*बनाहिल में गहराया पेयजल संकट: “अंधेर नगरी चौपट राजा” की कहावत हो रही चरितार्थ*
*जिम्मेदार अधिकारी कलेक्टर को कर रहे मिसगाइड*

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा (अकलतरा क्षेत्र)। जिले के अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बनाहिल में पिछले दो महीनों से पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। हालात इतने विकट हो चुके हैं कि ग्रामीणों को दैनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकता—पीने का पानी—जुटाने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि जिला कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे। इसके बावजूद जिम्मेदार अमला समस्या के स्थायी समाधान की बजाय औपचारिकताएं पूरी कर वाहवाही लूटने में लगा हुआ है। “ऊंट के मुंह में जीरा” जैसी अल्पकालिक व्यवस्था कर प्रशासन की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी गई, जबकि हकीकत में स्थिति जस की तस बनी हुई है।
सबसे ज्यादा प्रभावित मोहल्ला, बढ़ता संकट
ग्राम पंचायत के जिस मोहल्ले में पानी की सबसे अधिक किल्लत है, वहां बीते 4-5 दिनों में हालात और बिगड़ गए हैं। नलों में पानी नहीं आने से ग्रामीणों को दूर-दराज के स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे घंटों पानी के इंतजार में समय बर्बाद कर रहे हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि बोर का केबल काट कर ले गए है लेकिन इसका ये मतलब तो नहीं कि समस्या को जस के तस छोड़ दिया जाए। पानी की समस्या को ग्राम प्रधान के द्वारा गंभीरता से लेते हुए तत्काल दूसरे विकल्प से समाधान करना चाहिए।
नहर बना मजबूरी का सहारा, बढ़ा खतरा
पानी की किल्लत के चलते ग्रामीण अपने बच्चों को नहर में नहलाने ले जाने को मजबूर हैं। यह स्थिति कितनी खतरनाक हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दिनों पूर्व एक 7 वर्षीय मासूम की नहर में डूबने से मौत हो गई थी। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।
जनप्रतिनिधियों और पंचायत की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, कुछ सप्ताह पहले जब स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने ग्राम प्रधान से इस गंभीर समस्या पर चर्चा करनी चाही, तो उन्होंने कागजी कार्रवाई दिखाकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। हालांकि बीच में कुछ समय के लिए समस्या समाधान के प्रयास दिखाई दिए, लेकिन पिछले पांच दिनों से प्रभावित मोहल्ले में कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
ग्राम प्रधान के इस उदासीन रवैए से ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। लोग इसे “अंधेर नगरी चौपट राजा” की स्थिति बताते हुए व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
प्रशासन के दावों पर उठे सवाल
एक ओर जिला प्रशासन समस्या के समाधान के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत उन दावों की पोल खोल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
अब नजरें प्रशासन पर
ग्राम बनाहिल के ग्रामीण अब जिला प्रशासन से ठोस और स्थायी समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को किस हद तक प्राथमिकता देता है और कब तक गांववासियों को इस जल संकट से राहत मिल पाती है।
