जली हुई कार से गायब हुए परिवार के राज को आखिरकार पुलिस ने सुलझा लिया।
कांकेर– पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। थाना चारामा के ग्राम चावड़ी में मिली जलती हुई कार की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। कार सवार गुमशुदा परिवार सकुशल मिल गया है। 72 लाख रुपए की बीमा राशि पाने के लिए परिवार ने साजिश रची थी। युवक समीरन सिकदार ने अपने पत्नी और बच्चों को धमतरी आशियाना लॉज में छोड़कर योजनाबद्ध तरीके से ग्राम चावड़ी पहुंचकर कार को आग लगाया था।कार में आग लगाने के बाद जंगल के रास्ते से पैदल रात में चारामा पहुंचा। इसके बाद चारामा से बस में सवार होकर धमतरी लॉज पहुंचा था। आशियाना लॉज धमतरी से परिवार को लेकर बस से रायपुर पहुंचा फिर इलाहाबाद, पटना, गुवाहाटी, रांची और संबलपुर घूमता रहा। नया मोबाइल लेकर दैनिक ऐप मोबाइल पर डाउनलोड कर कांकेर की खबरों से अपडेट होता रहता था। धमतरी लॉज एवं रायपुर फोटो स्टूडियो में देखे जाने की खबर मिलने के बाद बीमा की राशि हड़प करने की योजना विफल हो गई। इसके बाद सिमरन सीकदार अपने परिवार के साथ गांव वापस आ गया और पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया।दरअसल चारामा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चावड़ी में 1 मार्च को एक जलती हुई कार होने की सूचना मिली थी। सूचना पर जब पुलिस पहुंची तो कार पूरी तरह जल चुकी थी। जिसके बाद कार में देखा गया की कोई भी व्यक्ति सवार नहीं था। कार में सवार 4 लोग रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए थे। पुलिस को जानाकरी मिली कि कार पखांजुर के रहने वाले एक दंपति की है। जो रायपुर से पखांजुर अपने घर वापस लौटने के लिए निकले थे। जिनकी कार चारामा के चावड़ी के पास जलते हुए पाई गई, लेकिन में कार सवार परिवार के 4 सदस्य समीर सिकदार, पत्नी जया, और दो बच्चे गायब थे। इसके बाद पुलिस ने तेजी से जांच शुरू कर दी।लापता परिवार की तलाश में कांकेर पुलिस 5 टीमें बनाकर लगातार तलाशी अभियान में लगी रही। इस दौरान कांकेर पुलिस द्वारा 9 लाख से अधिक मोबाइल नंबरों का विश्लेषण किया गया। पखांजूर से रायपुर के बीच लगभग 1000 सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले गए। इस दौरान 300 से अधिक होटल, लाज, रैन बसेरा,धर्मशाला की चेकिंग की गई। 100 अधिक लोगों से पूछताछ की गई।
यूपी रूट, महाराष्ट्र रूट, उड़ीसा रूट के टोल नाका का बारीकी से विश्लेषण किया गया। समीरन सिकदार ने बताया कि 72 लाख रुपए की बीमा राशि पाने के लिए परिवार ने साजिश रची थी। पुलिस को पूछताछ में समीरन सिकदार ने बताया कि पूरे परिवार का इंश्योरेंस कराया था। बीमा पॉलिसी के अनुसार मृत्यु होने पर 72 लाख रुपया के भुगतान का प्रावधान था। इसी लालच में योजना बनाई थी।
