*कलेक्टर ने राजस्व न्यायालयों में प्रकरणों के त्वरित एवं पारदर्शी निराकरण के दिए निर्देश*
*समयबद्ध सुनवाई, अतिक्रमण मामलों में विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने किया निर्देशित*

मुकेश साहू ब्यूरो मुंगेली,// छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में संशोधन के उपरांत राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने जिले के समस्त राजस्व न्यायालयों तथा प्रथम अपीलीय न्यायालय के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य राजस्व प्रकरणों का गुणवत्तापूर्ण, निष्पक्ष एवं विधिसम्मत निराकरण सुनिश्चित करना है। कलेक्टर ने निर्देशित किया है कि सभी राजस्व प्रकरणों में तथ्यों एवं साक्ष्यों के समुचित परीक्षण के बाद स्पष्ट एवं कारणयुक्त आदेश पारित किए जाएं। सभी पक्षकारों को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए तथा प्रस्तुत आपत्तियों एवं आवेदनों का नियमानुसार निराकरण करने के बाद ही अंतिम आदेश जारी किए जाएं।
जारी निर्देशों के अनुसार गैर-भरणीय (नॉन-मेंटेनेबल) प्रकरणों को प्रथम सुनवाई में ही निरस्त किया जाए, लंबित मामलों की नियमित सुनवाई कर शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा वरिष्ठ न्यायालयों द्वारा मांगे गए प्रतिवेदन एवं अभिलेख निर्धारित समय-सीमा में उपलब्ध कराए जाएं। कलेक्टर ने सीमांकन, फौती, बंटवारा, अतिक्रमण एवं नक्शा सुधार जैसे मामलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सीमांकन प्रकरणों में विधिवत आदेश पारित कर राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी के माध्यम से क्षेत्र-पत्रिका और नक्शा तैयार कराया जाए। बंटवारा प्रकरणों में सभी पक्षकारों की सुनवाई, चिन्हांकित एवं विभाजित नक्शा तैयार कर अभिलेखों में संलग्न करना अनिवार्य किया गया है। अतिक्रमण प्रकरणों में पटवारी से आवश्यक प्रतिवेदन प्राप्त कर भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुसार बेदखली की कार्यवाही सुनिश्चित करने तथा नक्शा सुधार के मामलों में वर्तमान एवं प्रस्तावित नक्शे ट्रेसिंग क्लॉथ पर तैयार कर प्रभावित पक्षों को सुनवाई का अवसर देने के निर्देश दिए गए हैं।
