आंगनबाड़ी और हाई स्कूल की बाउंड्री निर्माण की खबर से बौखलाए सरपंच पति (शिक्षक)! रिपोर्टर को ब्लैकमेलिंग में फंसाने की धमकी देने का आरोप
निर्माण कार्यों पर सवाल उठे तो पत्रकार को धमकी क्यों? अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी निगाहें!

बिलासपुर ब्यूरो चीफ़ मोहनीश सिंह राजपूत ,:– मोहिनी से मोहिनी वीडियोउमरिया दादर/कोटा। बिलासपुर जिले के कोटा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उमरिया दादर में आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य को लेकर खबर प्रकाशित होने के बाद विवाद गहराता नजर आ रहा है। आरोप है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर खबर सामने आने से नाराज सरपंच पति, जो पेशे से शिक्षक बताए जा रहे हैं, ने रिपोर्टर को ब्लैकमेलिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी।
इस घटनाक्रम के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या जनहित से जुड़े निर्माण कार्यों पर सवाल उठाना पत्रकारों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है? यदि रिपोर्टर को धमकी दिए जाने का आरोप सही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कौन करेगा?
🔴 बच्चों के भविष्य से जुड़े निर्माण कार्यों पर उठे सवाल
उमरिया दादर में आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की बाउंड्रीवॉल के निर्माण कार्यों को लेकर पहले ही गुणवत्ता संबंधी सवाल उठाए जा चुके हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
🔴 पत्रकार को ब्लैकमेलिंग में फंसाने की धमकी का आरोप
खबर प्रकाशित होने के बाद रिपोर्टर को कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के मामले में फंसाने की धमकी दिए जाने का आरोप गंभीर है। यदि ऐसा हुआ है, तो प्रशासन को मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कदम उठाने चाहिए। किसी भी पक्ष को अपना विरोध दर्ज कराने का अधिकार है, लेकिन धमकी देने के आरोपों की जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए।
🔴 अब प्रशासन से सवाल—कार्रवाई कब?
क्या आंगनबाड़ी भवन और हाई स्कूल की बाउंड्रीवॉल निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच होगी?
क्या रिपोर्टर को धमकी दिए जाने के आरोपों की जांच की जाएगी?
क्या संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या प्रशासन जनहित के मुद्दों पर निष्पक्ष कार्रवाई करेगा?
⚡ बड़ा सवाल: निर्माण कार्यों की जांच होगी या विवाद में उलझ जाएगा मामला?
अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। जरूरत है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच और रिपोर्टर को धमकी दिए जाने के आरोपों की जांच अलग-अलग, निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई हो सके।

