
मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर-चांपा :-अकलतरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बनाहिल के प्राथमिक स्कूल में स्कूल के सामने बेजा कब्जा कर दुकान संचालन करने वाले को ही स्कूल का अध्यक्ष नियुक्त किए जाने का मामला सामने आया है।
मिली जानकारी अनुसार प्राथमिक शाला बनाहिल के सामने एक व्यक्ति द्वारा बेजा कब्जा किया गया है और एक दुकान बनाकर दुकानदारी की जाती है । ऐसे बेजाकब्जाधारी को स्कूल जनभागीदारी समिति का अध्यक्ष बनाया गया है जिससे गांव में चर्चा है कि जिसने बेजा कब्जा किया है उस पर एक्शन लेने के बजाय उसे ही अध्यक्ष बनाकर सम्मानित किया जा रहा है । यह एक उदाहरण मात्र है । पूरे छत्तीसगढ़ और खासकर जांजगीर जिले में बेजाकब्जाधारियों द्वारा शासन की कीमती जमीनो पर कब्जा कर उसे बेचा जा रहा हैं और शासन को धता बताया जा रहा है उन्हे ही स्कूल जैसी पवित्र संस्था में अध्यक्ष बनाया जाता है दरअसल ये नेता इसी तरह की गड़बड़ी करने ऐसे पद पर बैठते हैं और नेताओं को भी दबाव होता है कि ऐसे नेताओं को लाभान्वित करने ऐसे पद दिए जाते हैं।एक ओर बेजा कब्जा हटाने एकतरफ प्रशासन का हाथ पैर फूलने लगता है वही स्कूल के सामने बेजा कब्जा करने वाले को ही अध्यक्ष नियुक्त करना जनमानस के मन में शंका उत्पन करता है।
*बेजा कब्जाधारियों भविष्य के है खतरनाक*
सरकार खाली पड़ी शासकीय जमीनों को लावारिस की तरह छोड़ देती है । भविष्य में उस पर कब्जा होता है, घर , दुकानें बनती है तब तक तहसील शांत बैठती है । लंबे समय तक उस पर काबिज हो जाने पर बेजाकब्जा धारी उस पर अपना अधिकार समझने लगता है और जब उसे किसी भी कारण से खाली कराया जाता है तो वह आक्रामक हो उठता है जैसे अभी कल्याणपुर में हुआ है । अगर सरकार शासकीय जमीनों को पौधारोपण कर या किसी भी तरह सुरक्षित रखें तो ऐसी नौबत नहीं आती जैसे मालखरौदा के छोटे रबेली में हुई। पिछले वर्ष राजस्व अमला छोटे रबेली पहुंचा और बेजा कब्जाधारियो को बेदखल करने की कार्रवाई की । इस बेदखली की कार्यवाही से बेजा कब्जाधारी इतने आक्रोशित हुए कि उन्होंने सरपंच को मार डाला । उन पर केस चला और उन सभी लोगों को आजीवन कारावास की सजा हुई है। इस मामले का फैसला 10 सितम्बर को आया है । अगर सरकार अपनी जमीनों को सुरक्षित रखती तो न लोग बेजा कब्जा करते और न ही ऐसे घटनाएं होती पर बिना कोई घटना सबक ले तो वह प्रशासन और शासन कहां ।
