शारदीय नवरात्रि प्रारंभ: आदिशक्ति माँ महामाया के दरबार में 30,000 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित, जगमग हुआ शक्तिपीठ

शारदीय नवरात्रि प्रारंभ: आदिशक्ति माँ महामाया के दरबार में 30,000 मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित, जगमग हुआ शक्तिपीठ

*रतनपुर:* छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी और मंदिरों के शहर कहे जाने वाले रतनपुर में शारदीय नवरात्रि का भव्य शुभारंभ हो गया है। 51 शक्तिपीठों में से एक, आदिशक्ति माँ महामाया देवी मंदिर में इस वर्ष *30,000 तीस हजार मनोकामना ज्योति कलश* प्रज्वलित किए गए हैं। कलशों की रोशनी से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा है और हजारों श्रद्धालुओं का जनसैलाब माँ के दर्शन के लिए उमड़ रहा है।

### अभिजीत मुहूर्त में हुई कलश स्थापना

मंदिर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष पं. सतीश शर्मा ने बताया कि शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा पर सुबह 5 बजे माँ का नव श्रृंगार, अभिषेक और नए वस्त्र धारण कराए गए। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में विधि-विधान से घट स्थापना की गई। सुबह 7 बजे से ज्योति कलश प्रज्वलन शुरू हुआ जो शाम तक चला। मान्यता है कि इन ज्योतियों को नौ दिनों तक अखंड बनाए रखा जाता है।

पिछले वर्षों में यहाँ 25 हजार से 31 हजार तक ज्योति कलश जलाने का रिकॉर्ड रहा है। इस वर्ष तांबे और पीतल के कलशों में घी की ज्योत जलाई गई है, जिसमें करीब 100 से अधिक आचार्य लगातार 9 दिनों तक शतचंडी यज्ञ, दुर्गा सप्तशती पाठ और जसगीत का अनुष्ठान करेंगे।

### क्यों खास है महामाया मंदिर?

बिलासपुर से 25 किमी दूर स्थित यह मंदिर 11वीं शताब्दी में कलचुरी वंश के राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा बनवाया गया था। यह दक्षिण कोसल की कुलदेवी और रतनपुर राज्य की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं।

मान्यता के अनुसार यहाँ *देवी सती का दाहिना स्कंध* गिरा था, इसलिए इसे *कौमारी शक्तिपीठ* कहा जाता है। भगवान शिव ने स्वयं प्रकट होकर इसे यह नाम दिया था। मंदिर के गर्भगृह में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती तीनों स्वरूपों में माँ विराजमान हैं। यही कारण है कि नवरात्रि में यहाँ की गई पूजा कभी निष्फल नहीं होती।

### प्रशासन के व्यापक इंतजाम

शारदीय नवरात्रि पर लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।

– मंदिर सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक दर्शन के लिए खुला रहेगा।

– गर्भगृह के शुद्धिकरण के बाद भक्तों के लिए वर्चुअल स्क्रीन और कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था।

– मंदिर परिसर में रोज भंडारे का आयोजन।

– कालभैरव मंदिर के दर्शन के बाद ही यात्रा पूर्ण मानी जाती है, इसलिए वहां भी विशेष व्यवस्था।

रतनपुर को चतुर्युगी नगर भी कहा जाता है, जहाँ कलचुरी काल के तालाब और प्राचीन मंदिर आज भी मौजूद हैं।

श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

छत्तीसगढ़ के अलावा मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और झारखंड से भी श्रद्धालु माँ महामाया के दरबार में मनोकामना ज्योत जलाने पहुंच रहे हैं। भक्तों का मानना है कि सच्चे मन से जलाई गई मनोकामना ज्योत से संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

> *नवरात्रि में 30 हजार दीपों की रोशनी सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, एकता और नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है।*

बिलासपुर ब्यूरो चीफ़ मोहनीश सिंह राजपूत की खास रिपोर्ट

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