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    *तहसील कार्यालय के समीप पंजीयन कार्यालय के सामने जलभराव, जिम्मेदारों की उदासीनता से नागरिक परेशान*

    तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली—मानसून की औपचारिक शुरुआत से पहले ही जिला मुख्यालय स्थित तहसील कार्यालय एवं पंजीयन कार्यालय परिसर के आसपास जलभराव की गंभीर समस्या सामने आने लगी है। हल्की बारिश के बाद ही कार्यालय के मुख्य मार्ग और आसपास के क्षेत्र में पानी जमा हो जाने से आम नागरिकों, अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों तथा विभिन्न कार्यों से कार्यालय पहुंचने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या ने प्रशासनिक व्यवस्था और नगर की जल निकासी व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
    स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तो मानसून पूरी तरह सक्रिय भी नहीं हुआ है, इसके बावजूद कार्यालय परिसर के समीप पानी भर जाने की स्थिति बन गई है। ऐसे में यदि लगातार और तेज बारिश हुई तो हालात कितने गंभीर हो सकते हैं, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। नागरिकों का आरोप है कि हर वर्ष बरसात के दौरान इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन इसके स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जाती। तहसील और पंजीयन कार्यालय जिले के महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों में शामिल हैं, जहां प्रतिदिन सैकड़ों लोग भूमि संबंधी कार्य, नामांतरण, सीमांकन, रजिस्ट्री तथा अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। जलभराव के कारण लोगों को कीचड़ और गंदे पानी से होकर कार्यालय तक पहुंचना पड़ रहा है। कई बार बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि कार्यालय आने-जाने के दौरान फिसलने और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
    स्थानीय नागरिकों ने बताया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने तथा नालियों की नियमित सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक जमा रहता है। पानी निकासी के अभाव में सड़कें तालाब जैसी दिखाई देने लगती हैं, जिससे आवागमन बाधित होता है। लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार विभागों द्वारा समय रहते नालियों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, जिसके चलते यह स्थिति निर्मित हुई है। जलभराव केवल आवागमन की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है। लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की संभावना रहती है, जिससे डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा बदबू और गंदगी के कारण आसपास का वातावरण भी दूषित हो रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो बरसात के दौरान स्थिति और भयावह हो सकती है।
    नागरिकों ने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि मानसून के पूर्ण रूप से सक्रिय होने से पहले जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए, नालियों की सफाई कराई जाए तथा स्थायी समाधान के लिए आवश्यक निर्माण कार्य कराए जाएं। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक कार्यालयों के सामने ही यदि इस प्रकार की स्थिति बनी रहेगी तो आम जनता को होने वाली परेशानियों का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
    फिलहाल क्षेत्रवासियों और कार्यालय आने वाले लोगों की नजरें प्रशासन की ओर टिकी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और बरसात के पहले इसके निराकरण के लिए क्या कदम उठाते हैं। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि लोगों को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी समस्याओं की पुनरावृत्ति न हो।

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