*प्लांट के अधिकारी कुणाल प्रसाद बने मजदूरों के दुश्मन*

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर जिले के अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत नरियरा में संचालित KSK पॉवर प्लांट स्थापना के समय से ही विवादो में रहा है। इस पॉवर प्लांट में शुरू से मजदूरों का भरपूर शोषण होता रहा है।
शोषण के नाम पर KSK पॉवर प्लांट के IR (आईआर) विभाग के अधिकारी कुणाल प्रसाद के द्वारा मजदूरों को आर्थिक रूप से परेशान करने के लिए तारीख पर तारीख देकर कई महीनो तथा कई सालों से काम के नाम पर चक्कर लगवाया जाता है।
गौरतलब है कि पॉवर प्लांट के ऐस हैंडलिंग डिपार्टमेंट में अकलतरा क्षेत्र के समीप लटिया गांव के भूविस्थापित आदिवासी मजदूर रोशन मरावी ठेका कंपनी ग्लोबस इंजीनियर्स में कार्य करता था । कार्य के दौरान आदिवासी मजदूर रोशन मरावी के उंगली में गंभीर चोट लग गया, अच्छे इलाज के लिए उन्होंने छुट्टी ली परंतु जब वह आदिवासी मजदूर पुनः काम पर वापस ज्वाइनिंग के लिए आया तो KSK के अधिकारी कुणाल प्रसाद के द्वारा उन्हें सडयंत्र कर बिना सूचना के टर्मिनेट कर दिया गया । इस मामले की जानकारी जब चाही गई तो कुणाल प्रसाद के द्वारा आदिवासी मजदूर रोशन मरावी को टर्मिनेट करने की वजह समय पर जोइनिग नही करना बताया गया जबकि सच्चाई ये है की कुणाल प्रसाद के द्वारा बहुत सारे कई मजदूरों को इसी प्रकार परेशान कर धीरे धीरे अपनी मानसिकता मजदूरों के प्रति उनका क्रूरता दर्शाता है।
वर्तमान में एक और मामला सामने देखने को मिल रहा है जिसमे ठेका कंपनी पॉवर मेक के मजदूरों को ठेका समाप्ति उपरांत नए ठेका कंपनी एस. आर. टर्बो में विलय कर सभी मजदूरों को काम पर रखने का अनुबंध किया गया परंतु पिछले 15 जनवरी से दो मजदूरों को KSK पॉवर प्लांट के अधिकारी एवं मजदूरों के दुश्मन कुणाल प्रसाद के द्वारा ठेका कंपनी के अधिकारियों के साथ सांठ गांठ कर परेशान किया जा रहा है । कुणाल प्रसाद के द्वारा लगातार उन दोनो मजदूरों आर्थिक रूप से कमजोर कर उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बता दें की KSK पॉवर प्लांट में अभी तक अनगिनत मजदूरों ने आत्महत्या कर लिया है । आगे चलकर यदि प्रबन्धन उन प्रताड़ित मजदूरों को समय पर न्याय अथवा काम पर पुनः नही रखता है तो ये तय है की मजदूर परेशान होकर कोई गलत कदम न उठा ले ।
शासन प्रशासन यदि समय रहते मामले पर संज्ञान लेते है तो कई मजदूर की जिंदगी बर्बाद होने से बच जाएगी।
