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    *मुंगेली:- डाॅ. भीमराव अम्बेडकर शिक्षण संस्थान छत्तीसगढ़ द्वारा संविधान दिवस के अवसर पर कक्षा सज्जा एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। * 

    तिजराम साहू ब्यूरो मुंगेली:–  संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर, व्यवस्थापक एच.आर. भास्कर, प्राचार्य श्रीमती आशा दिवाकर एवं वरिष्ठ अभिभावक पार्षद संजय चंदेल द्वारा भारतीय संविधान के किताब एवं डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर दैनिक प्रार्थना के साथ कक्षा दूसरी के छात्र निखिल साहू ने संविधान के प्रस्तावना का सामूहिक वाचन कराया। उपस्थित अतिथियों का स्वागत चंदन लगाकर एवं बुके भेंटकर किया गया। सर्वप्रथम अतिथियों ने संविधान पर आधारित कक्षा सज्जा एवं रंगोली प्रतियोगिता का अवलोकन किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित महिला अभिभावकों अनामिका भास्कर, आयुषी कंवर, रिंकी कुर्रे, सुकृता साहू द्वारा कक्षा की सजावट और कक्ष के सम्मुख संविधान पर आधारित बनाये गये रंगोली की सराहना की गयी । यह संविधान के प्रति छात्रों को जागरूक करने का अच्छा उपाय है। पार्षद संजय चंदेल ने कहा कि विविधता के बावजूद भी संविधान के कारण देश एकसूत्र में बंधा हुआ है। यह संविधान के महत्ता को बताता है। अतः हमें संविधान की रक्षा करनी चाहिए। प्राचार्य श्रीमती आशा दिवाकर ने कहा कि आजादी के बाद देश को चलाने एवं एकसूत्र में बांधने के लिए नियम, कानून बनाने की बात आई तब संविधान निर्माण समिति ने संविधान बनाने का कार्य किया जिसमें बाबा साहब डाॅ. भीमराव अम्बेडकर जी का विशेष योगदान रहा। आज हमारा देश और हम डाॅ. अम्बेडकर तथा संविधान के प्रति कृतज्ञ हैं। एच.आर.भास्कर ने संविधान दिवस की बधाई देते हुए कहा कि आजादी के बाद देश में सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए डाॅ. भीमराव अम्बेडकर ने संविधान को लिखा और लागू हुआ इस संविधान में मौलिक अधिकार और कर्तव्य के कारण ही हम सब एक है आइये आज हम सब संविधान की रक्षा करने का संकल्प लें। आज बाबा साहब हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा स्वरचित संविधान देश में लागू है। इस संस्थान में छात्र प्रतिदिन दैनिक प्रार्थना के साथ प्रस्तावना का सामूहिक वाचन करते हैं। इसी का सुखद परिणाम है कि दूसरी कक्षा के छात्र निखिल साहू ने बिना देखे संविधान के प्रस्तावना का सामुहिक वाचन कराया। संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर ने संविधान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि भारत में कार्य करने के प्रशासनिक ढांचा संविधान के अंदर से तैयार की गई है अतः भारत का संविधान ही देश का मूल ग्रंथ है जिसमें सभी जानकारी निहित है अतः सभी नागरिकों को उपयोगी कानूनों की जानकारी का ज्ञान होना बहुत जरूरी है। संविधान लागू होने के पूर्व देश में सामाजिक ताना-बाना कुछ अलग ही था परंतु संविधान लागू होने के बाद एक नई व्यवस्था के अनुरूप देश का संचालन प्रारंभ हुआ। जिसमें सभी वर्गों के हित के लिए कुछ न कुछ अनुबंध का प्रावधान किया गया। बाबा साहब को नमन करते हुए कहा कि डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के तीन मूलमंत्रों शिक्षित बनों, संगठित रहो एवं संघर्ष करो के बारे में बताते हुए संविधान देश निर्माण की कुंजी है जिसमें न्यायपालिका, कार्यपालिका, व्यवस्थापिका चाहे स्थानीय प्रशासन हो संचालन की व्यवस्था स्पष्ट रूप से दी गई है। राज्य प्रशासनिक और भारतीय प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी में उपयोग करें।

    संविधान से संबंधित सवाल ज्यादातर पूछे जाते हैं। हमें केवल नौकरी के लिए ही नहीं पढ़ना-लिखना चाहिए बल्कि पढ़े-लिखे लोगों को चाहिए कि वे अपने-अपने समाज के लोगों को आगे बढ़ाने में अपनी-अपनी योग्यता का भरपूर सदूपयोग करें। और समाज में जागरूकता लाकर सभी को आगे बढ़ने का अवसर दें तथा देश की उन्नति में सहभागी बनें। डाॅ. अम्बेडकर ने इतनी कठिनाइयों को सहन करने के बाद पढ़-लिखकर, समाज के लिए जीवन भर संघर्ष किया और संविधान लिखकर दिया। तब से हम लोकतांत्रिक देश में संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उपयोग कर पा रहे हैं एवं अपने कर्तव्य का पालन करने में सक्षम हो रहे हैं। इसीलिए संस्थान हमेशा संविधान के प्रचार-प्रसार एवं संवैधानिक जागरूकता के लिए तत्पर रहता है। कार्यक्रम का संचालन उपप्राचार्य छत्रपाल डाहिरे ने किया। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक, संस्थान के पदाधिकारी एवं सदस्यगण, विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिका, छात्र-छात्रा एवं अभिभावकों ने संविधान दिवस के अवसर पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

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