सफलता की कहानी
महतारी वंदन योजना से गीता मरावी बनी आत्मनिर्भर
प्राप्त राशि से खरीदी सिलाई मशीन, प्रतिमाह कमा रही लगभग 03 हजार रुपए

,मुंगेली/ सीमित आय और जिम्मेदारियों के बोझ तले दबे सपनों को आज नई उड़ान मिल रही है। शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का नया अध्याय लिख रही है। विकासखण्ड लोरमी के ग्राम खुड़िया निवासी 29 वर्षीय श्रीमती गीता मरावी की कहानी इसी बदलाव की सजीव मिसाल है। उनका परिवार मजदूरी पर निर्भर था। घर की आवश्यकताओं को पूरा करना ही एक बड़ी चुनौती थी। गीता को सिलाई-कढ़ाई का हुनर था, लेकिन सिलाई मशीन खरीदने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। हुनर होने के बावजूद संसाधनों की कमी उनके सपनों की राह में बाधा बनी हुई थी। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से उन्हें महतारी वंदन योजना की जानकारी मिली। उन्होंने पंजीयन कराया और प्रतिमाह 1000 रुपए की सहायता राशि मिलने लगी। गीता ने इस राशि को व्यर्थ खर्च न कर, अपने सपनों की नींव बनाने में लगाया। उन्होंने सिलाई मशीन खरीदी और घर से ही सिलाई का कार्य शुरू कर दिया। शुरुआत में कुछ ही ऑर्डर मिले, लेकिन उनके काम की सफाई, मेहनत और समय पर डिलीवरी ने गांव में उनकी अलग पहचान बना दी। आज वे गांव की महिलाओं और बच्चों के कपड़े सिल रही हैं और प्रतिमाह लगभग 3000 रुपए की आय अर्जित कर रही हैं। अब गीता मरावी न केवल अपने परिवार की आर्थिक मदद कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन चुकी हैं। वे कहती हैं कि “महतारी वंदन योजना ने मेरे सपनों को हकीकत में बदल दिया। अब मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही हूं।” गीता मरावी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए सच्चे अर्थों में संबल साबित हो रही है।
