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*महर्षि वाल्मीकि जयंती पर शंकर मंदिर में गूंजे श्रद्धा के स्वर, पूजा-अर्चना कर आदिकवि को किया नमन*

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*महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जीवन में अपनाने का लिया संकल्प, धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना और सद्भाव का दिया संदेश*

तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली—- महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर 25 अक्टूबर को मुंगेली नगर स्थित शंकर मंदिर में श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना, वंदना एवं जयंती समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने आदिकवि महर्षि वाल्मीकि का श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए उनके चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। साथ ही उनके आदर्शों, विचारों और शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि का जीवन भारतीय संस्कृति, साहित्य और आध्यात्मिक परंपरा की अमूल्य धरोहर है। उनके द्वारा रचित रामायण ने सदियों से समाज को सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग, कर्तव्यपरायणता और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है।

*आदिकवि महर्षि वाल्मीकि के योगदान को किया याद*

महर्षि वाल्मीकि को संस्कृत साहित्य के आदिकवि के रूप में प्रतिष्ठित माना जाता है। उनके द्वारा रचित रामायण भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन एवं चरित्र का वर्णन करने के साथ ही समाज को नैतिक और मानवीय मूल्यों की शिक्षा देती है। रामायण में वर्णित सत्य, धर्म, मर्यादा, त्याग, करुणा और कर्तव्य के संदेश आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। उनके विचार समाज में सद्भाव, संस्कार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार महर्षि वाल्मीकि के पिता का नाम महर्षि प्रचेता तथा माता का नाम चर्षणी बताया जाता है, हालांकि उनके जीवन से संबंधित विभिन्न परंपराओं एवं ग्रंथों में अलग-अलग उल्लेख भी मिलते हैं।

*धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना का दिया संदेश*

संस्कृत भारती के जिला संयोजक डॉ. रामबाबू मिश्र ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि जयंती जैसे आयोजन समाज में धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को जागृत करने के साथ नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और महापुरुषों के आदर्शों से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के विचारों और शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने तथा उनके बताए आदर्श मार्ग पर चलकर समाज में नैतिकता, सद्भाव, संस्कार और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की रचनाएं और उनके संदेश युगों-युगों तक मानव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे। जयंती समारोह में प्रमुख रूप से गुलाबचंद उपाध्याय, विश्व हिंदू परिषद मुंगेली नगर अध्यक्ष पुहुपराम साहू, आकाश सोनी, नर्मदा सिंह राजपूत, डॉ. राजीव सिंह ठाकुर, कृष्ण कुमार दीक्षित, मोहन उपाध्याय, बुद्धेश्वर उपाध्याय, बीरबल सोनकर, अजय तिवारी, दयाचंद उपाध्याय, अश्वनी उपाध्याय, विजय चौबे, विजयगोपाल साहू, पीतांबर सिंह ठाकुर, जानवी ठाकुर, श्रेया पाण्डेय, श्रीयांशी पाण्डेय, देवांशी पाण्डेय, विजय बाघमार एवं रितेश पाण्डेय सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी उपस्थितजनों ने महर्षि वाल्मीकि की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना एवं वंदना कर उन्हें नमन किया और उनके आदर्शों को समाज में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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