कठिन संघर्ष और मेहनत का परिणाम संस्थान के 35वां स्थापना दिवस-राजेन्द्र दिवाकर

तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली:- डाॅ. भीमराव अम्बेडकर शिक्षण संस्थान छत्तीसगढ़ का 35वां स्थापना दिवस मनाया गया। संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर, व्यवस्थापक एच.आर. भास्कर एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार के सदस्य मुंजन कुर्रे तथा प्राचार्य आशा दिवाकर द्वारा सर्वप्रथम बाबा गुरूघासीदास एवं डाॅ. भीमराव अम्बेडकर के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर, सामूहिक प्रार्थना एवं संविधान के प्रस्तावना का वाचन किया गया। अतिथियों का स्वागत चंदन लगाकर एवं बुके भेंटकर किया गया। स्वागत उद्बोधन शत्रुहन कांत ने किया। संस्थान के उद्देश्यों की जानकारी राजेश दिवाकर ने दी। ’’मेरे नजरों में संस्थान की गतिविधियां’’ विषय पर जे.आर.साहू, जितेन्द्र कुमार, चेतनदास कुर्रे, महेन्द्र खरे, नीलू जांगड़े, अंजिता चंद्राकर, अनिता साहू एवं पूर्व छात्र एवं अभिभावक केशव कोशले ने अपने-अपने विचार रखे। प्राचार्य श्रीमती आशा दिवाकर ने कही कि मैं इस संस्था में विगत 30वर्षों से सेवा दे रही हूं। गीले जमीन में बैठने और पढ़ने वाले बच्चे आज डाॅक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं यही हमारी उपलब्धि है। संस्था के प्रादेशिक सचिव एवं व्यवस्थापक एच.आर.भास्कर ने कहा कि संस्था के प्रारंभ से ही जुड़ा हुआ हूं संस्था के प्रत्येक गतिविधियों में मेरी पूर्ण भागीदारी रहती है। संस्था के सदस्य एवं पदाधिकारी के रूप में कार्य करने का अवसर मिलने से प्रसन्नता व्यक्त किया। सभी के सहयोग से सीमित साधनों में 35वां स्थापना दिवस उपलब्धियों भरा रहा। उन्होंने अपने माता-पिता के नाम अतिशीघ्र एक अध्यापन कक्ष का निर्माण करवाने की घोषणा की। संस्थान के स्थापना के संबंध में संस्थाध्यक्ष ने बताया कि सर्वप्रथम संरक्षक बी.पी.केशकर एवं प्रथम अध्यक्ष बलदाऊप्रसाद खाण्डे के नेतृत्व में संस्था का गठन किया गया। संस्था द्वारा समाज के हर क्षेत्रों में विकास के लिए प्रयासों में कोई कमी नहीं किया गया। विषम परिस्थितियों में भी आज 35वें सोपान पर पहुंचने में जो सीढ़ी की तरह काम किया गया वह छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, संस्था के कर्मचारियों, सदस्यों व पदाधिकारियों तथा क्षेत्र के नागरिकों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मिले सहयोग एवं प्रेरणा ही है। संस्थान शिक्षा, स्वास्थ्य, शारीरिक, सामाजिक कल्याण, निःशक्त कल्याण, पर्यावरण, व्यावसायिक शिक्षा, कोचिंग आदि क्षेत्रों में अपना कार्य कर रही है। अशिक्षा के वातावरण से समाज को मुक्त कराना और नैतिक शिक्षा का पक्ष विकसित करना संस्थान की मूल चिंता रही है। साक्षरता एवं नशा विरोधी अभियान चलाकर जनचेतना का संचार करने में अग्रणी ग्रामीण, गरीब एवं प्रतिभावान विद्यार्थियों को निःशुल्क कोचिंग एवं प्रशिक्षण प्रदान करने में सफल प्रयास किया है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद कर गौरवान्वित महसूस किया जा रहा है। पर्यावरण जागरूकता, स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन के अलावा राज्य स्तर पर विभिन्न जिलों में प्रतिभावान छात्रों तथा उत्कृष्ट एवं वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान तथा समाज को एकसूत्र में बांधने विविध रचनात्मक कार्यों जैसे छड़ीदार, भंडारी, कड़ीहार सत्संग एवं प्रशिक्षण आदि में संस्था की जीवंत भागीदारी उल्लेखनीय है। इन्हीं के फलस्वरूप राज्य निर्माण के पंचम वर्षगांठ के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सामाजिक चेतना एवं सामाजिक न्याय क्षेत्र में गुरूघासीदास सम्मान से सम्मानित किया गया। आज 35वें सोपान में पहंुचने पर संस्था के उन समस्त पदाधिकारियों एवं सदस्यों को नमन है। सभी सदस्यों, पदाधिकरियों ने 35वें स्थापना दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मंच संचालन शत्रुहन कांत एवं आभार प्रदर्शन छत्रपाल डाहिरे ने किया। अंत में संस्था के उन सभी दिवंगत सदस्यों को दो मिनट मौन श्रद्धांजली अर्पित की गई। इस अवसर पर संस्थान के पदाधिकारी, सदस्य, अभिभावक व शिक्षक-शिक्षिका विशेष रूप से उपस्थित रहे।

