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     *हुई गर्भवती,दरिंदों ने लड़की को बनाया हवस का शिकार,*

    कोर्ट के आदेश पर नाबालिग लड़की को गर्भपात के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था

    देहरादून: उत्तराखंड में एक नाबालिग लड़की की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही। दरिंदगों ने नाबालिग का रेप किया था। रेप के बाद नाबालिग लड़की दो माह की गर्भवती हो गई थी। कोर्ट के आदेश पर नाबालिग लड़की को गर्भपात के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिंता की बात यह रही कि नाबालिग लड़की को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के लिए पांच दिन का लंबा समय लग गया। ऐसे में पीड़िता और उसके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन अब जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।देहरादून अस्पताल में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के इलाज के बाद यहां डिस्चार्ज देने में 5 दिन ज्यादा लग गए। 3 दिन अल्ट्रासाउंड नहीं होने और दो दिन अस्पताल एवं पुलिस के बीच बेहतर समन्वय नहीं बन पाया, जिस कारण पीड़िता के साथ ही परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ी। कैंट थाना क्षेत्र में विगत दिनों एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात सामने आई थी। नाबालिग दो माह की गर्भवती हो गई थी। कोर्ट के आदेश पर गर्भपात के लिए दून अस्पताल में भर्ती किया गया। पांच दिन पूर्व उसे छुट्टी दी जानी थी, लेकिन तीन दिन महिला रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका।शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड एवं रिपोर्ट सुबह ही दे दी गई। अस्पताल से कहा गया कि पुलिस आएगी, तभी डिस्चार्ज किया जाएगा। पुलिस का कहना था कि इसके लिए पुलिस के आने की जरूरत नहीं है। शनिवार को कैंट थाने से महिला दारोगा सुबह साढ़े नौ बजे पहुंच गई, लेकिन करीब एक घंटे तक डॉक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी। दारोगा को वापस लौटना पड़ा। पूरा मामला एमएस एवं प्राचार्य स्तर तक पहुंचा तो नाराजगी जताई गई और करीब तीन बजे के बाद पीड़िता घर जा सकी। डीएमएस डॉ. धनंजय डोभाल बोले, शिकायत पर जांच कराई जाएगी।

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    कोर्ट के आदेश पर नाबालिग लड़की को गर्भपात के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था

    देहरादून: उत्तराखंड में एक नाबालिग लड़की की पीड़ा कम होने का नाम नहीं ले रही। दरिंदगों ने नाबालिग का रेप किया था। रेप के बाद नाबालिग लड़की दो माह की गर्भवती हो गई थी। कोर्ट के आदेश पर नाबालिग लड़की को गर्भपात के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिंता की बात यह रही कि नाबालिग लड़की को अस्पताल से डिस्चार्ज करने के लिए पांच दिन का लंबा समय लग गया। ऐसे में पीड़िता और उसके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, अस्पताल प्रशासन अब जांच की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ रहा है।देहरादून अस्पताल में नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के इलाज के बाद यहां डिस्चार्ज देने में 5 दिन ज्यादा लग गए। 3 दिन अल्ट्रासाउंड नहीं होने और दो दिन अस्पताल एवं पुलिस के बीच बेहतर समन्वय नहीं बन पाया, जिस कारण पीड़िता के साथ ही परिजनों को परेशानी झेलनी पड़ी। कैंट थाना क्षेत्र में विगत दिनों एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म की वारदात सामने आई थी। नाबालिग दो माह की गर्भवती हो गई थी। कोर्ट के आदेश पर गर्भपात के लिए दून अस्पताल में भर्ती किया गया। पांच दिन पूर्व उसे छुट्टी दी जानी थी, लेकिन तीन दिन महिला रेडियोलॉजिस्ट नहीं होने से अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका।शुक्रवार को अल्ट्रासाउंड एवं रिपोर्ट सुबह ही दे दी गई। अस्पताल से कहा गया कि पुलिस आएगी, तभी डिस्चार्ज किया जाएगा। पुलिस का कहना था कि इसके लिए पुलिस के आने की जरूरत नहीं है। शनिवार को कैंट थाने से महिला दारोगा सुबह साढ़े नौ बजे पहुंच गई, लेकिन करीब एक घंटे तक डॉक्टर से मुलाकात नहीं हो सकी। दारोगा को वापस लौटना पड़ा। पूरा मामला एमएस एवं प्राचार्य स्तर तक पहुंचा तो नाराजगी जताई गई और करीब तीन बजे के बाद पीड़िता घर जा सकी। डीएमएस डॉ. धनंजय डोभाल बोले, शिकायत पर जांच कराई जाएगी।