*धान नहीं बिकने और भारतमाला मुआवजा नहीं मिलने से आहत किसान ने किया आत्महत्या का प्रयास*

*धान नहीं बिकने और भारतमाला मुआवजा नहीं मिलने से आहत किसान ने किया आत्महत्या का प्रयास*


मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम सांकर के एक किसान ने धान नहीं बिकने और भारतमाला परियोजना का मुआवजा नहीं मिलने से आहत होकर ज़हर पीकर आत्महत्या का प्रयास किया। आत्मघाती कदम उठाने से पहले किसान ने करीब चार मिनट का एक वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने किसान को देर रात बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं जिला प्रशासन का कहना है कि आत्महत्या के प्रयास का कारण धान का टोकन नहीं कटना नहीं, बल्कि भारतमाला परियोजना का मुआवजा नहीं मिलना है। प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि किसान का धान टोकन कट चुका है।

जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा ब्लॉक के ग्राम सांकर निवासी किसान अनुराग सिंह चंदेल ने आत्महत्या का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि किसान बीते एक महीने से धान बेचने के लिए लगातार चक्कर काट रहा था, लेकिन उसे लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, जिससे वह मानसिक तनाव में था।
आत्महत्या का प्रयास करने से पहले किसान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया, जिसमें उसने धान की बिक्री नहीं होने और भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित की गई उसकी जमीन का मुआवजा अब तक नहीं मिलने की बात कही। वीडियो में किसान ने आर्थिक तंगी और बढ़ते कर्ज का भी ज़िक्र किया।
जानकारी के अनुसार किसान पर भारी कर्ज था। पूर्व में भी उसका धान नहीं बिक पाया था और जमीन बेचने के बावजूद वह कर्ज चुकाने में असमर्थ था। इन्हीं परिस्थितियों से टूटकर किसान ने कीटनाशक दवा का सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है।

धान नहीं बिकने और चार वर्षों से भारतमाला परियोजना का मुआवजा नहीं मिलने के मामले में कलेक्टर ने कहा है कि किसान का धान टोकन कट चुका है। पुलिस द्वारा किसान का बयान भी लिया गया है, जिसमें मुआवजा नहीं मिलने को प्रमुख कारण बताया गया है।
कलेक्टर ने कहा कि किसान की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है और इलाज की समुचित व्यवस्था की जा रही है।

जांजगीर-चांपा जिले में धान खरीदी की धीमी प्रक्रिया को लेकर बुधवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम कार्यालय का घेराव किया था। इस दौरान शासन-प्रशासन से बचे किसानों का टोकन काटने, खरीदी सीमा बढ़ाने और धान खरीदी की तिथि बढ़ाने की मांग की गई थी।
अब किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा किसानों से किए गए वादे सवालों के घेरे में आते नजर आ रहे हैं।

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