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    *नैनो उर्वरक बने किसानों के भरोसेमंद साथी, बचत के साथ बढ़ रही उपज*

    *नैनो उर्वरक बने किसानों के भरोसेमंद साथी, बचत के साथ बढ़ रही उपज*

     

    *वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा, मिट्टी की उर्वरा शक्ति संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम*

    मुकेश साहू ब्यूरो मुंगेली, // कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का विस्तार अब किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है। खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति जैसी चुनौतियों के बीच नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी और किफायती विकल्प बनकर उभरे हैं। कृषि विभाग द्वारा वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से इन उर्वरकों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसका सकारात्मक असर जिले के किसानों में दिखाई देने लगा है। जिले के किसान अब पारंपरिक उर्वरकों के साथ नैनो तकनीक आधारित उर्वरकों को अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का संतुलित उपयोग फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में भी सहायक है।

    धान उत्पादक क्षेत्रों में परंपरागत रूप से किसान प्रति एकड़ 02 से 03 बोरी यूरिया और 01 बोरी डीएपी का उपयोग करते रहे हैं, जिस पर लगभग 1900 से 2200 रुपये तक खर्च आता है। ऐसे में नैनो उर्वरक किसानों के लिए राहत का माध्यम बन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार 500 एमएल नैनो यूरिया की एक बोतल लगभग एक बोरी पारंपरिक यूरिया के बराबर प्रभावी मानी जाती है। इससे किसानों को खाद की लागत में सीधी बचत के साथ परिवहन और भंडारण व्यय में भी कमी आती है। इसी प्रकार नैनो डीएपी के उपयोग से भी किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। 50 किलो डीएपी की पूरी मात्रा के स्थान पर 25 किलो डीएपी के साथ 500 एमएल नैनो डीएपी का उपयोग करने पर प्रति एकड़ 75 से 150 रुपये तक की बचत संभव है। साथ ही फसल को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और भूमि पर रासायनिक दबाव भी कम पड़ता है।

    उप संचालक कृषि ने बताया कि जिले में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा किसानों को इसकी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। विकसित कृषि संकल्प अभियान और सुशासन तिहार के माध्यम से किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन, आधुनिक कृषि तकनीकों तथा नैनो उर्वरकों के लाभों की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि भविष्य की टिकाऊ और लाभकारी कृषि के लिए उर्वरकों के उपयोग की पारंपरिक पद्धतियों में बदलाव आवश्यक है। नैनो तकनीक आधारित उर्वरक खेती को अधिक उत्पादक, पर्यावरण अनुकूल और संसाधन संरक्षण आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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