगुन दिया, मिठाई खिलाई और इस रिश्ते को सम्मान दिया।

यह तस्वीर इसलिए भी खास थी क्योंकि बस्तर में कई सालों तक सुरक्षा बल और नक्सली आमने-सामने रहे हैं। गोलियों और बारूदी सुरंगों के बीच बने इस तनाव के बीच एक राखी ने संवाद और विश्वास की एक नई जगह बनाई।

*महिला पुलिसकर्मियों ने भी बढ़ाया हाथ*

इस आयोजन में महिला पुलिसकर्मियों ने भी हिस्सा लिया। कभी नक्सल हिंसा के खिलाफ अभियानों और सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा रहे सुरक्षा बल के जवान और पूर्व नक्सली महिलाएं इस दिन किसी संघर्ष के दो पक्ष नहीं, बल्कि एक-दूसरे के भाई-बहन नजर आए।

रक्षाबंधन के इस छोटे से आयोजन में संदेश बड़ा था—अगर हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटे लोगों को समाज में स्वीकार्यता मिले और सुरक्षा बलों के साथ विश्वास का रिश्ता बने, तो नक्सल प्रभावित इलाकों में स्थायी शांति की राह और मजबूत हो सकती है।

*एसपी बोले—रिश्ते सामान्य होंगे*

कांकेर एसपी श्री निखिल राखेचा ने इस पहल को नक्सल समस्या के समाधान की दिशा में एक अनूठा प्रयास बताया।

उन्होंने कहा, यह एक अनूठा प्रयास है कि नक्सलवाद की जो समस्या थी, उसके समाधान की दिशा में हम जो कदम बढ़ा रहे हैं, उसका यह प्रतीक स्वरूप रक्षाबंधन है। इस रिश्ते के धागे से रिश्ते सामान्य होंगे।

एसपी ने कहा कि ऐसे प्रयास केवल त्योहार मनाने तक सीमित नहीं हैं। इनका उद्देश्य समाज में विश्वास बहाली को मजबूत करना और मुख्यधारा से जुड़ने की प्रक्रिया को गति देना भी है।

*मीना के लिए राखी का मतलब सिर्फ त्योहार नहीं*

करीब ढाई दशक तक नक्सली संगठन का हिस्सा रहना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी पर गहरी छाप छोड़ता है। जंगल की जिंदगी, संगठन की सोच और संघर्ष के बीच बीते वर्षों के बाद मुख्यधारा में लौटना आसान नहीं होता। ऐसे में राखी का यह धागा मीना और उनके साथ आई महिलाओं के लिए एक नए सामाजिक रिश्ते की शुरुआत जैसा था।

जिस समाज और सुरक्षा व्यवस्था से कभी दूरी रही, उसी समाज के प्रतिनिधि जवान की कलाई पर राखी बांधना यह संकेत भी है कि अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर नई जिंदगी की ओर बढ़ने की कोशिश जारी है।

*बस्तर में बदल रही है कहानी*

बस्तर की कहानी लंबे समय तक नक्सली हिंसा, मुठभेड़, शहीद जवानों और भय के इर्द-गिर्द लिखी जाती रही। गांवों में बंदूक की मौजूदगी ने सामान्य जीवन को प्रभावित किया। विकास की राह भी हिंसा के साए में आगे बढ़ती रही। लेकिन अब इसी बस्तर से कहानी के कुछ नए अध्याय सामने आ रहे हैं।

हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते लोग, गांवों में पहुंचती विकास की योजनाएं, बनती सड़कें, खुलते स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ सामाजिक विश्वास बहाली के प्रयास भी बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। भानुप्रतापपुर का यह रक्षाबंधन उसी बदलाव की मानवीय तस्वीर है।

*एक राखी, कई संदेश*

राखी का धागा छोटा है, लेकिन इस आयोजन का संदेश बड़ा है। यह संदेश उन लोगों के लिए है जो कभी हिंसा के रास्ते पर चले गए थे कि वापसी का रास्ता खुला है। यह समाज के लिए संदेश है कि मुख्यधारा में लौटने वालों को स्वीकार करना जरूरी है। और यह सुरक्षा बलों के लिए भी एक मानवीय पहल है कि कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाने के साथ विश्वास का रिश्ता भी बनाया जा सकता है।

नक्सल प्रभावित क्षेत्र में रक्षाबंधन का यह आयोजन इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि यहां राखी सिर्फ कलाई पर नहीं बंधी—यह भरोसे पर बंधी।

*जहां कभी डर था, वहां अब भरोसे की कोशिश*

छत्तीसगढ़ सरकार के नक्सल मुक्त बस्तर के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शांति, विकास और विश्वास के साथ आगे बढ़ते बस्तर की यह तस्वीर बताती है कि किसी भी संघर्ष का अंत केवल बंदूक से नहीं होता। स्थायी शांति के लिए लोगों के बीच भरोसा लौटना भी उतना ही जरूरी है।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के संकल्प के साथ नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे प्रयासों के बीच यह पहल बस्तर के बदलते सामाजिक माहौल की एक भावुक तस्वीर पेश करती है।

कैंप में राखी बंधने के बाद शायद सबसे बड़ा बदलाव यही था कि कुछ देर के लिए वहां किसी ने यह नहीं देखा कि सामने वाला कल कौन था।

देखा तो सिर्फ इतना गया कि आज वह सामने खड़ा व्यक्ति कौन है—एक भाई, एक बहन और एक ऐसे समाज का हिस्सा, जो अपने अतीत से आगे बढ़कर शांति की ओर जाना चाहता है।

बस्तर में कभी बंदूक रिश्तों के बीच खड़ी थी। इस रक्षाबंधन में उसी जगह एक धागा खड़ा था—रिश्तों का, भरोसे का और नए बस्तर का।

*अंतिम सांस तक संघर्ष की सीख देता है खेल: कुलपति प्रो. मनोज दयाल*

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*अंतिम सांस तक संघर्ष की सीख देता है खेल: कुलपति प्रो. मनोज दयाल*

*​राष्ट्रीय खेल दिवस पर केटीयू में आयोजित हुए पारंपरिक व नवाचारी खेल*

 *कुलपति, कुलसचिव संग विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा*

​आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर/ खेल केवल शारीरिक और मानसिक तंदुरुस्ती का जरिया नहीं, बल्कि यह विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी अंतिम क्षण तक संघर्ष कर विजय श्री हासिल करने का साहस प्रदान करता है। यह विचार कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (केटीयू), रायपुर के कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए।

​विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. दयाल ने कहा कि खेलों के माध्यम से विद्यार्थियों में टीम भावना, नेतृत्व क्षमता, धैर्य, उत्साह, सकारात्मकता और आपसी समन्वय जैसे जीवन-मूल्यों का बीजारोपण होता है। ये गुण न केवल व्यक्तित्व को संतुलित और बहुआयामी बनाते हैं, बल्कि आज के दौर में तनाव मुक्त जीवन जीने का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

​राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में परिसर में विविध पारंपरिक एवं नवाचारी खेलों की धूम रही। इसमें विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों ने ‘ओंकार दौड़’, ‘केंद्र कबड्डी’, ‘नेताजी की पहचान’, ‘मत चूको चौहान’, ‘शेर-आदमी-बंदूक’ और ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी स्पर्धाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

​कार्यक्रम में कुलपति प्रो. दयाल के साथ विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुनील शर्मा, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने खेल भावना का परिचय देते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

*राखी के धागे में विष्णु भैया का साथ, महतारी वंदन की राशि से कुसुम की रक्षाबंधन की खुशियां हुईं दोगुनी*

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*राखी के धागे में विष्णु भैया का साथ, महतारी वंदन की राशि से कुसुम की रक्षाबंधन की खुशियां हुईं दोगुनी*

*“राखी के धागे में विश्वास अपार, बहनों के साथ विष्णु भैया की सरकार।”*

*महतारी वंदन की 31वीं किस्त से मिली आर्थिक मदद, राखी और मिठाई की खरीदारी से आसान हुई त्योहार की तैयारियां*

 आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर, / भाई-बहन के अटूट प्रेम, स्नेह और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन इस बार सरगुजा जिले की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और खुशियों का संदेश लेकर आया है। महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि त्योहार से पहले मिलने से महिलाओं को राखी, मिठाई और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी में सहूलियत मिली है। लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पुहपुटरा निवासी श्रीमती कुसुम शुक्ला के लिए भी समय पर मिली यह राशि रक्षाबंधन की खुशियों को दोगुना करने वाली साबित हुई।

*त्योहार से पहले मिला आर्थिक संबल, चेहरे पर आई मुस्कान*

कुसुम शुक्ला ने बताया कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है। इस बार रक्षाबंधन से पहले 31वीं किस्त की राशि मिलने से उन्होंने अपने भाइयों के लिए राखी और मिठाई खरीदने की तैयारी कर ली है। समय पर मिली राशि ने त्योहार की खरीदारी को आसान बनाया और परिवार के साथ पर्व मनाने का उत्साह बढ़ाया है।

वे कहती हैं कि महतारी वंदन योजना की राशि उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि अपनी इच्छानुसार त्योहार मनाने और भाई-बहन के रिश्ते की खुशियों में आर्थिक रूप से सहभागी बनने का अवसर भी है।

कुसुम शुक्ला ने कहा, “महतारी वंदन की राशि रक्षाबंधन से पहले मिलने से मैं बहुत खुश हूं। इस राशि से राखी और मिठाई खरीदकर अपने भाइयों के साथ खुशी से रक्षाबंधन मनाऊंगी। विष्णु भैया को हमारी तरफ से बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।”

*महिलाओं के आर्थिक आत्मविश्वास को मिल रहा बल*

कुसुम शुक्ला बताती हैं कि नियमित रूप से मिलने वाली राशि से महिलाएं अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो रही हैं। घरेलू आवश्यकताओं के साथ त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में भी महिलाएं अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार खर्च कर पा रही हैं।

उनके अनुसार, महतारी वंदन योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के साथ यह आत्मविश्वास भी दिया है कि वे परिवार की खुशियों और महत्वपूर्ण अवसरों में अपना योगदान दे सकती हैं।

*राखी के धागे में स्नेह के साथ आभार भी*

कुसुम शुक्ला ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्षाबंधन से पहले योजना की राशि मिलना बहनों के लिए खुशी की बात है। उन्होंने कहा, “राखी बांधने से पहले पैसा मिल गया है। इससे राखी और मिठाई लेने में मदद मिलेगी। मैं बहुत खुश हूं। दीदी-बहनों की तरफ से विष्णु भैया को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं।”

कुसुम के लिए इस बार रक्षाबंधन की खुशी में एक खास भाव जुड़ा है। भाई की कलाई पर राखी बांधने की तैयारी के साथ महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल भी उनके उत्साह को बढ़ा रहा है। समय पर मिली राशि ने उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार त्योहार की खरीदारी करने का अवसर दिया है।

महतारी वंदन योजना की नियमित सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सहारे के साथ आत्मविश्वास और सम्मान का आधार भी बन रही है। कुसुम शुक्ला की कहानी इसी बदलाव की तस्वीर है, जहां राखी के धागे में भाई-बहन के प्रेम के साथ विष्णु भैया के प्रति विश्वास और आभार का भाव भी जुड़ गया है।

*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार में जरूरतमंदों के पक्के घर का सपना हो रहा साकार*

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*मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार में जरूरतमंदों के पक्के घर का सपना हो रहा साकार*

*प्रधानमंत्री आवास योजना ने दूरपति राठिया को दिया सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना*

*कच्चे मकान में बारिश, नमी और जहरीले जीव-जंतुओं का रहता था डर, अब पक्के घर में सुकून से बीत रहा जीवन*

*मेहनत-मजदूरी कर जीवन चलाने वाली एकल महिला के लिए पक्का आवास बना सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता का आधार*

 आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर,/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार जरूरतमंद परिवारों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अपने घर के सपने को साकार करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह योजना गरीब परिवारों के लिए केवल पक्की छत उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व लेकर आ रही है।

रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत महलोई की निवासी दूरपति राठिया के जीवन में भी प्रधानमंत्री आवास योजना ने ऐसा ही सकारात्मक बदलाव लाया है। विधवा एवं एकल महिला दूरपति मेहनत-मजदूरी कर अपना जीवन-यापन करती हैं। सीमित आमदनी में रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना ही उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। ऐसे में अपने संसाधनों से पक्का मकान बनाना उनके लिए संभव नहीं था।

दूरपति लंबे समय तक मिट्टी के कच्चे मकान में रहती थीं। बरसात का मौसम उनके लिए परेशानी और चिंता लेकर आता था। बारिश के दौरान छत से पानी टपकता, घर के भीतर नमी और गंदगी फैल जाती तथा कच्ची दीवारों के कमजोर होने से मकान गिरने का खतरा बना रहता था। इसके साथ ही जहरीले जीव-जंतुओं के घर में प्रवेश की आशंका भी बनी रहती थी। ऐसे कठिन हालात के बीच सुरक्षित छत का सपना उनके लिए दूर की बात लगती थी।

मेहनत-मजदूरी के सहारे जीवन आगे बढ़ाते हुए दूरपति को उम्मीद थी कि एक दिन उन्हें भी पक्का घर मिल सकेगा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) उनके इस सपने को पूरा करने का माध्यम बनी। योजना के अंतर्गत उनका आवास स्वीकृत हुआ और शासन से प्राप्त सहायता राशि से पक्के मकान का निर्माण संभव हो सका। वर्षों से देखा जा रहा उनका सपना आखिरकार साकार हुआ।

*अब बारिश में नहीं सताती चिंता*

आज दूरपति अपने पक्के प्रधानमंत्री आवास में सुरक्षित और सम्मान के साथ जीवन-यापन कर रही हैं। जिस बारिश के मौसम में पहले उन्हें छत टपकने और कच्ची दीवारों के कमजोर होने की चिंता रहती थी, अब उसी मौसम में वह अपने सुरक्षित घर में निश्चिंत रहती हैं। जहरीले जीव-जंतुओं और मकान के क्षतिग्रस्त होने का डर भी काफी हद तक दूर हो गया है।

पक्का आवास मिलने से दूरपति के जीवन में केवल भौतिक बदलाव ही नहीं आया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और मनोबल में भी वृद्धि हुई है। उनके लिए यह घर सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान और सुकून का प्रतीक बन गया है। नए घर के सामने खड़ी दूरपति के चेहरे की खुशी इस बदलाव की सबसे सुंदर तस्वीर प्रस्तुत करती है।

दूरपति राठिया ने पक्का आवास मिलने पर शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने पक्के घर में रहना उनके लिए बेहद खुशी और सुकून का अनुभव है। उन्होंने बताया कि पहले बारिश के दिनों में घर को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित छत का सहारा मिल गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ऐसे हजारों जरूरतमंद परिवारों को उनके सपनों का पक्का घर मिल रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाएं समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े परिवारों तक पहुंचकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। दूरपति राठिया की कहानी इसी विश्वास को मजबूत करती है कि सरकार की संवेदनशील पहल जब जरूरतमंद तक पहुंचती है, तो वर्षों का सपना भी सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाने में बदल जाता है।

*बिहान से बहनों को मिला आर्थिक संबल, खीरे की खेती से सुभद्रा मंडल ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी*

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*बिहान से बहनों को मिला आर्थिक संबल, खीरे की खेती से सुभद्रा मंडल ने लिखी आत्मनिर्भरता की नई कहानी*

*“बहनों की खुशहाली एवं आत्मनिर्भरता का उपहार, विष्णु भैया की सरकार।”*

*काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़कर सुभद्रा ने लिया 1 लाख रुपए का ऋण, एक एकड़ में खीरे की खेती से बढ़ी आमदनी की उम्मीद*

 आशीष कश्यप प्रधान संपादक रायपुर, / ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाने में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को समूह के माध्यम से ऋण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध हो रहा है, जिसका उपयोग वे कृषि, पशुपालन, मछली पालन, सब्जी उत्पादन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

इसी बदलाव की प्रेरक कहानी है अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत सकालो की रहने वाली श्रीमती सुभद्रा मंडल की। काली माँ स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद सुभद्रा ने समूह के माध्यम से 1 लाख रुपए का ऋण लिया और इस राशि का उपयोग कर एक एकड़ भूमि में खीरे की खेती शुरू की। खेती के इस प्रयास के साथ उन्होंने अपनी आय बढ़ाने और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

*पूंजी की कमी बनी थी खेती के विस्तार में बाधा*

सुभद्रा मंडल बताती हैं कि पहले आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण वे खेती-बाड़ी को बड़े स्तर पर नहीं कर पाती थीं। परिवार की आमदनी सीमित थी और रोजमर्रा की आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद खेती में निवेश के लिए पर्याप्त पूंजी उपलब्ध नहीं हो पाती थी।

वे बताती हैं कि खेती को आय के अतिरिक्त और स्थायी साधन के रूप में विकसित करने की इच्छा थी, लेकिन पूंजी के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे समय में बिहान से जुड़ना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आया।

*बिहान से मिला आर्थिक सहयोग, खेती को मिला विस्तार*

सुभद्रा ने बताया कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी आर्थिक गतिविधि को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। समूह के माध्यम से ऋण सुविधा प्राप्त होने पर उन्होंने कृषि को आजीविका का साधन बनाने का निर्णय लिया और एक एकड़ में खीरे की खेती शुरू की।

वे कहती हैं कि ऋण ने उन्हें केवल खेती शुरू करने के लिए पूंजी ही उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि अपने दम पर कुछ करने का आत्मविश्वास भी दिया। अब वे अपनी मेहनत से उत्पादन बढ़ाकर परिवार की आय में योगदान देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

*खेती से आय बढ़ाने और ‘लखपति दीदी’ बनने का लक्ष्य*

सुभद्रा मंडल का कहना है कि खीरे की खेती से प्राप्त होने वाली आमदनी से परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। साथ ही भविष्य में खेती से होने वाले लाभ को दोबारा आजीविका गतिविधियों में निवेश कर आय के स्थायी साधन को और मजबूत करने की योजना है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य अपनी मेहनत और निरंतर प्रयासों से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनना तथा ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ना है। उनके लिए खेती अब केवल पारंपरिक कार्य नहीं, बल्कि परिवार की आय बढ़ाने और बेहतर भविष्य तैयार करने का माध्यम बन गई है।

*विष्णु भैया के प्रति जताया आभार*

सुभद्रा मंडल ने बिहान योजना से जोड़ने और आजीविका गतिविधि शुरू करने के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराने पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक गतिविधि शुरू करने और अपनी मेहनत को आय के अवसर में बदलने का रास्ता मिला है। उन्होंने कहा कि समूह के माध्यम से मिला आर्थिक सहयोग उनके लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण आधार बना है। अब वे खेती के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।

*महिलाओं की मेहनत को मिल रहा संस्थागत सहयोग*

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक सहयोग और ऋण की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महिलाएं इन संसाधनों का उपयोग स्थानीय परिस्थितियों और अपनी रुचि के अनुरूप आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं।

सुभद्रा मंडल की कहानी इसी बदलाव का उदाहरण है, जहां स्व-सहायता समूह, संस्थागत ऋण और महिला की मेहनत ने मिलकर आत्मनिर्भरता की नई राह तैयार की है। एक एकड़ में शुरू हुई खीरे की खेती अब उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आय और बेहतर भविष्य की उम्मीद बन गई है।