More

    *गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ*

    गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ

    आशीष कश्यप बिलासपुर:- गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय, बिलासपुर में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली एवं भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं स्वागत उद्बोधन के साथ हुई। उक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक चक्रवाल जी ने की। मुख्य अतिथि डॉ. सुनील शुक्ला, महानिदेशक, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सौराष्ट्र विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. नीलांबरी दवे उपस्थित थे। उक्त कार्यक्रम की संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की विश्वविद्यालय ईकाई संयोजक प्रो. सीमा राय, सलाहकार प्रो. अनुपमा सक्सेना एवं कार्यक्रम समन्वयक विश्वविद्यालय इन्क्यूबेशन सेंटर तथा एमएमटीटीसी के निदेशक प्रो. आलोक कुमार सिंह कुशवाहा इस अवसर पर उपस्थित थे।

    कार्यक्रम सलाहकार एवं अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. शैलेंद्र कुमार ने स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. सुनील शुक्ला, महानिदेशक, भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान, अहमदाबाद का परिचय कराते हुए बताया कि विश्वविद्यालय में माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक चक्रवाल के मार्गदर्शन एवं कुशल नेतृत्व में आगामी दिनों में EDII अहमदाबाद के सहयोग से तीन प्रमुख कार्यक्रम आयोजित होने जा रहे हैं जिनमें उद्यमिता विकास कार्यक्रम (19–31 जनवरी 2026), कौशल विकास राष्ट्रीय कार्यशाला (2–7 फरवरी 2026) एवं राष्ट्रीय सम्मेलन (9–10 फरवरी 2026) शामिल हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय के पिछले चार वर्षों के विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि माननीय कुलपति महोदय के नेतृत्व में वर्ष 2025 में इंडिया टुडे मैगज़ीन द्वारा प्रकाशित रैंकिंग में विश्वविद्यालय ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर बेहतरीन स्थान प्राप्त किया। कार्यक्रम अध्यक्ष माननीय कुलपति महोदय प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल ने मुख्य अतिथि को शॉल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मान भी किया।

    *बच्चों में कम उम्र से ही वित्तीय समझ, कौशल विकास और उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता : माननीय कुलपति महोदय प्रोफेसर आलोक चक्रवाल*

    कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे माननीय कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल जी ने अपने संबोधन में कहा कि विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. अमित द्विवेदी को राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त होना पूरे विश्वविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बच्चों में कम उम्र से ही वित्तीय समझ, कौशल विकास और उद्यमिता की ओर प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में लगभग 12,500 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यदि हर विद्यार्थी कौशल विकास पर ध्यान दे तो कोई भी छात्र बेरोजगार नहीं रहेगा। उद्यमिता, नई सोच और स्टार्टअप संस्कृति ही भविष्य का मार्ग है।

    *उद्यमिता शिक्षा आज के समय की आवश्यकता : प्रोफेसर नीलांबरी दवे*

    कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि एवं प्रथम महिला, सौराष्ट्र विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. नीलांबरी दवे ने अपने संबोधन में भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान के महानिदेशक डॉ. सुनील शुक्ला को बधाई देते हुए कहा कि उद्यमिता शिक्षा आज के समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा संस्थान तभी समृद्ध माने जाएंगे जब वे अपने विद्यार्थियों को कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में उद्यमिता आधारित कार्यक्रम केवल स्टार्टअप बनाने का मंच नहीं हैं, बल्कि यह विद्यार्थियों को सोचने, अवसर खोजने और बाजार की मांग को समझने का साहस भी देते हैं। डॉ. दवे ने EDII और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय द्वारा उद्यमिता विकास कार्यक्रम को एक महत्वपूर्ण पहल बताया और इसके दीर्घकालीन प्रभावों की सराहना की।

    *उद्यमिता एक अलग सोच और दृष्टिकोण मांगती है : डॉ. सुनील शुक्ला*

    मुख्य अतिथि डॉ. सुनील शुक्ला ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ होने वाले विकास कार्य उत्कृष्ट हैं और वर्तमान में चल रही 46 योजनाएँ विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगी। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2025 में EDII से जुड़े सत्यरंजन आचार्य एवं अमित कुमार द्विवेदी को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया था, जिनमें से अमित कुमार द्विवेदी वर्तमान में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के प्राध्यापक हैं। उन्होंने छात्रों को उद्यमिता एवं कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। डॉ. शुक्ला ने कहा कि उद्यमिता एक अलग सोच और दृष्टिकोण मांगती है। समस्या को रचनात्मक ढंग से हल करके समाधान को व्यवसायिक अवसर में बदलना ही श्रेष्ठ उद्यमिता है। यदि 46 विश्वविद्यालय योजनाएँ आज चल रही हैं तो भविष्य में यह 460 भी हो सकती हैं—और इसका आधार सिर्फ उद्यमिता है।
    उन्होंने कहा कि देश में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बीते 10 वर्षों में अत्यधिक विकसित हुआ है—जहाँ कभी मात्र 250 स्टार्टअप थे, वहीं आज इनकी संख्या 2 लाख से अधिक हो चुकी है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत का स्वरूप स्पष्ट रूप से उभरता हुआ दिखाई देगा।

    कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. अश्विनी कुमार दीक्षित ने उपस्थित अतिथियों एवं श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा आरंभ किए जा रहे नए कार्यक्रम विद्यार्थियों के स्टार्टअप को मजबूत आधार प्रदान करेंगे, जिससे वे इंटर्नशिप व प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे।

    कार्यक्रम का संचालन फॉरेस्ट्री विभाग की प्राध्यापिका डॉ. गरिमा तिवारी ने किया। कार्यक्रम के सह-समन्वयक श्री प्रेमनाथ कमलेश एवं डॉक्टर अमित कुमार खासकलम हैं। इस अवसर पर आयोजन समिति के सभी सदस्य, विभागाध्यक्ष, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, शोधार्थीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र – छात्राएं उपस्थित रहे।

    Trending News

    Technology