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    *दमोह में अभूतपूर्व भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ मना भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव*

    *दमोह में अभूतपूर्व भक्ति, श्रद्धा और उल्लास के साथ मना भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव*

    देवेश खरे संवाददाता जिला दमोह…..

    दमोह – भगवान महावीर स्वामी के पावन जन्मकल्याणक महोत्सव पर दमोह नगर पूर्णतः धर्ममय वातावरण में सराबोर हो उठा। श्री दिगम्बर जैन पंचायत दमोह के नेतृत्व में एवं जैन मिलन नगर प्रमुख शाखा दमोह के संयोजन में यह भव्य आयोजन पूज्य मुनि श्री पद्म सागर जी महाराज ससंघ, गणनी आर्यिका सौम्यनंदनी माता जी ससंघ एवं आर्यिका श्री साधू मति माता जी ससंघ के सानिध्य में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ।
    प्रातःकाल सिटी नल से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नसिया जी मंदिर पहुंची, जहां 32 इंद्रों के माध्यम से भगवान श्री जी का भव्य मस्तकाभिषेक संपन्न हुआ। अभिषेक उपरांत शोभायात्रा पुनः पलंदी मंदिर होते हुए सिटी नल पहुंचकर संपन्न हुई। इसके पश्चात सिंघई मंदिर में भगवान का पुनः अभिषेक संपन्न किया गया।
    शोभायात्रा में विभिन्न मंदिरों की पाठशालाओं, महिला मंडलों एवं बालिका मंडलों द्वारा अनुशासित एवं आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। दिव्य घोष, भक्ति गीत एवं एकरूप वेशभूषा में किए गए प्रदर्शन ने सभी का मन मोह लिया। सुंदर एवं जीवंत झांकियों में भगवान महावीर के जीवन प्रसंगों का मनोहारी चित्रण किया गया। सुधा सागर व्यायामशाला द्वारा शस्त्र प्रदर्शन एवं गौशाला की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
    इस अवसर पर क्षुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी महाराज ने अपने ओजस्वी प्रवचन में कहा कि तीर्थंकर भगवान का जन्म समस्त जीवों के कल्याण हेतु होता है और यह उनका अंतिम जन्म होता है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर का “जियो और जीने दो” का सिद्धांत आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक है। यदि हम उनके जीवन आदर्शों को अपनाएं, तो समाज में शांति, अहिंसा और सद्भाव स्थापित हो सकता है।
    आर्यिका श्री साधू मति माता जी ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि गुरु आज्ञा का पालन ही सच्ची साधना है। समय के साथ चलते हुए धर्म के मार्ग पर दृढ़ रहना ही आत्मकल्याण का पथ है। उन्होंने भगवान महावीर के पंच नामों का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए उन्हें जीवन में उतारने का संदेश दिया।
    गणनी आर्यिका सौम्यनंदनी माता जी ने अपने मंगल उद्बोधन में कहा कि धर्ममार्ग पर किया गया प्रत्येक छोटा प्रयास भी महान फलदायी होता है। शोभायात्रा में श्रद्धा से उठाया गया एक-एक कदम पापों के क्षय का कारण बनता है, वहीं देव-शास्त्र-गुरु के सानिध्य में पूरी यात्रा करने से अनंतानंत कर्मों का क्षय होता है।
    कार्यक्रम के दौरान समाज सेवा में निरंतर सक्रिय एवं साधु-संतों की सेवा में समर्पित चिकित्सकों—डॉ. स्वदेश जैन, डॉ. गौरव नायक, डॉ. सौरभ चौधरी, डॉ. अभय जैन एवं आनंद जैन पैथोलॉजी सहित फिजियोथेरेपी सेवाएं देने वाले चिकित्सकों का श्री दिगम्बर जैन पंचायत दमोह द्वारा सम्मान किया गया।
    सांध्यकाल में पारस पैलेस में महिला मंडलों एवं पाठशालाओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
    सम्पूर्ण आयोजन में समाज के सभी वर्गों—पुरुष, महिलाएं, युवक-युवतियां एवं बच्चों—की उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। पूरा नगर भक्ति, उल्लास एवं धार्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।
    इस भव्य आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ किया, बल्कि समाज में एकता, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का उत्कृष्ट संदेश भी दिया।

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