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    *मौत से पहले मौत होती है शराब:- इतवारी राम मछिया*

    0. शराब नशा मुक्ति महासंघ के सम्मेलन में पहुंचे बैगा समाज:- प्रदेश अध्यक्ष इतवारी मछिया

    हिमांशु सिंह ठाकुर:- ब्यूरो रिपोर्ट छत्तीसगढ़।

    ब्यूरो रायपुर/कवर्धा:– 3 फ़रवरी को शराब नशा मुक्ति महासंघ मुंगेली व बिलासुपर की वार्षिक महाधिवेशन अचानकमार के दुर्गम पहुंच विहीन क्षेत्र में सफलता के स्वर्णिम 10 वां वर्ष पूर्ण होने पर अभ्यारण के वन ग्राम अतरिया के कोटना पथरा में आयोजित किया गया जन स्वास्थ्य सहयोग,गनियारी बिलासपुर की संस्था नशामुक्ति के लिए संकल्प के साथ ग्रामीण अंचल में काम किया नशे के लत से पीड़ित लोगों का समूह बनाकर नशे से मुक्ति दिलाई उनके उपचार की व्यवस्था उन पर निगरानी रखी समूह बनाकर रोजगार भी उपलब्ध कराया महाधिवेशन में स्वागत बीरन माला एवं प्र​तीक चिन्ह से किया गया नशामुक्ति अभियान की समीक्षा हुई साथ ही आगामी रणनीति तैयार की गई कार्यक्रम में आदिम जनजाति बैगा समाज के प्रदेश अध्यक्ष इतवारी राम मछिया ने संघ के सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी उन्होंने कहा कि शराब मौत से पहले मौत है शराब से व्यक्ति और परिवार का मान सम्मान जीरो हो जाती है शराब पीने की आदत समाज और हमारी पीढी के लिए बहुत ही हानिकारक है हमारे विकास में बाधा है हम अपने बच्चो को अच्छी शिक्षा नहीं दे पाते है और शारीरिक क्षमता कम होती जाती है जिससे कई बीमारियों का सामना करना होता है जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था के चिकित्सक डॉ. गजानन फुटके एवं वरिष्ठ चिकित्सक योगेंन्द्र सिंह परिहार के द्वारा बताया गया कि शराब के सेवन से होने वाले शारीरिक सामाजिक,आर्थिक, नुकसान से संघ के लोगों को अवगत कराया वर्ष 2012-13 से जन स्वास्थ्य सहयोग संस्था निरंतर ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर रही है कई समूह के सदस्य शराब की लत से दूर होकर स्वरोजगार स्थापित करने में भी कामयाब हुए हैं यह तो सच है कि सामूहिक रूप से किए जाने वाला काम एक कारगर और मजबूती के साथ स्थापित होता है शराब नशा मुक्ति समूह के सदस्य सामूहिक रूप से मछली पालन, मुर्गीपालन,सत्तू निर्माण और वनोपज जैसे व्यवसाय करते हुए अपने परिवार के साथ एक कुशल जीवन यापन करने में कामयाब हुए हैं संस्था ने ग्रामीण क्षेत्रों में शराब नशा मुक्ति समूह बनाए हैं जिनकी वर्तमान में समूहों की संख्या 28 है जिसमें लगभग 320 से भी अधिक लोगों ने शराब पीने की लत से छुटकारा पाकर एक अच्छे जीवन यापन करने में सफलता पाई है समूहों के सदस्यों की स्वास्थ्य जांच समय-समय पर चिकित्सक द्वारा की जा रही है समूह की निगरानी और मदद के लिए संस्था के सामाजिक कार्यकर्ता अनिल बामने विशेष योगदान दे रहे हैं उन्होंने कहा कि सरकार को यह भी सोचना होगा कि शराबबंदी अगर की भी जाए तो जो शराब के नशे की लत वाले व्यक्ति हैं या इस नशे से ग्रसित है उन लोगों के उपचार की व्यवस्था भी सरकार को करनी चाहिए अन्यथा यह काम की सफलता सिर्फ और सिर्फ आंकड़ों में सिमटकर रह जाएगी सम्मेलन में छत्तीसगढ के कई जिलों से सामाजिक कार्यकर्ता स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही कबीरधाम जिले से गांधी ग्राम विकास समिति से चंद्रकांत यादव,चित्रारेखा राडेकर, दीपक कुमार बागरी,अमरसिंह तेलसिया बैगा,नर्मदा प्रसाद यादव,अनमोल फांडेशन रायपुर के अध्यक्ष अधिवक्ता संजय शर्मा, कर्मदक्ष से दीप बनर्जी,सुरेश पटेल, क्षितिज संस्था से ज्ञानाधार शास्त्री, वन विभाग से रेंजर विक्रांत विजेन्द्र, राष्टीय आजीविका मिशन से प्राणेश मेश्राम, जन स्वास्थ्य सहयोग से प्रफुल चंदेल, मंजू ठाकुर, सुर्यकांत शर्मा, जगदेव, सेवाराम धुर्वे,सीताराम,नरेश,कौशिल्या,कमल, धर्मेंद्र, शैलेंन्द्र, प्रकाश, क्रांती सहित 15 गाँव के नशा मुक्ति महासंघ से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।

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