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    *शासकीय महाविद्यालय लोरमी मे मनाया छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस*

    शासकीय महाविद्यालय लोरमी मे मनाया छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस


    लोरमी,,,,,,,,
    राजीव गांधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय लोरमी मे 28 नवंबर को छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के उपलक्ष्य में हिन्दी विभाग के द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस संदर्भ में डॉ नरेंद्र सलूजा ने बताया कि कार्यक्रम के आरम्भ में तुलसी,भानुप्रिया,पूर्णिमा जायसवाल के द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत भाषण प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रगान एवं राजकीय गीत के पश्चात स्वागत भाषण में कार्यक्रम के संयोजक एवं हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ एच एस राज ने कहा कि छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस प्रतिवर्ष 28 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिन 2007 के उस दिन की स्मृति में मनाया जाता है जब छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ी को राज्य भाषा का दर्जा दिया था। राजभाषा आयोग का गठन भी इसी उद्देश्यपूर्ति हेतु हुआ था कि छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल किया जा सके ।उद्बोधन की कड़ी में डॉ एस के जांगड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा का इतिहास अर्धमागधी अपभ्रंश से शुरू होता है, जिससे नवीं-दसवीं शताब्दी में पूर्वी हिंदी की अन्य बोलियों (अवधी, बघेली) के साथ इसका उद्भव हुआ। प्राचीन काल में यह क्षेत्र दक्षिण कोसल के नाम से जाना जाता था और भाषा को कोसली कहा जाता था। आधुनिक काल में, छत्तीसगढ़ के क्षेत्र के लिए “छत्तीसगढ़” शब्द के प्रयोग के बाद इसका नाम बदलकर छत्तीसगढ़ी हो गया। पी पी लाठिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में बोली जाने वाली भाषा है। यह हिन्दी के अत्यन्त निकट है और इसकी लिपि देवनागरी है। छत्तीसगढ़ी का अपना समृद्ध साहित्य व व्याकरण है। डॉ आर एस साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ का अधिकतर जीवन छत्तीसगढ़ी के सहारे गतिमान है।एक दूसरे के दिल को छू लेने वाली यह छत्तीसगढ़ी एक तरह से छत्तीसगढ़ राज्य की संपर्क भाषा है। मुख्य अतिथि एवं प्राचार्य डॉ एन के ध्रुवे ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की सांस्कृतिक पहचान, संपर्क और शिक्षा के लिए है। यह राज्य की संपर्क भाषा है, जो 2 करोड़ लोगों की मातृभाषा है और इसके माध्यम से सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने वाले लोकगीत, साहित्य और मुहावरे जीवित रहते हैं। इस भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग का गठन किया गया है। इसके पश्चात पूर्णिमा जायसवाल,अवधेश, प्रियंका,कविता ,रजनी हरीश अंजली,प्रशांत, दिलीप आदि विद्यार्थियों के द्वारा गीत,भाषण,कहानी,कविता,आदि प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रो अमित केवट एवं पूर्णिमा जायसवाल ने किया । इस दौरान महाविद्यालय प्रो.निधि सिंह, डॉ.अर्चना भास्कर, प्रो.नितेश गढ़ेवाल, प्रो.विवेक साहू, प्रो.महेन्द्र पात्रे, प्रो.हेमा टंडन, प्रो. देवेंद्र जायसवाल, आर.के.श्रीवास्तव, एन.आर.जायसवाल, पुर्नेश जायसवाल, गंगाराम जायसवाल, श्रीमती सुषमा उपाध्याय, डॉ.गंगा गुप्ता, प्रो.अमित निषाद, प्रो.मनीष कश्यप प्रो.श्रेया श्रीवास्तव, प्रो.सुषमा डहरिया, प्रो.गुरुदेव निषाद, प्रतापभानु शर्मा, भागबली जायसवाल, अविनाश साहू सोनू यादव, मुकेश यादव, उमाशंकर राजपूत, जितेन्द्र दूबे, नरेन्द्र ध्रुव, भारत ध्रुव, सुबुद्धि यादव आदि उपस्थित थे।

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