
रायपुर,,राज्य शासन की महत्वकांक्षी योजना जैविक खेती मिशन अंतर्गत क्षेत्र के किसान पिछले 2 वर्ष से जैविक खेती कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की उपजाऊ क्षमता, जल धारण क्षमता को बढ़ाने, मिट्टी की भौतिक दशा सुधारने तथा लाभकारी बैक्टीरिया केंचुआ को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के खेती संबंधित कार्य जैविक खेती में कृषि विभाग द्वारा कराया जा रहा है इसी दिशा में रासायनिक उर्वरक के बदले हरी खाद को बढ़ावा दिया जा रहा है हरी खाद की फसल के लिए ढैंचा बीज बहुत ही लाभकारी है इससे भूमि की भौतिक दशा तथा उपजाऊ गुणवत्ता में सुधार होता है एवं फसल का उपज अच्छे होते हैं खेत में उर्वरक नहीं डालने पढ़ते जिससे खेती की लागत में कमी आ रही हैं। हरी खाद के लिए ढैंचा फसल 40 से 45 दिन की अवधि अर्थात पुष्पन अवस्था में होने पर उसे धान की फसल के लिए खेत तैयार करते समय ट्रैक्टर हल अथवा रोटावेटर की सहायता से भूमि में मिला दिया जाता है, भूमि में मिलने से ढैंचा फसल हरी खाद के रूप में परिवर्तित होने से लाभदायक कार्बनिक खाद बन जाता है।
उप संचालक कृषि जिला मुंगेली डी.के. ब्यौहार के निर्देशानुसार एवं प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी विकासखंड पथरिया एल.के कोसले के मार्गदर्शन में किसानों को कृषि विभाग से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी क्षेत्र के सल्फा, चुनचुनिया, करही, सांवतपुर, खजरी एवं भकुरीडीह में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण, जैविक मेला तथा खेती के आवश्यक आदान सामग्री वितरण किया जा रहा है
ढैंचा बीज वितरण कार्यक्रम में क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी सल्फा विनोद साहू, कृषक मित्र मोहन ध्रुव, पितांबर निषाद, गया निषाद, रूपसिंह, पवन निषाद, मनहरण साहू, मिलन निषाद उपस्थित थे l
