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    *जरहागांव में दुकान सील कार्रवाई को लेकर विवाद, व्यापारियों ने किया बंद; CMO ने किराया बकाया को बताया कारण*

    तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली जरहागांव— नगर पंचायत जरहागांव में दुकानों को सील किए जाने की कार्रवाई के बाद व्यापारी और नगर प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं। व्यापारियों ने मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) शुभम बख्तानी पर मनमानी का आरोप लगाते हुए उनके निलंबन की मांग की है। विरोध स्वरूप बाजार की कई दुकानें बंद रहीं तथा व्यापारियों ने अपनी नाराजगी भी जाहिर की।
    व्यापारियों का आरोप है कि नगर पंचायत द्वारा बिना पर्याप्त संवाद और उचित समाधान के दुकानों पर कार्रवाई की गई, जिससे उनके व्यवसाय और आजीविका पर असर पड़ा है। व्यापारियों ने प्रशासन से मामले में पुनर्विचार करने तथा कार्रवाई वापस लेने की मांग की है।
    हालांकि, इस पूरे विवाद पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) शुभम बख्तानी का पक्ष भी सामने आया है। उन्होंने व्यापारियों के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि संबंधित दुकानें पूर्व में ग्राम पंचायत के कार्यकाल से संचालित हो रही हैं तथा अधिकांश दुकानदार लंबे समय से निर्धारित किराया नगर पंचायत को जमा नहीं कर रहे हैं। सीएमओ के अनुसार, बकाया किराया जमा कराने के लिए दुकानदारों को नियमानुसार तीन बार नोटिस जारी किए गए थे। इसके अलावा कई बार मौखिक एवं लिखित रूप से समय पर किराया भुगतान करने की अपील भी की गई थी, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने स्पष्ट किया कि नगर पंचायत की टीम द्वारा पुलिस प्रशासन की उपस्थिति में केवल नियमानुसार किराया वसूली की कार्रवाई की गई है, जिसे गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नगर पंचायत की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत दुकानों का किराया है और इसी राजस्व से संविदा सहित अन्य कर्मचारियों का वेतन भुगतान किया जाता है। सीएमओ ने बताया कि किराया वसूली नहीं होने के कारण नगर पंचायत के कर्मचारियों का वेतन भी प्रभावित हो रहा है। वर्तमान में कर्मचारियों का लगभग दो माह का वेतन लंबित है। साथ ही, संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा भी समय-समय पर बकाया वसूली के निर्देश प्राप्त होते रहे हैं। फिलहाल व्यापारियों और नगर पंचायत प्रशासन के बीच विवाद बना हुआ है। व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने के संकेत दिए हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विवाद का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से किस प्रकार निकलता है।

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