बलौदा में डीजल, कोयला और कबाड़ का कथित खेल! शिकायतें लगातार, कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
*‘सेटिंग’ के सहारे कारोबार चलने की चर्चा, थाना स्तर की निगरानी व्यवस्था पर सवाल; उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचने के बाद ही कार्रवाई होने का आरोप*

मनोज साहू ब्यूरो जांजगीर चांपा :-बलौदा/जांजगीर-चांपा। कोरबा जिले की सीमा से लगे बलौदा थाना क्षेत्र में डीजल, कोयला और कबाड़ के कथित अवैध कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में भारी वाहनों की लगातार आवाजाही, कोयला परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों के बीच कथित रूप से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर बनी हुई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं तो थाना स्तर पर इन पर प्रभावी और स्थायी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में डीजल की अवैध बिक्री, कोयले के संदिग्ध परिवहन तथा कबाड़ के कारोबार को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप है कि शिकायतें जब स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचती हैं, तभी पुलिस की ओर से कार्रवाई की सक्रियता दिखाई देती है। हालांकि कार्रवाई के बाद भी कथित गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं होने की बात कही जा रही है।
कार्रवाई होती है, लेकिन सवाल फिर भी बरकरार
स्थानीय लोगों और सूत्रों की चर्चाओं में सबसे अधिक सवाल कार्रवाई की प्रकृति को लेकर उठ रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि कुछ मामलों में वाहन या छोटे स्तर पर कारोबार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है, लेकिन यदि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या संगठित गतिविधि है तो उसकी तह तक पहुंचने का प्रयास नजर नहीं आता।
यही वजह है कि क्षेत्र में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि कहीं कार्रवाई केवल शिकायतों को शांत करने तक सीमित तो नहीं है? यदि अवैध कारोबार संगठित तरीके से संचालित हो रहा है तो केवल कुछ वाहनों अथवा छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई करने के बजाय इसके पूरे नेटवर्क की जांच आवश्यक है।
‘सेटिंग’ की चर्चा ने बढ़ाई पुलिस की मुश्किल
बलौदा क्षेत्र में कथित अवैध कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर ‘सेटिंग’ के सहारे कारोबार चलने की चर्चाएं भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही यह स्पष्ट है कि कथित रूप से ऐसी किसी व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल हैं। इसके बावजूद इस तरह की चर्चाओं का लगातार सामने आना पुलिस की निगरानी व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल जरूर खड़े करता है।
यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस के लिए भी आवश्यक है कि वह पारदर्शी कार्रवाई के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करे। वहीं यदि शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो पूरे नेटवर्क की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता होगी।
एसपी की सक्रियता के बावजूद थाना स्तर पर सवाल क्यों?
जांजगीर-चांपा जिले में पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पांडेय के नेतृत्व में अवैध गतिविधियों, अपराध और संदिग्ध कारोबार के खिलाफ विभिन्न थाना क्षेत्रों में कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में बलौदा थाना क्षेत्र से बार-बार डीजल, कोयला और कबाड़ से जुड़ी शिकायतों की चर्चा सामने आना थाना स्तर की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।
सवाल यह भी है कि जब जिले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अवैध गतिविधियों पर लगातार निगरानी और कार्रवाई की बात कर रहे हैं, तब थाना क्षेत्र में कथित रूप से चल रही गतिविधियों की जानकारी स्थानीय पुलिस को क्यों नहीं हो रही? क्या पुलिस को कार्रवाई के लिए शिकायतों का इंतजार करना पड़ता है, या फिर नियमित गश्त और सूचना तंत्र के माध्यम से ऐसी गतिविधियों पर स्वतः निगरानी रखी जा रही है?
बड़े नेटवर्क की जांच की जरूरत
डीजल, कोयला और कबाड़ से जुड़ा कारोबार यदि अवैध रूप से संचालित होता है तो इसमें केवल एक व्यक्ति या एक वाहन की भूमिका तक मामला सीमित नहीं रहता। ऐसे मामलों में परिवहन, भंडारण, खरीद-बिक्री और संरक्षण की संभावित कड़ियों की जांच महत्वपूर्ण होती है।
इसीलिए स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच यह मांग भी सामने आ रही है कि यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो पुलिस और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से पूरे नेटवर्क की जांच करें। संदिग्ध वाहनों, परिवहन दस्तावेजों, भंडारण स्थलों तथा कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच से ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
स्थानांतरण और पुनः पदस्थापना की चर्चाएं भी
बलौदा थाना क्षेत्र में अधिकारियों के स्थानांतरण और पुनः पदस्थापना को लेकर भी समय-समय पर स्थानीय चर्चाएं होने की बात सामने आती रही है। हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनके पीछे किसी प्रकार के तथ्यात्मक आधार की पुष्टि भी नहीं हो सकी है। ऐसे में इन दावों को केवल स्थानीय चर्चाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अब कार्रवाई नहीं, परिणाम चाहिए
बलौदा क्षेत्र में डीजल, कोयला और कबाड़ के कथित अवैध कारोबार को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अब निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतें गलत हैं तो पुलिस को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो केवल छोटी कार्रवाई के बजाय पूरे नेटवर्क की जांच कर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है—बलौदा क्षेत्र में कथित अवैध कारोबार पर स्थायी रोक कब लगेगी? शिकायतों की वास्तविकता की जांच कौन करेगा? और यदि थाना स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
इन सवालों के जवाब कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस की पारदर्शी जांच से ही सामने आ सकेंगे।

