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    *कहां गए पार्षद अपने ही बोर्ड के नीचे कचरे का अंबार, विनोबा भावे वार्ड की बदहाल सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल*

    तीजराम साहू ब्यूरो मुंगेली— नगर पालिका द्वारा शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन विनोबा भावे वार्ड क्रमांक 21 की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। वार्ड में उस स्थान पर, जहां पार्षद के नाम और स्वच्छता संदेश का बोर्ड लगा है, ठीक उसके नीचे कचरे का बड़ा ढेर जमा है। यह दृश्य न केवल नगर पालिका की सफाई व्यवस्था की विफलता को उजागर करता है, बल्कि वार्ड पार्षद की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में फैली गंदगी देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि कई दिनों से यहां सफाई नहीं हुई है। सड़क किनारे प्लास्टिक, पॉलिथीन, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट खुले में पड़े हुए हैं। कचरे के कारण आसपास दुर्गंध फैल रही है और मच्छर-मक्खियों के पनपने की आशंका भी बढ़ गई है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर नागरिकों को स्वच्छता का संदेश दिया जा रहा है, उसी स्थान पर गंदगी का साम्राज्य कायम है। इससे नगर पालिका के स्वच्छता अभियानों की गंभीरता और प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई कर्मचारियों की नियमित निगरानी नहीं होने के कारण वार्ड में कई जगहों पर कचरा समय पर नहीं उठाया जाता। शिकायतें करने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। रहवासियों का आरोप है कि वार्ड पार्षद केवल बोर्ड और प्रचार-प्रसार तक सीमित हैं, जबकि क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। नागरिकों का कहना है कि यदि पार्षद अपने नाम वाले बोर्ड के आसपास की सफाई तक सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं, तो पूरे वार्ड की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
    बरसात का मौसम शुरू होने वाला है और यदि समय रहते कचरे का निस्तारण नहीं किया गया तो नालियां जाम होने, जलभराव और बीमारियों के फैलने का खतरा और बढ़ जाएगा। ऐसे में नगर पालिका प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। शहर को स्वच्छता रैंकिंग में आगे लाने के दावे करने वाले जिम्मेदारों के लिए विनोबा भावे वार्ड की यह तस्वीर आईना साबित हो रही है। अब देखना यह होगा कि नगर पालिका प्रशासन और वार्ड पार्षद इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं या फिर स्वच्छता के दावे केवल कागजों और बोर्डों तक ही सीमित रहेंगे।

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