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    *माता परमेश्वरी सेवा खेवा चित जलभराव दर्शन के लिए उमड़ी भीड*

    *जल भराव में साक्षात देती है समाज के कुल देवी माता परमेश्वरी दर्शन*

    *समाज में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है परम्पराए*


    आशीष कश्यप ब्यूरो बिलासपुर// देवांगन समाज की कुलदेवी माता परमेश्वरी की सेवा चिंत का कार्यक्रम
    बिलासपुर स्थित अशोक विहार फेस 02 दुर्गा देवांगन जी के यहां 05 दिवसीय किया जा रहा है। खेवा चित कार्यक्रम के 04वे दिन दोपहर 11 बजे मोहल्ले से निकलकर डबरीपारा तालाब में जल भरण के लिए पहुँची । माता सेवा खेवा कार्यक्रम में समाज के लोगों द्वारा सेवा गीत मादर के थाप, मंजीरा के छीन की धुन के साथ समाज के लोगों ने भजन गाते कारी माई कन्हाई ओ, इंद्रासन के गालियां मा खेलय कारी माई कन्हाई ओ, चिता मनी गुड़ी मा बैठे मोजरा कुँवारा ओ जैसे अनेक गीतों के माध्यम से माता की सेवा गाते बजाते हुए भक्ति भावना में डूबी रही। माता परमेश्वरी बड़की, मंझली और छोटकी के रूप में विराजमान होती है। माता परमेश्वरी के मझली रूप में जो विराजमान रहती है वे जलभराव के लिए सोमवार को निकलती है और बड़की, छोटकी को मंगलवार को जल भरण के लिए निकाली जाती है। यह कार्यक्रम भादो, अगहन, फागुन माह में होती है। तालाब से जलभराई से वापसी घर पहुँचने के बाद माता की प्रसाद के रूप में दूध का वितरण भी किया जाता है। माता के जो घन्ट बोये रहती है वे माँ परमेश्वरी रूप साक्षात विराजमान रहती है। माता सेवा खेवा (चिंत) को देखने के लिए समाज के लोग दूर-दूर से आते है और माता परमेश्वरी की दर्शन कर आशीर्वाद लेते है।
    पुराणिक कथा के अनुसार दीपचंद देवांगन समाज को उपाधि के तौर पर मिला है। एक बार मां परमेश्वरी ने दीपचंद से खुश होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। इसके बाद दीपचंद ने मां परमेश्वरी की सेवा करने के लिए मर्यादा रूपी वस्त्र का निर्माण करने की अनुमति मांगी। मां परमेश्वरी ने उनकी यह इच्छा पूरी करने का वरदान दे दिया ।

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