
तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली:- डाॅ. भीमराव अम्बेडकर शिक्षण संस्थान द्वारा जिसमें संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर, व्यवस्थापक एवं सचिव एच.आर.भास्कर, वन विभाग के प्रतिनिधि एन.के.गहरवार एवं स्टाफ, विद्यालय के प्राचार्य आशा दिवाकर, संस्था के पदाधिकारी एवं सदस्यगण तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा अपने-अपने गांव घर से लाये गए पानी को एक बाल्टी में तथा खाद एवं मिट्टी को एक धमेला में एकत्रित कर तथा हाथ लगाकर महापंचामृत एवं महाखाद बनाया गया। वृक्ष के चारो तरफ साफ-सफाई एवं खुदाई कर महाखाद तथा महापंचामृत सींचा गया। सभी ने वृक्ष के चारों तरफ सुरक्षा कवच के रूप खड़े होकर पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के संबंध में ’वन है तो जीवन है, जल है तो कल है,

पर्यावरण बचाना है-जीवन सफल बनाना है। पर्यावरण है-तो हम हैं। पर्यावरण संरक्षण-हम करेंगे हम करेंगे।’ के नारे लगाये गये तथा वृक्ष लगाने का संकल्प लिया गया। अंत में मां के नाम अपने-अपने साथ लाये गये फलदार एवं छायादार पौधों को परिसर में रोपे गये। सर्वप्रथम अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण व पौध संरक्षण के साथ पर्यावरण संरक्षण के बारे में बारी-बारी से सभी ने विचार रखा। पानी के सदुपयोग करने व वाटर रिसाइकल कर उपयोग करने पर जोर दिया। संस्थाध्यक्ष राजेन्द्र दिवाकर ने कहा कि जिस तरह से पानी का दूरूपयोग हो रहा है और अनावश्यक पेड़ कटाई हो रही है उसे रोका जाना चाहिए। पेड़ लगाकर फोटो खिंचाने तक सीमित न रहें बल्कि अधिक से अधिक पेड़ लगाकर बढ़ने तक संरक्षण दें। और हम प्रेरक का कार्य करें। हमने संकल्प लिया है कि हम पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कार्य करते रहेंगे। जल, जंगल और जमीन के संरक्षण और संवर्धन करने से मानव समाज का कल्याण होगा

अन्यथा भविष्य में जल स्तर की कमी से सुखे की स्थिति, तापमान में वृद्धि जैसी भयावह स्थिति का सामना करना पड़ेगा। आओ हम सब मिलकर इस दिशा में कार्य करें। कार्यक्रम का संचालन उपप्राचार्य छत्रपाल डाहिरे ने की। इस अवसर पर योगकुमार पाटले, राजेश दिवाकर, वेदराम चतुर्वेदी, एन.डी. जोगांश, जे.आर.साहू, राहूल पात्रे, नरेश कुमार, टकेश्वर साहू, डिगेश्वर, पेंढारकर, जसवंत चतुर्वेदी, लीला पात्रे, नीलू जांगड़े, भुवनेश्वरी खांडे, आराध्या,अनुष्का आदि उपस्थित रहे।
