उमरिया दादर में निर्माण कार्यों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप! इंजीनियर को 5%, सरपंच को 4% कमीशन देने के दावे सरपंच पति ( शिक्षक) के बयान से मचा हड़कंप!

उमरिया दादर में निर्माण कार्यों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप! इंजीनियर को 5%, सरपंच को 4% कमीशन देने के दावे सरपंच पति ( शिक्षक) के बयान से मचा हड़कंप!

आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की बाउंड्रीवॉल पर उठे सवाल, सरपंच पति के कथित खुलासे के बाद निष्पक्ष जांच की मांग तेज!

बिलासपुर | कोटा। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया दादर में आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की निर्माणाधीन बाउंड्रीवॉल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बच्चों के भविष्य और सुरक्षा से जुड़े इन निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं, निर्माण की गुणवत्ता और कमीशन के लेन-देन को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है।

मामले में सरपंच पति के कथित खुलासे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकारी निर्माण कार्यों में कमीशनखोरी का खेल चल रहा है? यदि आरोपों में सच्चाई है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी और अब तक संबंधित अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की है?

 

🔥 इंजीनियर को 5% और सरपंच को 4% कमीशन देने का दावा, जांच से सामने आएगा सच!

मामले में सामने आए दावे के अनुसार, निर्माण कार्यों में इंजीनियर को 5 प्रतिशत और सरपंच को 4 प्रतिशत कमीशन दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में यह जरूरी है कि संबंधित विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाए।

यदि कमीशन के लेन-देन से जुड़े आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसे कितना पैसा दिया गया और क्या इन दावों के समर्थन में कोई दस्तावेज या अन्य प्रमाण मौजूद हैं?

⚠️ बच्चों के भविष्य से जुड़ा मामला, निर्माण की गुणवत्ता की जांच जरूरी!

ग्राम पंचायत उमरिया दादर में बन रहे आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की बाउंड्रीवॉल का संबंध सीधे बच्चों की सुविधाओं और सुरक्षा से है। ऐसे महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों में यदि घटिया सामग्री का इस्तेमाल या निर्धारित मानकों की अनदेखी हुई है, तो इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

निर्माण कार्यों में उपयोग की गई सामग्री, स्वीकृत राशि, भुगतान के विवरण और तकनीकी गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो सके।

🔴 अभी और भी खुलासे होने का दावा, क्या उच्च अधिकारी करेंगे जांच?

इस मामले में आगे भी नए खुलासे होने की बात कही जा रही है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा, लेकिन गंभीर आरोप सामने आने के बाद उनकी निष्पक्ष जांच कराना भी जरूरी है।

यदि स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच नहीं होती है या शिकायतों पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो उपलब्ध दस्तावेजों और प्रमाणों के साथ मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाकर जांच की मांग की जानी चाहिए।

📢 प्रशासन से प्रमुख मांगें

आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की बाउंड्रीवॉल की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए।

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री की जांच हो।

कमीशन के लेन-देन से जुड़े दावों की प्रमाणों के आधार पर जांच की जाए।

स्वीकृत राशि, भुगतान और निर्माण संबंधी दस्तावेजों की पड़ताल हो।

आरोप सही पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

जांच निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि किसी भी दोषी को संरक्षण न मिले।

❓ जनता पूछती है—आखिर जिम्मेदार कौन?

ग्राम पंचायत उमरिया दादर का यह मामला अब केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं रह गया है। कमीशनखोरी के कथित दावों ने जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएगा? क्या इंजीनियर, पंचायत के जिम्मेदार प्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल होगी? या फिर बच्चों से जुड़े निर्माण कार्यों पर उठे ये सवाल फाइलों में ही दबकर रह जाएंगे?

अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग और उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं। यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो और बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो।

बिलासपुर ब्यूरो चीफ मोहनीश सिंह राजपूत

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