
आंनद राठौर ब्यूरो सक्ति:-कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांकेर में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के छात्रों के लिए केजी से लेकर पीजी तक सरकारी संस्थानों में मुफ्त शिक्षा का एलान किया है। इसके साथ ही उन्होंने तेंदूपत्ता उत्पादकों के लिए चार हजार रुपए मानक बोरी तय करने, और लघु वनोपज में न्यूनतम समर्थन मूल्य से दस रुपए अतिरिक्त देने का ऐलान किया। दरअसल कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और भाजपा के साथ अदाणी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार चलाने के दो तरीके होते हैं, या तो आप देश-प्रदेश के अमीर लोगों को फायदा पहुंचाओं, या फिर दूसरा गरीब लोगों को फायदा पहुंचाओं। हमारी सरकार किसानों, गरीब, मजदूरों की मदद करती है, उनकी सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती हैं, लेकिन अंत में वे अदाणी की मदद करते हैं।

*भाषण के 5 महत्वपूर्ण बिंदु:-*
• बस्तर के कोंडागांव में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी हिंदी, अंग्रेजी के अलावा छत्तीसगढ़ी में भी मुफ्त शिक्षा देगी। राहुल गांधी ने इस दौरान बीजेपी नेताओं की ओर इशारा किया जो हिंदी को बढ़ावा देने की वकालत करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नेताओं के ज्यादातर बच्चे अंग्रेजी मीडियम स्कूलों में पढ़ते हैं।
• राहुल गांधी ने ऐलान किया कि जंगलों से आदिवासियों द्वारा एकत्र किए गए तेंदू पत्ते (बीड़ी पत्ते) की बिक्री मूल्य 2,500 रुपये से बढ़कर 4,000 रुपये प्रति मानक बोरा की जाएगी। इसके अलावा कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में सत्ता में बरकरार रहती है तो अन्य लघु वन उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 10 रुपये बढ़ाया जाएगा।
• राहुल गांधी ने जाति सर्वेक्षण के मुद्दे को दोबारा दोहराया। उन्होंने मोदी सरकार पर ओबीसी को गुमराह करने का आरोप लगाया और लगभग 50% आबादी होने के बावजूद बजट और अन्य प्रशासनिक पहलुओं में उनकी कम भागीदारी पर भी केंद्र पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने एक बार फिर ‘आदिवासी’ और ‘वनवासी में अंतर बताया।
• उन्होंने कहा कि बीजेपी आपके साथ अन्याय कर रही है। जाति गणना के बाद पूरे देश को पता चल जाएगा कि ओबीसी की जनसंख्या कितनी है। उन्होंने कहा कि मीडिया वाले सवाल नहीं पूछ सकते। उन्होंने मौजूद मीडिया से कहा कि आप प्रधानमंत्री से सवाल पूछिए कि वह जाति गणना से क्यों डरते हैं?
• किसान की जेब मे पैसा आता है उसका इस्तेमाल वो गांव में करता है, गांव की अर्थव्यवस्था बनती है। अडानी विदेशों में खर्चा करता है, मकान खरीदता है। आपकी जेब मे पैसा आए इसलिए हमने बिजली बिल हाफ किए।
