
आनंद राठौर ब्यूरो सक्ती:-गौरवशाली अष्टभुजी मंदिर जो 1300 वर्षों से भी अधिक पुराना है! जगत जननी माता अष्टभुजी का मंदिर दो विशाल इमली पेड़ के नीचे बना हुआ है।अष्टभुजी (Ashtabhuji) माता का मंदिर और इस नगर के चारों ओर बने आठ विशाल दरवाजों की वजह से शायद इसका प्राचीन नाम अष्टद्वार रहा हो

और धीरे धीरे अपभ्रंश होकर इसका नाम अड़भार हो गया। लगभग 5 किमी. की परिधि में बसा यह नगर कुछ मायने में अपने आप में अजीब है। यहां हर 100 से 200 मीटर में किसी न किसी देवी देवता की मूर्तियां सही सलामत न सही लेकिन खंडित स्थिति में जरूर मिल जाएंगी।

छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल अड़भार (Adbhar) अष्टभुजी एक अति प्रचीन धार्मिक स्थान है। यह तीर्थस्थल आठ हाथों वाली एक देवी को समर्पित है। मंदिर का ज्योति कलश नवरात्रि के दौरान जला रहता है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। अड़भार मंदिर की वास्तुशिल्पीय कलाकृति भी बेहद उत्कृष्ट है। साथ ही यह धार्मिक कृत्य और परंपराओं का मजबूती के साथ निर्वाह कर रहा है। छत्तीसगढ़ के हर हिस्से से अड़भार अष्टभुजी मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस कारण यहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं।

यह केवल सक्ती जिला से मात्र 11 किमी की दूरी पर स्थित है जो कि अड़भार तहसील के अंतर्गत आता है |
छत्तीसगढ़ राज्य में ग्राम अड़भार लगभग 20 साल पहले नगर पंचायत का दरजा पाकर विकास की ओर अग्रसर है |
पहुच मार्ग :-
अष्टभुजी माता का मंदिर दक्षिण मुखी है | ये मंदिर मुंबई हावड़ा रेल मार्ग (Mumbai Howrah rail route) पर शक्ति स्टेशन से दक्षिण पूर्व की ओर 11 किमी की दूरी पर स्थित है और झाराडीह स्टेशन से 7 किमी साथ ही खरसिया रेलवे स्टेशन से 8 किमी कि दुरी पर स्थित है|
यहां नवरात्र पर मां अष्टभुजी के दर्शन के लिए भक्तों का भीड़ उमड़ जाती है। इस बार भी नवरात्रि में जिले के अलावा रायगढ़, बिलासपुर और कोरबा साथ ही अन्य जिले के भक्त भी पहुंच रहे हैं। मंदिर में मां अष्टभुजी की ग्रेनाइट पत्थर की बहुत सूंदर और प्राचीन मूर्ति है। आठ भुजाओं वाली मां दक्षिणमुखी भी है। इस संबंध में नगर के लोगो ने बताया कि पूरे भारत में कलकत्ता की दक्षिणमुखी काली माता और अड़भार (Adbhar Temple) की दक्षिणमुखी अष्टभुजी देवी के अलावा और कहीं की भी देवी दक्षिणमुखी नहीं है।
मंदिर में आस्था के दीप:-
हर साल यहां चैत और चंर में नवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों से भी दर्शनार्थी यहां पहुंचते हैं। भक्त अनेक प्रकार की मन्नतें मांगते है । मन्नतें पूरी होने पर दीप जलवाते हैं।
