More

    *पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप, अकलतरा थाना में पदस्थ रश्मि की भूमिका चर्चा में* 

    *पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप, अकलतरा थाना में पदस्थ रश्मि की भूमिका चर्चा में* 

     *पुलिस की छवि पर उठे सवाल, विभागीय जांच की मांग तेज* 

     मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा:- जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र में पुलिस वेरिफिकेशन प्रक्रिया को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आने से पुलिस महकमे में चर्चा का माहौल बन गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, थाना परिसर और उसके आसपास पुलिस वेरिफिकेशन के नाम पर कथित रूप से अतिरिक्त राशि वसूले जाने तथा आवेदकों के साथ अनुचित व्यवहार किए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में जिला पुलिस द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने तथा उद्योगों, किराएदारों एवं बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करना है। लेकिन इसी व्यवस्था के बीच कुछ शिकायतें सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

    सूत्रों का दावा है कि अकलतरा थाना के सामने संचालित एक कंप्यूटर केंद्र के माध्यम से पुलिस वेरिफिकेशन का कार्य दो दिनों के भीतर पूरा कराने के नाम पर लगभग 600 रुपये तक लिए जाने की चर्चा है। वहीं एक आवेदक सुनील ने आरोप लगाया है कि थाना में पदस्थ महिला आरक्षक रश्मि द्वारा 100 रुपये लेने के बावजूद उसका कार्य समय पर नहीं किया गया तथा उससे कथित रूप से कहा गया कि “मेरे पास समय नहीं है, समय मिलेगा तो बनाऊंगी।”

    हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और न ही संबंधित महिला आरक्षक अथवा पुलिस विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

    गौरतलब है कि हाल ही में क्षेत्र में घटित एक संवेदनशील मामले के बाद जिला पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से व्यापक सत्यापन अभियान प्रारंभ किया है। ऐसे समय में यदि पुलिस वेरिफिकेशन जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध वसूली की शिकायतें सामने आती हैं, तो इससे आमजन का भरोसा प्रभावित हो सकता है।

    इधर स्थानीय लोगों का कहना है कि अकलतरा थाना प्रभारी भास्कर शर्मा लगातार क्षेत्र में सामाजिक समन्वय, जनसंवाद और सामुदायिक पुलिसिंग के माध्यम से सकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी या व्यवस्था से संबंधित शिकायतें सत्य पाई जाती हैं तो इससे पुलिस की छवि को नुकसान पहुंच सकता है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है। यदि आरोपों में सत्यता पाई जाती है तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं यदि शिकायतें निराधार साबित होती हैं तो भी स्थिति स्पष्ट होने से आमजन के बीच फैली शंकाओं का समाधान हो सकेगा।

    फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग विभागीय जांच एवं आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं।

    Trending News

    Technology