
आंनद राठौर ब्यूरो शक्ति:-किसी को मरने के बाद भी दो गज जमीन ना मिले, इंसानियत के लिए इससे बड़ा मज़ाक और क्या होगा. ऐसा ही वाक्या शक्ति जिले में एक बार फिर देखने को मिल रहा है. देश भर में लाखों करोड़ों खर्च कर बड़े-बड़े मुक्तिधाम बनवाये जाते हैं, लेकिन छत्तीसगढ में इन्ही मुक्तिधाम के अभाव में कभी खुले खेतों में तो कभी सड़क पर अंतिम संस्कार की तस्वीरें देखने को मिल जाती है. मुद्दा मीडिया में जाये तो प्रशासन हड़बड़ा कर जल्द मुक्तिधाम बनवाने के दावे करता है, लेकिन प्रशासन के दावे धरातल दिन गुजरने के साथ ही धराशाही होते नजर आते हैं.
*खेत में करना पड़ा अंतिम संस्कार*
दरअसल पूरा मामला जिले के शक्ति क्षेत्र का है, जहां नगर पंचायत अड़भार के ग्राम हरदी में रहने वाले शिवनारायण राठौड़ की मृत्यु गुरुवार को हो गई थी. ऐसे में परिवार में उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को गांव में ही करने का फैसला लिया गया.
बड़ी समस्या तब सामने आयी जब पता चला कि गांव में आजादी से अब तक मुक्तिधाम का निर्माण ही नहीं किया गया. ऐसे मजबूरन परिवारजनों ने अपने ही खेत में चिता के लिए जगह बनाई. परिजन ने मुक्तिधाम के अभाव में खुले आसमान के नीचे शव का अंतिम संस्कार किया.
*मौत के बाद भी मुश्किलें*
वहीं पीड़ित परिवार से बात करने पर मृतक के परीजनो ने बताया कि इस गांव में अब तक मुक्तिधाम नहीं है, ये बहुत दुःखद है. अपने पिता को शमशान तक भी नहीं ले जा सके आज जब दुनिया विकास की बात करती है तब ग्रामीण क्षेत्रों में ये हाल है.मनोज कहते हैं कि कम से कम हर व्यक्ति को मरने के बाद मुक्तिधाम में जलाने की व्यवस्था तो होनी ही चाहिए. इसलिए उनका परिवार प्रशासन से जल्द मुक्तिधाम बनवाने की गुहार लगा रहा है.
वहीं गांव के ही रहने वाले गांव वालो का कहना है कि गांव में आज तक लोग खुले आसमान के नीचे ही अपनों का अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं. कई बार इस सम्बंध में प्रशासन को अवगत कराया भी गया.वहां कोरे आश्वासन के अलावा कुछ हाथ नहीं लगा.
*इससे पहले भी ऐसी तस्वीरें आई थी*
नगर पंचायत हरदी अड़भार में इसी तरह की कई तस्वीरें सामने आयी थी. गौरतलब है कि गाँव में अंतिम संस्कार खुले खेत में या फिर सड़क किनारे अंतिम संस्कार किए जाने की तस्वीरें सामने आयी थी. हालांकि आज तक मुक्तिधाम तो तैयार नहीं हो सके.अब देखने वाली बात है कि प्रसासन कब जागेगा l
