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    *अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पचरी में दो अद्भुत पत्थरों से निर्मित अर्धनागेश्वर शिवलिंग बना आस्था का केंद्र* 

    *अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पचरी में दो अद्भुत पत्थरों से निर्मित अर्धनागेश्वर शिवलिंग बना आस्था का केंद्र* 

     *प्राकृतिक स्वरूप देख श्रद्धालु हो जाते हैं अभिभूत* 

     मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा। अकलतरा विकासखंड के ग्राम पचरी में स्थित अर्धनागेश्वर शिवलिंग अपनी अनूठी बनावट और धार्मिक महत्ता के कारण शिव भक्तों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। इस शिवलिंग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह प्राकृतिक रूप से दो अलग-अलग किस्म के पत्थरों से जुड़ा हुआ है, जो इसे अन्य शिवलिंगों से अलग और अद्वितीय बनाता है।

    यह अर्धनागेश्वर शिवलिंग ग्राम के तालाब किनारे स्थित महामाया मंदिर के समीप स्थापित है। इसका निर्माण स्वर्गीय मनराखन शर्मा की स्मृति में उनके परिवार द्वारा कराया गया, जिससे यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारिवारिक श्रद्धांजलि का भी प्रतीक बन गया है।

    शिवलिंग का प्राकृतिक स्वरूप लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि दो अलग-अलग प्रकार के पत्थरों का बिना किसी कृत्रिम जोड़ के एकाकार होना भगवान शिव की अद्भुत महिमा और प्रकृति के चमत्कार का प्रतीक है। सावन माह, महाशिवरात्रि तथा अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां भगवान शिव की पूजा कर श्रद्धालु कृतार्थ हो सकते है।

    ग्राम के प्रतिष्ठित नागरिक राजा शर्मा ने बताया कि पचरी गांव का महामाया मंदिर और शिव मंदिर वर्षों पुरानी धार्मिक आस्था के केंद्र हैं। उन्होंने मंदिर के इतिहास, स्थापना और गांव की धार्मिक परंपराओं की जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह स्थल केवल पूजा-अर्चना का केंद्र ही नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान भी बन रही है। उन्होंने लोगों से इस धार्मिक धरोहर के संरक्षण एवं इसकी महत्ता को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी आह्वान किया।

    ग्रामवासियों का कहना है कि अर्धनागेश्वर शिवलिंग की ख्याति धीरे-धीरे आसपास के क्षेत्रों में भी फैलने की संभावना बन रही है। यदि इस धार्मिक स्थल का समुचित विकास और प्रचार-प्रसार किया जाए, तो यह क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में अपनी विशेष पहचान बना सकता है।

    प्राकृतिक अद्भुत स्वरूप, धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक महत्व का अनूठा संगम समेटे ग्राम पचरी का अर्धनागेश्वर शिवलिंग आज श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत प्रतीक बनकर श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

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